अनिल यादव पर हमला बना बहाना, क्या एक मंच पर आएगा बिहार का विपक्ष? अस्पताल से निकल रही नई सियासी तस्वीर

पटना में जन सुराज से जुड़े पूर्व वार्ड पार्षद अनिल यादव पर हुए जानलेवा हमले ने सिर्फ कानून-व्यवस्था पर सवाल नहीं खड़े किए हैं, बल्कि बिहार की विपक्षी राजनीति में एक नई तस्वीर भी सामने ला दी है।

पटना में जन सुराज से जुड़े पूर्व वार्ड पार्षद अनिल यादव पर हुए जानलेवा हमले ने सिर्फ कानून-व्यवस्था पर सवाल नहीं खड़े किए हैं, बल्कि बिहार की विपक्षी राजनीति में एक नई तस्वीर भी सामने ला दी है। बुधवार शाम बुद्धा कॉलोनी इलाके में अनिल यादव पर कई राउंड फायरिंग हुई। पुलिस के मुताबिक उन्हें चार-पांच गोलियां लगीं और घटना की जांच के लिए सीसीटीवी तथा एफएसएल की मदद ली जा रही है। 

घटना की खबर मिलते ही बांकीपुर के विधायक और जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर अस्पताल पहुंच गए। उन्होंने अनिल यादव और उनके परिजनों से मुलाकात की और कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार पर सवाल खड़े किए। लेकिन कहानी यहीं नहीं रुकी। इसके बाद पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव भी मेडांटा अस्पताल पहुंचे और अनिल यादव के परिजनों से मुलाकात की। 

उन्होंने इस बात पर सवाल उठाया कि जिस इलाके में यह हमला हुआ, वह मुख्यमंत्री आवास से महज करीब डेढ़-दो किलोमीटर की दूरी पर है, ऐसे में आम आदमी की सुरक्षा को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। और फिर देर रात तेजस्वी यादव भी अस्पताल पहुंचे। नेता प्रतिपक्ष ने घटना को गंभीर बताते हुए कहा कि अगर राजधानी पटना में ही जनप्रतिनिधि सुरक्षित नहीं हैं तो बिहार में आम आदमी की सुरक्षा को लेकर क्या स्थिति होगी। 

यानी तस्वीर दिलचस्प है—एक तरफ जन सुराज के प्रशांत किशोर, दूसरी तरफ निर्दलीय सांसद पप्पू यादव और तीसरी तरफ राजद के तेजस्वी यादव। तीनों की राजनीति अलग है, संगठन अलग हैं और राजनीतिक आधार भी अलग-अलग हैं, लेकिन कानून-व्यवस्था के सवाल पर तीनों की आवाज एक दिशा में जाती दिखाई दे रही है।इससे पहले जमुई की घटना को लेकर भी तेजस्वी यादव और प्रशांत किशोर सरकार पर कानून-व्यवस्था के सवाल उठा चुके हैं। 

यहीं से बड़ा सवाल पैदा होता है—क्या बिहार में कानून-व्यवस्था विपक्षी एकता का नया मुद्दा बनने जा रही है?अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि प्रशांत किशोर, पप्पू यादव और तेजस्वी यादव किसी साझा राजनीतिक मंच पर आने वाले हैं। इनके बीच राजनीतिक मतभेद और अलग-अलग राजनीतिक रणनीतियां मौजूद हैं। लेकिन घटनाओं की श्रृंखला यह जरूर दिखा रही है कि अपराध और कानून-व्यवस्था का मुद्दा विपक्षी दलों और नेताओं को एक साझा मुद्दे पर संवाद की जमीन दे रहा है।

अगर आने वाले दिनों में पटना की इस घटना के साथ जमुई और राज्य के दूसरे अपराध के मामलों को जोड़कर विपक्ष सड़क पर उतरता है, तो बिहार की राजनीति में कानून-व्यवस्था एक बड़ा आंदोलनकारी मुद्दा बन सकती है। अस्पताल में अनिल यादव का हाल पूछने पहुंचे तीन चेहरे फिलहाल तीन अलग-अलग राजनीतिक धाराओं के प्रतिनिधि हैं। लेकिन अगर यही तीन धाराएं सड़क पर एक साथ दिखाई देने लगीं, तो बिहार की सियासत में एक नई राजनीतिक तस्वीर जरूर बन सकती है।

अनूप नारायण सिंह