आरक्षित वर्ग के छात्रों के लिए सरकार का बड़ा ऐलान, BIT मेसरा में मिलेगी मुफ्त पढ़ाई

झारखंड सरकार ने अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और आदिम जनजाति समुदाय के आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली छात्रों के लिए उच्च तकनीकी शिक्षा का नया रास्ता खोल दिया है। सरकार और बीआईटी मेसरा के बीच हुए एक महत्वपूर्ण समझौते के बाद अब पात्र विद्यार्थियों को संस्थान के यूनिवर्सिटी पॉलिटेक्निक में बिना किसी शुल्क के शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
इस पहल के तहत प्रोजेक्ट भवन में राज्य के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं आदिम जनजाति कल्याण विभाग और बीआईटी मेसरा के बीच सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। राज्य सरकार की ओर से कल्याण विभाग के संयुक्त सचिव तथा बीआईटी मेसरा की ओर से यूनिवर्सिटी पॉलिटेक्निक की निदेशक डॉ. विजया लक्ष्मी ने इस समझौते को औपचारिक रूप दिया।
सरकार ने इस योजना के लिए अगले दस वर्षों में ₹79.40 करोड़ खर्च करने का निर्णय लिया है। योजना के अंतर्गत संस्थान पर आने वाले कुल व्यय का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार वहन करेगी। इसके माध्यम से हर वर्ष 850 योग्य विद्यार्थियों को न केवल निशुल्क तकनीकी शिक्षा मिलेगी, बल्कि छात्रावास और मेस की सुविधा भी बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के उपलब्ध कराई जाएगी।
इस योजना का लाभ केवल उन छात्रों को मिलेगा, जिनके परिवार की वार्षिक आय ₹2.50 लाख से कम है। लाभार्थियों का चयन पूरी तरह मेरिट के आधार पर किया जाएगा। सरकार ने इस व्यवस्था को शैक्षणिक सत्र 2025–26 से प्रभावी माना है।
यह पहल विशेष रूप से झारखंड के दूर-दराज़ इलाकों में रहने वाले उन छात्रों के लिए अहम मानी जा रही है, जो आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। नई व्यवस्था से ऐसे विद्यार्थियों को प्रतिष्ठित संस्थान में पढ़ाई का अवसर मिलेगा और उनके कौशल विकास को भी नई दिशा मिलेगी।
बीआईटी मेसरा प्रशासन ने भी इस साझेदारी को भविष्य की बड़ी पहल बताया है। संस्थान के कुलपति के अनुसार, सात दशक से अधिक समय से बीआईटी मेसरा शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देता रहा है। आने वाले वर्षों में यूनिवर्सिटी पॉलिटेक्निक की सीटों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ आईटीआई ट्रेड और अन्य रोजगारोन्मुखी व्यावसायिक पाठ्यक्रम भी शुरू करने की योजना बनाई गई है, जिससे अधिक छात्रों को लाभ मिल सके।











