बिहार की पाठ्य पुस्तकों में शामिल होगी पं. शुक्ल की जीवनी : शिक्षा मंत्री
बिहार की पाठ्य पुस्तकों में चंपारण सत्याग्रह के प्रणेता पंडित राजकुमार शुक्ल की जीवनी शामिल की जाएगी। यह घोषणा शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने पं. शुक्ल की 151वीं जयंती समारोह में की।

बिहार की पाठ्य पुस्तकों में चंपारण सत्याग्रह के प्रणेता पंडित राजकुमार शुक्ल की जीवनी शामिल की जाएगी। यह घोषणा शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने रविवार को बिहार विधान परिषद् के एनेक्सी हॉल में आयोजित पं. शुक्ल की 151वीं जयंती समारोह में की।
तिवारी ने कहा कि पं. शुक्ल की जीवनी को पाठ्य पुस्तकों में शामिल करने की घोषणा बहुत पहले हो जानी चाहिए थी। नई पीढ़ी को पं. शुक्ल के योगदान और उनके संघर्ष से परिचित कराना जरूरी है। शिक्षा मंत्री ने अगले वर्ष से पं. शुक्ल की जयंती को राजकीय समारोह के रूप में मनाने की मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की घोषणा का स्वागत किया और इसके लिए मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद चंद्रवंशी द्वारा पं. शुक्ल के नाम पर संग्रहालय बनाने की घोषणा पर भी प्रसन्नता व्यक्त की।
तिवारी ने लोगों से आग्रह किया कि महात्मा गांधी के चंपारण आने की कहानी पढ़ने से पहले पं. राजकुमार शुक्ल के बारे में पढ़ें। पं. शुक्ल ही गांधी जी को चंपारण लेकर आए थे और चंपारण की धरती पर गांधी जी के आंदोलन ने उन्हें महात्मा के रूप में स्थापित किया। शिक्षा मंत्री ने समाज से एकजुटता का आह्वान करते हुए कहा कि हमें जातियों में बंटने के बजाय एकजुट रहना चाहिए। हम सब सनातनी हैं। एक रहेंगे, तभी सुरक्षित रहेंगे। उन्होंने हर घर में रामचरितमानस रखने और उसके नियमित पाठ पर भी जोर दिया। साथ ही, 26 अगस्त को रविंद्र भवन में आयोजित कार्यक्रम में लोगों से शामिल होने का आग्रह किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री, विधान परिषद् के सभापति, शिक्षा मंत्री सहित अन्य अतिथियों ने ‘शुक्ल शौर्य’ स्मारिका का विमोचन किया। लोक गायिका कल्पना पटवारी को ‘पं. राजकुमार शुक्ल कला शिखर सम्मान’ से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन पंडित राजकुमार शुक्ल स्मृति संस्थान के तत्वावधान में किया गया। संस्थान के केंद्रीय अध्यक्ष राजेश भट्ट ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।











