CAT की स्थायी बेंच पर हाईकोर्ट का अल्टीमेटम, 14 अगस्त तक केंद्र से जवाब तलब

रांची में सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) की स्थायी पीठ स्थापित करने की मांग से जुड़ी जनहित याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है। अदालत ने कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) और विधि एवं न्याय मंत्रालय को निर्देश दिया है कि वे 14 अगस्त तक स्पष्ट करें कि पहले दिए गए अपने रुख के अनुरूप अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई, जबकि राज्य सरकार इस उद्देश्य के लिए लगभग दो एकड़ भूमि भी उपलब्ध करा चुकी है।
मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त तय की है। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अदालत को एक पत्र का हवाला देते हुए बताया गया कि फिलहाल रांची में CAT की स्थायी पीठ स्थापित करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। सरकार का तर्क था कि इस क्षेत्र से आने वाले मामलों की संख्या अपेक्षाकृत कम है, इसलिए स्थायी बेंच की आवश्यकता नहीं बनती।
हालांकि, इस दलील पर अदालत ने केंद्र सरकार के पूर्व रुख का उल्लेख किया। खंडपीठ ने कहा कि पिछली सुनवाई में केंद्र की ओर से बताया गया था कि रांची में स्थायी CAT बेंच की स्थापना का प्रस्ताव विभिन्न स्तरों पर विचाराधीन है और इस संबंध में जल्द सकारात्मक निर्णय आने की संभावना जताई गई थी। ऐसे में अब बदले हुए रुख पर अदालत ने स्पष्टीकरण मांगा है।
यह जनहित याचिका प्रदीप कुमार ने दायर की है। याचिकाकर्ता का कहना है कि वर्तमान में CAT की स्थायी पीठ पटना में कार्यरत है, जबकि रांची में केवल सर्किट बेंच संचालित होती है। उनका तर्क है कि झारखंड में केंद्रीय कर्मचारियों से जुड़े सेवा विवादों के 800 से अधिक मामले लंबित हैं। यदि रांची में स्थायी CAT बेंच स्थापित होती है तो इन मामलों के त्वरित निस्तारण के साथ कर्मचारियों को न्याय पाने के लिए दूसरे राज्य का रुख नहीं करना पड़ेगा।











