77 साल में सरकारें तो बदलीं लेकिन नहीं बदली किसानों की सूरत: माले
गोपालगंज क़े भोरे में आजादी के 77 सालों के बाद भी सरकारें और उनके वादे तो बदलते रहे, लेकिन भोरे प्रखंड के किसानों की तकदीर और तस्वीर नहीं बदल सकी।

गोपालगंज क़े भोरे में आजादी के 77 सालों के बाद भी सरकारें और उनके वादे तो बदलते रहे, लेकिन भोरे प्रखंड के किसानों की तकदीर और तस्वीर नहीं बदल सकी। आज भी क्षेत्र में खेती पूरी तरह भगवान भरोसे ही टिकी हुई है। इस गंभीर संकट, प्रशासनिक उपेक्षा और किसानों के उत्पीडन के खिलाफ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा 'किसान महासंगोष्ठी' कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें दर्जनों पंचायतों के किसान लामबंद हुए।
भोरे प्रखंड की 17 पंचायतों में नहरों की पुख्ता व्यवस्था न होने से किसान सिंचाई के संकट से जूझ रहे हैं। नाम के लिए लगाए गए सरकारी ट्यूबवेल बरसों से बेकार पड़े हैं। एक तरफ खेती पूरी तरह घाटे का सौदा साबित हो रही है, तो दूसरी तरफ खाद और बीजों की कालाबाजारी से किसान त्रस्त हैं। किसानों का आरोप है कि जब वे अपनी जायज मांगों को लेकर आवाज उठाते हैं, तो सरकार और प्रशासन उनकी बात सुनने के बजाय दरवाजे पर पुलिस और चौकीदार भेजकर उन्हें डराने की कोशिश करता है। खेती के साथ-साथ पशुपालन पर निर्भर रहने वाले किसानों को पशु स्वास्थ्य सेवाओं का भी कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। प्रखंड में सरकारी पशु चिकित्सा प्रणाली पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है। सही समय पर सही उपचार और दवा न मिलने के कारण हर साल दर्जनों पशु अकाल मौत के मुंह में समा जाते हैं, जबकि जिम्मेदार सिस्टम इस तबाही पर पूरी तरह खामोश बना हुआ है।
भोरे पंचायत सरकार भवन में आयोजित इस गोष्ठी में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और किसान नेताओं ने सरकार को जमकर आड़े हाथों लिया।डोमनपुर पंचायत के मुखिया कमलेश प्रसाद कुशवाहा ने कहा,अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है और बदहाली की हद हो गई है। किसानों का शोषण अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बनकटा जागीरदारी पैक्स अध्यक्ष राघव प्रसाद ने सरकार को चेताते हुए कहा सरकार लाठी और गोली के दम पर किसानों की आवाज नहीं दबा सकती। सरकार को तुरंत पशुओं का इंश्योरेंस सुनिश्चित करना चाहिए और किसानों को उनकी फसलों का सही दाम देना चाहिए कार्यक्रम के दौरान माले नेता सुभाष पटेल, भोरे के मुखिया पति अर्जुन सिंह और जिला परिषद सदस्य धर्मेंद्र चौहान सहित सैकड़ों की संख्या में किसान एकजुट हुए। गोष्ठी में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर सरकार को चेताया गया कि यदि जल्द ही सिंचाई, खाद की कालाबाजारी रोकने और पशु चिकित्सा व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो किसान बड़े पैमाने पर उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
गोपालगंज से कुमार प्रदीप की रिपोर्ट





















