सरकारी स्कूल में पेड़ कटाई मामले में नया मोड, थाने में जमा नहीं हुआ आवेदन !
राज्य के पूर्वी चंपारण जिले के फेनहारा क्षेत्र से सरकारी संपत्ति की लूट का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है।

राज्य के पूर्वी चंपारण जिले के फेनहारा क्षेत्र से सरकारी संपत्ति की लूट का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक सरकारी विद्यालय के शिक्षक ने ही अपनी मनमानी करते हुए परिसर में मौजूद वर्षों पुराने और हरे-भरे बरगद के पेड़ को बेच दिया। इस मामले में नया मोड आ गया है। बताया जा रहा है कि पेड़ कटाई संबंधी आवेदन तैयार तो किया गया, लेकिन उसे थाने में जमा ही नहीं किया गया। अब सबकी नजरें प्रशासन पर टिकी हुई हैं।
मिली जानकारी के अनुसार फेनहारा स्थित सरकारी स्कूल में एक हरे भरे बरगद के पेड की कटाई हो रही थी। मिली खबर के अनुसार, जब इस हरे-भरे पेड़ का दूसरा हिस्सा काटा जा रहा था, तभी सूचना मिलने पर डायल 112 की पुलिस टीम और प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी मौके पर पहुंचे। एक्शन मोड में आए अधिकारियों ने तुरंत प्रभाव से पेड़ की कटाई को रुकवाया और बीच-बचाव कर मामले को शांत कराया। मौके पर मौजूद लोगों ने देखा कि जिस पेड़ को काटा जा रहा था, वह पूरी तरह से हरा-भरा है और उसकी जड़ों के पास कुल्हाड़ी और कटाई के स्पष्ट निशान मौजूद हैं।
अब प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ने स्थिति का जायजा लेने के बाद एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विद्यालय की रसोइया द्वारा यह पेड़ विद्यालय के ही शिक्षक सुधाकर सिंह के सीधे आदेश पर काटा जा रहा था। इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल विद्यालय की प्रभारी प्रधानाध्यापिका की भूमिका पर उठ रहा है। प्रधानाध्यापिका ने पेड़ कटाई के खिलाफ थाने में देने के लिए लिखित आवेदन तो तैयार किया, लेकिन बताया जा रहा है कि उसे आवेदन को कभी थाने में जमा ही नहीं कराया गया। इस संदिग्ध चुप्पी और मामले को अंदर ही अंदर रफा-दफा करने की कोशिशों ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। एक सरकारी शिक्षक द्वारा ही सरकारी संपत्ति को निजी समझकर बेच देना और हेडमास्टर का शिकायत दबा लेना, सिस्टम में चल रहे एक बड़े खेल की ओर इशारा कर रहा है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इस मामले में प्रशासन क्या ठोस कार्रवाई करता है।
पूर्वी चंपारण से सोहराब आलम की रिपोर्ट











