सरस मेला बना सांस्कृतिक सेतु, कश्मीर से कन्याकुमारी तक पहुंची बिहार की लोककलाएं, अब तक सभी रिकॉर्ड टूटे
सरस मेला के माध्यम से लोक कलाएं देश के एक छोर से दूसरे छोर तक पहुंच रही हैं। देश के 15 राज्यों से आई हुनरमंद ग्रामीण महिलाएं एक-दूसरे को अपनी लोककला और हस्तशिल्प से जोड़ रही हैं।

पटना: सरस मेला के माध्यम से लोक कलाएं देश के एक छोर से दूसरे छोर तक पहुंच रही हैं। देश के 15 राज्यों से आई हुनरमंद ग्रामीण महिलाएं एक-दूसरे को अपनी लोककला और हस्तशिल्प से जोड़ रही हैं। वहीं आगंतुक और नई पीढ़ी भी अपनी सदियों पुरानी संस्कृति से परिचित हो रही है।
देश के अन्य राज्यों से आई स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं जीविका दीदियों से बिहार के हस्तशिल्प, लोक कला और संस्कृति से वाकिफ हो रही हैं। बिहार की सिक्की कला, बम्बू कला, सुजनी और मधुबनी पेंटिंग से बने शिल्प अन्य राज्यों की महिला उद्यमियों को लुभा रहे हैं।
कश्मीर के श्रीनगर से आई महबूबा मलिक को बिहार का शिल्प रास आ गया है। उन्होंने समस्तीपुर की जीविका दीदी कुमारी किरण से बांस से बनने वाले उत्पादों की कसीदाकारी देखी और बहुत पसंद आई। उन्होंने बांस से उत्पाद बनाना सीखा और कश्मीर के लिए ऑर्डर भी दिया है।
कमोबेश सभी राज्यों की हुनरमंद महिलाएं जीविका दीदियों से उनकी सफलता और आत्मनिर्भरता की कहानी सुन रही हैं और उनके उत्पादों और शिल्प को अपना भी रही हैं। लिहाजा सरस मेला के माध्यम से बिहार की लोककलाएं और हस्तशिल्प राष्ट्रीय स्तर पर भी परिलक्षित हुआ है। यह मेला अब केवल बिक्री का नहीं, बल्कि हुनर के आदान-प्रदान का राष्ट्रीय मंच बन गया है।
सरस मेला के इस वित्तीय वर्ष के प्रथम संस्करण ने पिछले सभी खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड से आगे निकल गया है। रविवार को 74 लाख रुपये से अधिक का ऐतिहासिक कारोबार हुआ। 70 हजार से अधिक लोग आए और जमकर खरीददारी की। यह सरस मेला के प्रति लोगों के आकर्षण एवं यहां बिक रहे उत्पादों के प्रति उनके द्वारा दिए गए सम्मान को दर्शाता है।
20 सितंबर से जारी बिहार सरस मेला का मंगलवार 29 सितंबर 26 की शाम समापन हो जाएगा। लिहाजा लोग जमकर खरीददारी कर रहे हैं और अपने मनपसंद व्यंजनों का लुत्फ उठा रहे हैं। सोमवार को जीविका और अर्न्स्ट एंड यंग संस्था के तत्वावधान में क्रेता-विक्रेता संवाद जारी रहा।
सोमवार को मखाना, मक्का, पोटेटो कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग और अचार की गुणवत्ता, ब्रांडिंग और बिक्री पर विशेष चर्चा हुई। इस चर्चा में द ग्रेट हिमालय फूड कंपनी, प्रकाश श्री एग्रोटेक और जीतवन सप्लाई चेन के प्रतिनिधियों ने अपनी राय रखी।संवाद कार्यक्रम में श्री विनय कुमार, निदेशक (उद्यम), जीविका और श्री संगीत कुमार, परियोजना प्रबंधक, जीविका ने भी सलाह दी और उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने हेतु किए जा रहे कार्यों पर चर्चा की।
बिहार की लोक कलाओं पर आधारित परिधान, उत्पाद और शिल्प की जमकर बिक्री हो रही है। कश्मीर के ड्राई फ्रूट्स, तेलंगाना के स्टॉल से साड़ी, तौलिया, चादर, रूमाल, गोवा के स्टॉल से दोहर, चादर, पर्स, जीविका दीदियों के शिल्पग्राम से परिधान और हस्तशिल्प से बने उत्पाद, मधुग्राम से कई फ्लेवर के मधु, जानकी सिलाई सह कपड़ा उत्पादक समूह के स्टॉल से सलवार सूट, नाइटी, कुर्ती आदि की जमकर बिक्री हो रही है।
जीविका दीदी की रसोई के स्टॉल से अब तक 4 लाख से अधिक के व्यंजनों की बिक्री हुई है। अन्य सभी स्टॉल भी आकर्षण एवं बिक्री के खास केंद्र बने हुए हैं। मंगलवार की शाम सरस मेला के प्रथम संस्करण का समापन होगा, लेकिन लोगों के दिलों में सरस मेले की मिठास और सांस्कृतिक विरासत की यादें बनी रहेगी।










