राज्य में निर्मित उत्पादों को सरकार देगी प्राथमिकता, उद्यमियों को भूमि उपलब्ध कराने में भी मिलेगा सहयोग
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में उद्योगों को सशक्त करने के लिए उद्यमियों, युवाओं तथा स्थानीय उत्पादकों के हित में महत्वपूर्ण और दूरगामी निर्णय लिए हैं।

औद्योगिक विकास किसी भी राज्य को समृद्ध, सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में उद्योगों को सशक्त करने के लिए उद्यमियों, युवाओं तथा स्थानीय उत्पादकों के हित में महत्वपूर्ण और दूरगामी निर्णय लिए हैं। प्रदेश में निर्मित उत्पादों की खरीद को सरकार अब अपनी खरीद में प्राथमिकता देगी।
मुख्यमंत्री का मानना है कि बिहार में निर्मित कुल उत्पादों का कम से कम 30 प्रतिशत खपत बिहार में ही हो। साथ ही, यहां स्थानीय उद्योग स्थापित करने के इच्छुक उद्यमियों को आवश्यक भूमि उपलब्ध कराने में भी सहयोग करेगी। बिहार सरकार राज्य आधारित वस्तुओं, स्थानीय उत्पादों और उद्यमियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ऐसा कर रही है। सरकार की यह पहल ‘मेक इन बिहार’, ‘इन्वेस्ट इन बिहार’ और ‘बिहार फर्स्ट’ की भावना को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी गुरुवार को नई दिल्ली रवाना हुए हैं। यहां उद्योगपतियों के साथ एक विशेष वार्ता करेंगे, जिससे राज्य में करोड़ों रुपये के औद्योगिक निवेश के मार्ग प्रशस्त होने की संभावना है। उद्योग स्थापित करने के लिए भूमि उपलब्धता कई बार उद्यमियों की सबसे बड़ी चुनौती होती है। उन्हें इस समस्या से निजात दिलाने के लिए सरकार उपयुक्त भूमि उपलब्ध कराने में सहयोग करेगी। इसके लिए भूमि आवंटन की प्रक्रिया को सरल और तेज बनाया जाएगा, ताकि कोई भी उद्यमी अपने सपने को अमल में लाने से पहले समस्या से न जूझे। यह सहयोग केवल बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कारीगरों, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को भी समान रूप से लाभान्वित करेगा।
बिहार को पूर्वी भारत का प्रमुख औद्योगिक और मैन्यूफैक्चरिंग हब बनाने के लिए यहां ‘बिहार एमएसएमई नीति-2026’ लागू की जा रही है। इसके तहत अगले पांच वर्षों में यहां करीब पांच करोड़ सूक्ष्म, लघु एवं माध्यम उद्योग इकाइयों की शुरुआत होगी। साथ ही बिहार उद्योग नीति 2026 (औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति) के जरिए भूमि आवंटन, पूंजी सब्सिडी, कर छूट और एकल खिड़की मंजूरी जैसी सुविधाओं को विस्तार दिया जाएगा।
राज्य की असली ताकत उसके लोग और स्थानीय संसाधन हैं। राज्य आधारित वस्तुओं और उद्योगों को प्राथमिकता देकर सरकार आत्मनिर्भर बिहार की नींव और मजबूत कर रही है। इन नीतियों की बदौलत न केवल औद्योगिक निवेश बढ़ेगा, बल्कि बिहार देश के औद्योगिक मानचित्र पर एक प्रमुख स्थान बनाने में सफल होगा। इससे लाखों लोगों एवं युवाओं को अपने ही राज्य में रोजगार भी मिलेगा।











