जर्जर आवास के गिरने का मामला, प्रशासन हुआ गंभीर, जांच का आदेश
झारखंड के बोकारो जिले में जर्जर आवास के गिरने के मामले ने तूल पकड लिया है। घटना की खबर सामने आने के बाद अब प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच का आदेश दिया है।

झारखंड के बोकारो जिले में जर्जर आवास के गिरने के मामले ने तूल पकड लिया है। घटना की खबर सामने आने के बाद अब प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच का आदेश दिया है। जांच रिपोर्ट को 72 घंटे में सौंपने का आदेश दिया गया है।
मिली जानकारी के अनुसार सिटी के सेक्टर-12 E में रक्षाबंधन के दिन दो ब्लॉक भरभराकर गिर पडे। दोनों ब्लॉक अगल-बगल स्थित थे। इनमें एक ब्लॉक गत 14 अगस्त को क्वार्टर संख्या 1283 से 1288 तक गिरा था, जबकि दूसरा ब्लॉक रक्षाबंधन के दिन क्वार्टर संख्या 1289 से 1294 तक भरभराकर धराशायी हो गया। गनीमत रही कि दोनों हादसों में किसी तरह की मानव क्षति नहीं हुई। हालांकि, क्वार्टरों में रह रहे परिवारों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा। हादसे के बाद स्थानीय लोगों में बीएसएल प्रबंधन के खिलाफ जबरदस्त आक्रोश था। मौके पर पहुंचे बीएसएल के एक अधिकारी को लोगों ने रोक लिया। लोगों का आरोप था कि क्वार्टर पहले से ही जर्जर स्थिति में थे और इसकी शिकायत कई बार मेंटेनेंस विभाग से की गई थी। बावजूद इसके, समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। अब इसी मामले में संज्ञान लेने की खबर है। बताया जा रहा है कि जर्जर आवासों को लेकर सामने आई खबर के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है।
मिली जानकारी के अनुसार बोकारो उपायुक्त ने सेक्टर-12E में आवास गिरने की घटना पर संज्ञान लेते हुए चास एसडीएम प्रांजल ढांडा को पूरे मामले की जांच का निर्देश दिया है। साथ ही 72 घंटे के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। इसी निर्देश के बाद चास एसडीएम प्रांजल ढांडा शनिवार को सेक्टर-12E पहुंचीं और मौके का निरीक्षण किया। उन्होंने प्रभावित आवासों और आसपास के इलाकों का जायजा लिया, साथ ही स्थानीय लोगों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं। स्थानीय लोगों ने बताया कि इन आवासों की कई वर्षों से मरम्मत नहीं हुई है। लोगों का कहना है कि जिन आवासों में वे रह रहे हैं, उनकी स्थिति लगातार खराब होती जा रही है।
जांच के दौरान एक महत्वपूर्ण बात भी सामने आई। एसडीएम के मुताबिक, जो आवास गिरा है, वह बीएसएल की डैमेज लिस्ट में शामिल नहीं था। वहीं, आसपास के कुछ ऐसे आवास भी हैं जिन्हें डैमेज लिस्ट में रखा गया था और वहां भी आवासीय ढांचे को नुकसान पहुंचा है। एसडीएम ने कहा कि पूरे मामले को लेकर बीएसएल प्रबंधन से बातचीत की जाएगी और आवश्यक कार्रवाई के लिए रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
वहीं, स्थानीय लोगों की एक बड़ी शिकायत बीएसएल के मेंटेनेंस सिस्टम को लेकर भी है। लीजधारी और लाइसेंसधारी आवासधारियों का कहना है कि उन्हें अपने स्तर से बीएसएल में मेंटेनेंस की शिकायत करने की सुविधा नहीं मिलती, जबकि वे मेंटेनेंस के लिए शुल्क देते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब आवासधारियों से मेंटेनेंस का पैसा लिया जाता है, तो फिर जर्जर आवासों की समय पर मरम्मत क्यों नहीं होती?
बताया जा रहा है कि यह मामला सिर्फ सेक्टर-12E के दो ब्लॉकों तक सीमित नहीं है। बोकारो में समय-समय पर जर्जर बीएसएल आवासों के गिरने और उनकी खराब स्थिति की खबरें सामने आती रही हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रशासन की जांच रिपोर्ट में क्या सामने आता है और उसके बाद बीएलएल प्रबंधन क्या कदम उठाता है।
बोकारो से चंदन सिंह की रिपोर्ट










