पूर्व मंत्री मन्नान मल्लिक का निधन, अंतिम दर्शन के लिए उमड़ा नेताओं और कार्यकर्ताओं का सैलाब
पूर्व मंत्री मन्नान मल्लिक का निधन, अंतिम दर्शन के लिए उमड़ा नेताओं और कार्यकर्ताओं का सैलाब
रांची: झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री, वरिष्ठ कांग्रेस नेता और श्रमिक आंदोलन के प्रखर हस्ताक्षर मन्नान मल्लिक का मंगलवार सुबह 83 वर्ष की आयु में रांची के पल्स अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। वे पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके निधन की खबर मिलते ही धनबाद समेत पूरे झारखंड के राजनीतिक, सामाजिक और श्रमिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। मन्नान मल्लिक के निधन की सूचना मिलते ही ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, कांग्रेस विधायक दल के नेता एवं पूर्व मंत्री डॉ. रामेश्वर उरांव, लाल किशोर नाथ शाहदेव, आलोक कुमार दूबे, कुमार राजा और एम. तौसीफ सहित कई वरिष्ठ कांग्रेस नेता पल्स अस्पताल पहुंचे। सभी नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके निधन को झारखंड की राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति बताया। इसके बाद उनका पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए पहले झारखंड विधानसभा लाया गया, जहां जनप्रतिनिधियों ने श्रद्धासुमन अर्पित किए। बाद में पार्थिव शरीर प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय पहुंचाया गया, जहां बड़ी संख्या में कांग्रेस नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस दौरान नेताओं ने उनके संघर्ष, जनसेवा और संगठनात्मक योगदान को याद किया। ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि मन्नान मल्लिक का निधन केवल कांग्रेस पार्टी ही नहीं, बल्कि पूरे झारखंड के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उन्होंने कहा कि मन्नान मल्लिक ने अपना पूरा जीवन गरीबों, मजदूरों और वंचित वर्ग के अधिकारों के लिए समर्पित कर दिया। उनका संघर्ष, सादगी और संगठन के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करता रहेगा। मन्नान मल्लिक का राजनीतिक जीवन बेहद संघर्षपूर्ण और जनसेवा के प्रति समर्पित रहा। उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत तत्कालीन बिहार के मुख्यमंत्री अब्दुल गफूर के निजी सचिव (पीए) के रूप में की। इसके बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और कांग्रेस संगठन को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे एक दशक से अधिक समय तक धनबाद जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे। उनके नेतृत्व में संगठन ने कोयलांचल क्षेत्र में मजबूत जनाधार तैयार किया। वर्ष 2009 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने धनबाद विधानसभा क्षेत्र से ऐतिहासिक जीत दर्ज की। बाद में तत्कालीन हेमंत सोरेन सरकार में उन्हें मत्स्य एवं पशुपालन मंत्री के रूप में कैबिनेट मंत्री बनने का अवसर मिला, जहां उन्होंने कई जनकल्याणकारी योजनाओं को आगे बढ़ाने का कार्य किया। पूर्व मंत्री डॉ. रामेश्वर उरांव ने कहा कि मन्नान मल्लिक की पहचान केवल एक राजनेता के रूप में नहीं थी, बल्कि वे कोयलांचल के श्रमिक आंदोलन के सबसे मजबूत नेताओं में शामिल थे। उन्होंने राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ (RCMS) और राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर यूनियन के कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में हजारों कोयला मजदूरों के अधिकारों की लड़ाई पूरी मजबूती से लड़ी। श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा। नेताओं ने कहा कि मन्नान मल्लिक एक सहज, मिलनसार, संघर्षशील और जनहित के प्रति पूरी तरह समर्पित जननेता थे। उनका जीवन राजनीतिक कार्यकर्ताओं और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा। परिजनों और कांग्रेस नेताओं के अनुसार, मन्नान मल्लिक का अंतिम संस्कार उनके पैतृक निवास स्थान पर पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।
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