रेलवे के छोटे स्टेशन भी होंगे हाईटेक, अब 15 किमी दूर चल रही ट्रेन से होगी सीधी बातचीत

पूर्व मध्य रेलवे अब बड़े स्टेशनों के साथ-साथ छोटे रेलवे स्टेशनों को भी डिजिटल और हाईटेक बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है।

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Amit Kumar
Updated at : Jul 09, 2026, 11:40:00 AM

पूर्व मध्य रेलवे अब बड़े स्टेशनों के साथ-साथ छोटे रेलवे स्टेशनों को भी डिजिटल और हाईटेक बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। रेल परिचालन को अधिक सुरक्षित, तेज और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के लिए पूरे मंडल के छोटे-बड़े स्टेशनों पर अत्याधुनिक न्यू वीएचएफ (VHF) सेट सिस्टम लगाया जा रहा है। इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद स्टेशन पर तैनात स्टेशन अधीक्षक (एसएस) या स्टेशन मास्टर (एसएम) करीब 15 किलोमीटर के दायरे में चल रही ट्रेन के लोको पायलट और ट्रेन मैनेजर से सीधे संपर्क कर सकेंगे।

सहरसा-मानसी रेलखंड के सहरसा, सोनबरसा कचहरी, सिमरी बख्तियारपुर, कोपरिया, धमारा घाट, बदला घाट और मानसी स्टेशन पर यह आधुनिक संचार प्रणाली काम करना शुरू कर चुकी है। इसके अलावा सहरसा-बैजनाथपुर, मिठाई, मधेपुरा, मुरलीगंज, जानकीनगर, बनमनखी, कृत्यानंद नगर, सरसी, पूर्णिया कोर्ट तथा सहरसा-सुपौल-सरायगढ़-ललितग्राम रेलखंड के सभी स्टेशनों पर भी यह सिस्टम चरणबद्ध तरीके से स्थापित किया जा रहा है।

रेल अधिकारियों के अनुसार, पहले स्टेशन से लोको पायलट या ट्रेन मैनेजर से संपर्क के लिए वॉकी-टॉकी का इस्तेमाल किया जाता था, जिसकी रेंज केवल दो से तीन किलोमीटर तक सीमित थी। कई बार नेटवर्क की समस्या के कारण बातचीत भी बाधित हो जाती थी, जिससे रेल परिचालन प्रभावित होने की आशंका बनी रहती थी। लेकिन नई वीएचएफ प्रणाली लागू होने के बाद यह दूरी बढ़कर करीब 15 किलोमीटर हो जाएगी और संचार पहले की तुलना में अधिक तेज, स्पष्ट और भरोसेमंद होगा।

इस सिस्टम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि हॉल्ट स्टेशन पर खड़ी ट्रेनों के लोको पायलट और ट्रेन मैनेजर से भी स्टेशन पर बैठे अधिकारी सीधे संपर्क कर सकेंगे। वहीं किसी भी आपातकालीन स्थिति में वीएचएफ सेट पर लगे लाल रंग के इमरजेंसी बटन को दबाते ही सायरन सक्रिय हो जाएगा, जिससे लोको पायलट और ट्रेन मैनेजर को तत्काल खतरे की सूचना मिल जाएगी और वे आवश्यक कार्रवाई कर सकेंगे।

रेल अधिकारियों का कहना है कि आधुनिक संचार प्रणाली से ट्रेनों के परिचालन में सुरक्षा और संरक्षा और अधिक मजबूत होगी। साथ ही हाई-स्पीड इंटरनेट आधारित इस तकनीक से ट्रेनों का संचालन अधिक सुगम, सुरक्षित और प्रभावी बनेगा, जिससे यात्रियों को भी बेहतर रेल सेवा का लाभ मिलेगा।

सहरसा से विकास कुमार की रिपोर्ट