देर रात सदर अस्पताल पहुंचे प्रभारी मंत्री संजय सिंह; SNCU से गायब मिले डॉक्टर, बेड पर खून देख सीएस पर भड़के
जमुई जिले के प्रभारी मंत्री संजय सिंह ने जमुई सदर अस्पताल का औचक निरीक्षण किया, जहाँ उन्हें SNCU में डॉक्टरों की अनुपस्थिति और वार्डों में गंदगी जैसी गंभीर लापरवाही मिली। उन्होंने सिविल सर्जन को फटकार लगाई।

जमुई जिले के प्रभारी मंत्री संजय सिंह ने जमुई सदर अस्पताल का औचक निरीक्षण किया, जहाँ उन्हें SNCU में डॉक्टरों की अनुपस्थिति और वार्डों में गंदगी जैसी गंभीर लापरवाही मिली। उन्होंने सिविल सर्जन को फटकार लगाई और अवैध नर्सिंग होम की जांच के आदेश देते हुए एक सप्ताह में सुधार का आश्वासन दिया।
सदर अस्पताल की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं की हकीकत जानने के लिए शुक्रवार की देर रात करीब 10:30 बजे पीएचईडी मंत्री सह जिला प्रभारी मंत्री संजय सिंह औचक निरीक्षण करने पहुंचे। मंत्री के अचानक अस्पताल परिसर में दाखिल होते ही स्वास्थ्य कर्मियों और अधिकारियों में हड़कंप मच गया और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। प्रभारी मंत्री ने इमरजेंसी वार्ड, महिला एवं पुरुष वार्ड, कंट्रोल रूम, स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (SNCU), मदर वेटिंग रूम, पैथोलॉजी लैब, डॉक्टर ड्यूटी रूम और ब्लड बैंक सहित पूरे अस्पताल परिसर का बारीकी से मुआयना किया। इस दौरान मिली घोर लापरवाहियों पर मंत्री ने सिविल सर्जन (CS) डॉ. अशोक कुमार सिंह समेत मौजूद स्वास्थ्य अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई।
निरीक्षण के दौरान सबसे चौंकाने वाली स्थिति नवजात शिशुओं के गहन चिकित्सा कक्ष (SNCU) में देखने को मिली, जहां ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर नदारद मिले। इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए मंत्री ने कहा कि नवजातों की निगरानी के लिए अत्याधुनिक उपकरण तो लगे हैं, लेकिन उन्हें संभालने के लिए डॉक्टर ही मौजूद नहीं हैं। ऐसी स्थिति में मासूम बच्चों की जान और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ड्यूटी पर मौजूद महिला स्वास्थ्यकर्मी से जब डॉक्टरों की तैनाती और समय के बारे में पूछा गया, तो वह कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सकीं। इतना ही नहीं, ड्यूटी रजिस्टर में भी संबंधित डॉक्टरों के हस्ताक्षर नहीं पाए गए। मंत्री ने अनुपस्थित कर्मियों की सूची तलब करते हुए सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।
इमरजेंसी वार्ड में साफ-सफाई की स्थिति देखकर मंत्री बिफर पड़े। स्ट्रेचर और बेड पर बिछाई गई चादरें काफी समय से नहीं बदली गई थीं, जिन पर खून के सूखे धब्बे और गंदगी पसरी हुई थी। मदर वेटिंग रूम की स्थिति भी पूरी तरह जर्जर और अव्यवस्थित पाई गई। मंत्री ने मरीजों और उनके परिजनों से मिलकर स्वास्थ्य सेवाओं व दवाओं की उपलब्धता के बारे में सीधी जानकारी ली। उन्होंने सिविल सर्जन को अस्पताल की साफ-सफाई और बुनियादी व्यवस्था को 24 घंटे के भीतर चुस्त-दुरुस्त करने का कड़ा अल्टीमेटम दिया।
जिले में अवैध रूप से कुकुरमुत्ते की तरह खुल रहे निजी नर्सिंग होम की शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए प्रभारी मंत्री ने जिला पदाधिकारी (डीएम) को विशेष निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि अगले एक महीने के भीतर जिलेभर के सभी निजी नर्सिंग होम और क्लीनिकों की सघन जांच कराई जाए। क्लीनिकों के निबंधन (रजिस्ट्रेशन), डॉक्टरों की मूल डिग्री और अग्निशमन व बायो-मेडिकल वेस्ट जैसे मानकों में अनियमितता पाए जाने पर तत्काल प्रभाव से संस्थानों को सील कर कानूनी कार्रवाई की जाए।
पोस्टमार्टम हाउस में बदहाली और शवों के पड़े रहने की शिकायतों पर भी मंत्री ने संज्ञान लिया और जांचोपरांत कार्रवाई की बात कही। मंत्री ने भरोसा दिलाया कि स्वास्थ्य व्यवस्था में कोताही बरतने वाले किसी भी लापरवाह कर्मी या डॉक्टर को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने दावा किया कि दिए गए निर्देशों के बाद अगले एक सप्ताह के भीतर जमुई सदर अस्पताल की कार्यप्रणाली और व्यवस्था में आम जनता को बड़ा और सकारात्मक बदलाव दिखाई देगा।
जमुई से हेमंत की रिपोर्ट











