बिहार पंचायत चुनाव से पहले बदलेगा गांवों का नक्शा! आया बड़ा अपडेट, सरपंच-मुखिया की बढ़ेगी 60 फीसदी सीटें...
बिहार पंचायत चुनाव को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। अगले साल होने वाले पंचायत चुनाव से पहले पंचायतों के परिसीमन की तैयारी शुरू हो गई। परिसीमन के बाद मुखिया और सरपंच के पदों की संख्या बढ़ सकती है।

बिहार पंचायत चुनाव को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। अगले साल होने वाले पंचायत चुनाव से पहले पंचायतों के परिसीमन की तैयारी शुरू हो गई। इस परिसीमन के बाद गांवों का नक्शा पूरी तरह बदल जाएगा। इस बीच पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने कहा कि सरकार ने 2011 की जनगणना के आधार पर पंचायतों की सीमा तय करने का फैसला किया है। यह काम पूरा होने के बाद ही पंचायत चुनाव की अगली प्रक्रिया शुरू होगी। परिसीमन के बाद मुखिया और सरपंच के पदों की संख्या बढ़ सकती है। मौजूदा आंकड़ों के मुकाबले यह बढ़ोतरी करीब 60 फीसदी तक हो सकती है।
दरअसल मौजूदा मुखिया और सरपंचों का कार्यकाल नवंबर-दिसंबर 2026 में खत्म होने वाला है। इसके बाद पंचायतों का नया परिसीमन किया जाएगा। बिहार में अभी करीब 8,053 ग्राम पंचायतें हैं। नई व्यवस्था में इनकी संख्या बढ़कर करीब 13 हजार होने की संभावना है।यानी मुखिया के पदों में करीब 61 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है। परिसीमन के बाद मुखिया के पदों की संख्या मौजूदा 8053 से बढ़कर करीब 13 हजार होने की संभावना है।
परिसीमन का असर सिर्फ मुखिया के पदों पर नहीं पड़ेगा। ग्राम कचहरी और सरपंच के पदों की संख्या में भी बढ़ोतरी हो सकती है। 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार पर परिसीमन की प्रक्रिया होगी। आबादी के हिसाब से पंचायत और वार्ड का गठन किया जाएगा। प्रस्तावित व्यवस्था में करीब 7 हजार की आबादी पर एक ग्राम पंचायत और करीब 500 की आबादी पर एक वार्ड बनाने का प्रावधान बताया गया है।
कौन सा गांव किस पंचायत में रहेगा, किस पंचायत की सीमा कहां तक होगी, किन इलाकों को एक पंचायत में शामिल किया जाएगा, इन तमाम सवालों का जवाब परिसीमन के बाद सामने आएगा। परिसीमन पूरा होने के बाद आरक्षण रोस्टर तैयार किया जाएगा। पंचायत चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे संभावित प्रत्याशियों की सबसे ज्यादा नजर होगी। क्योंकि आरक्षण बदलने के साथ चुनावी दावेदारी भी बदल सकती है। जो सीट पिछले चुनाव में सामान्य थी, वह आरक्षित हो सकती है। जो सीट आरक्षित थी, उसका स्वरूप बदल सकता है।
वहीं इस बीच पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने कहा कि पंचायतों की सीमा तय करने यानी परिसीमन का काम पूरा होने के बाद ही पंचायत चुनाव की आगे की तैयारी होगी। परिसीमन से लेकर आरक्षण की सूची तैयार करने और फिर चुनाव कराने तक की पूरी प्रक्रिया राज्य निर्वाचन आयोग की देखरेख में होती है। इसी वजह से अभी पंचायत चुनाव की पक्की तारीख या समय-सीमा बताना संभव नहीं है। सरकार की कोशिश है कि परिसीमन और आरक्षण का काम समय पर पूरा हो और इसके बाद पंचायत चुनाव की प्रक्रिया तय समय के अनुसार आगे बढ़े।











