भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला अब सिर्फ एक पुलिस केस नहीं रह गया है। यह मामला अब बिहार की राजनीति में भी बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। NDA के ही घटक दल आमने सामने आ गए। एक तरफ केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान पीड़ित परिवार के घर पहुंचकर न्याय की बात कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी पुलिस कार्रवाई को पूरी तरह सही बता रहे हैं। दोनों नेताओं के अलग-अलग बयान अब नई राजनीतिक बहस को जन्म दे रहे हैं।
दरअसल शुक्रवार को चिराग पासवान आरा के बिलौटी गांव पहुंचे, जहां पुलिस एनकाउंटर में मारे गए भरत भूषण तिवारी के परिजनों से मुलाकात की। घर पहुंचते ही उन्होंने भरत के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान परिवार का दर्द देखकर माहौल बेहद भावुक हो गया। भरत के माता-पिता रो पड़े, जिसके बाद चिराग ने उन्हें गले लगाकर ढांढस बंधाया और भरोसा दिलाया कि न्याय की इस लड़ाई में वह परिवार के साथ मजबूती से खड़े रहेंगे। मुलाकात के बाद चिराग पासवान ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भरत भूषण तिवारी की हत्या बेहद दुखद और निंदनीय है। जिस पुलिस अधिकारी पर इस मामले में आरोप हैं, उसे दोबारा पोस्टिंग देना गलत संदेश देता है। इससे लोगों का कानून और व्यवस्था पर भरोसा कमजोर होगा। उन्होंने कहा कि वह इस पूरे मामले को मुख्यमंत्री के सामने भी उठाएंगे। चिराग ने साफ कहा कि लोकतांत्रिक समाज में ऐसी घटनाओं की कोई जगह नहीं है। उनका कहना था कि कुछ पुलिसकर्मियों ने रक्षक की जगह भक्षक का काम किया है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
वहीं दूसरी तरफ जीतन राम मांझी ने अलग बातें कही। राजधानी में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने बिल्कुल अलग रुख अपनाया। मांझी ने कहा कि इस मामले में पुलिस ने कानून के अनुसार कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि अगर किसी व्यक्ति के पास गैर-लाइसेंसी हथियार हो और वह पुलिस पर हथियार तान दे, तो पुलिस के पास कार्रवाई करने के अलावा दूसरा विकल्प नहीं बचता। उन्होंने यह भी कहा कि यदि पुलिस जवाबी कार्रवाई नहीं करती, तो पुलिसकर्मियों की जान खतरे में पड़ सकती थी। जब उनसे चिराग पासवान के बयान पर सवाल पूछा गया तो मांझी ने साफ कहा कि चिराग क्या कहते हैं, इससे उन्हें कोई मतलब नहीं है। उन्होंने यहां तक कह दिया कि चिराग भरत तिवारी के घर गए हैं, लेकिन वह कभी वहां नहीं जाएंगे। एसडीपीओ की दोबारा पोस्टिंग को लेकर उठ रहे सवालों पर भी मांझी ने सरकार का बचाव किया। उन्होंने कहा कि केवल एफआईआर दर्ज हो जाने से कोई व्यक्ति दोषी नहीं हो जाता। जांच पूरी होने के बाद अगर अधिकारी दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई जरूर होगी।
ऐसे में यह बडा प्रश्न बन गया है कि भरत तिवारी मामले में आखिर सच किसके साथ है? क्या चिराग पासवान की मांग के अनुसार दोषी पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई होगी, या फिर सरकार मांझी के रुख पर कायम रहेगी? आने वाले दिनों में इस मामले पर सरकार का अगला कदम पूरे बिहार की नजरों में रहेगा।
पटना से आभा की रिपोर्ट