पटना: पति-पत्नी की जोडी भी खूब होती है। हर सुख दुख में साथ रहते हैं। सफलता हो या फिर असफलता, सबमें एक दूसरे का हाथ थामें रहेंगे। राजधानी में एक ऐसी है दंपति है, जिसने एक अनोखा रिकॉर्ड कायम किया है। दरअसल यह बिहार के पहले दंपत्ति होने के साथ ही देश के संभवत: पहले ऐसे दंपति हैं, जिन्होंने बौद्धिक संपदा (Patent/design patent) को संयुक्त रूप से हासिल किया है। सबसे बडी बात यह कि इस दंपति ने एक या दो नहीं बल्कि पूरे 19 बौद्धिक संपदा (Patent/design patent) को हासिल करने में सफलता हासिल की है। इनमें 15 का प्रमाण पत्र भी इन्हें प्राप्त हो चुकी है जबकि चार की चयन प्रक्रिया और प्रमाण पत्र जारी होने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
वरुण और मिनाक्षी हैं अनोखे दंपत्ति
दरअसल राजधानी के सिटी इलाके के पश्चिम दरवाजा के निवासी वरुण कुमार शाही और उनकी पत्नी मिनाक्षी ऐसी विलक्षण प्रतिभा के धनी हैं, जिन्होंने सफलता की नयी इबारत को रच दिया है। वरुण आइआइटी पटना बेस्ड इनोवेटर और आंत्रप्रिन्योर हैं, जबकि उनकी पत्नी मिनाक्षी को हर वक्त कुछ नया करने का जुनून रहता है। इन दोनों ने अपनी सोच और कुछ नया करने को जुनून को इस कदर अपनाया कि आज की तारीख में यह राज्य के साथ देश के सबसे चर्चित दंपति में शामिल हो गये हैं। इनकी दिन की शुरुआत ही कुछ नया करने की सोच के साथ होती है।
आपदा में मिला अवसर
एक साथ इतने बौद्धिक संपदा (Patent/design patent) हो कैसे हासिल किया? यह सवाल पूछने पर वरुण बहुत दिलचस्प जवाब देते हैं, वह कहते हैं, मेरी मेहनत का सफर तब शुरू हुआ जब देश में हर तरफ कोविड का कहर था और लॉक डाउन लगा हुआ था। वो हर वक्त कोविड की खबर को पढते थे। इसी दौरान पीएम नरेंद्र मोदी का एक वाक्य उनके कान में पडा, जब उन्होंने आपदा को अवसर बनाने की बात कही थी। वरुण बताते हैं, कोविड वायरस के कारण फैलता चला जाता था। फिर मैंने सोचा कि क्यों न एक ऐसे डिवाइस को तैयार किया जाए, तो इस वायरस के चेन को तोडने में सहायक हो। वह कहते हैं, इसी सोच के साथ मैंने अपने कार्य को शुरू किया। शुरू में असफलता हाथ लगी। फिर उसमें लगातार सुधार की प्रक्रिया को भी जारी रखा। अंतत: वह दिन भी आया, जब मुझे सफलता मिली।
एम्स और आइसीएमआर ने लगायी मुहर
वरुण कहते हैं, जब कोविड वायरस के चेन को तोडने वाला डिवाइस मैंने तैयार किया तब कुछ प्रक्रिया पूरी करनी पडी। तब उसके डेमो का वक्त आया। डेमो के लिए एम्स पटना और आइसीएमआर, पटना का जगह तय हुआ। डेमो में मेरा डिवाइस सफल रहा। मेरे डिवाइस की मदद से वायरस के चेन को पूरी तरह से तोडने में सफलता मिली। इन जगहों के एक्सपर्ट भी काफी प्रभावित हुए। इसके बाद ही मेरी पहली सफलता हासिल हुई। वह कहते हैं, जब सफलता मिली जो आत्मविश्वास और बढ गया और फिर सफलता की इबारत लिखने का सिलसिला शुरू हुआ। ज्ञात हो कि वरुण ने आइआइटी पटना से एमबीए की डिग्री हो हासिल किया है, जबकि मिनाक्षी ने झारखंड के हजारीबाग स्थित विनोबा भावे यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन को पूरा किया है।
पत्नी का भी मिला पूरा साथ
वरुण कहते हैं, जब मैं अपने रिसर्च और खोज में लगातार लगा रहता था तब उनकी पत्नी भी साथ देती थी। फिर उनका भी इंटरेस्ट रिसर्च में बढने लगा। इसके बाद मैंने फैसला किया कि रिसर्च करने के इस सफर में पत्नी का भी साथ लिया जाए। उनके पास भी नये नये आइडिया होते थे। जिस पर रिसर्च करने की वह सलाह देती थी। उन टॉपिक पर हम दोनों एक साथ बैठ कर रिसर्च करते थे। हमारी सोच यही होती थी कि जिस रिसर्च के बारे में हम कार्य करने की सोच रहे हैं, कहीं ऐसा तो नहीं है कि उस कार्य को हम लोगों से पहले किसी और ने किया हो। इसके लिए साथ बैठकर इंटरनेट को खंगालते थे। जब यह इत्मीनान हो जाता था कि हमारा यह रिसर्च का सब्जेक्ट अब तक अछूता है, तब हमारी प्लानिंग बनती थी और हम अपने कार्य में लग जाते थे।
अब तक इतने रिसर्च, सिलसिला जारी है
वरुण बताते हैं, अब तक उन्होंने जिस बौद्धिक संपदा (Patent/design patent) को हासिल किया है, उनमें लो पावर एयर कंडिशन आउट डोर यूनिट, लो पावर एयर कंडिशन इनडोर यूनिट, मेडिकल कैटेगरी में कॉन्टिपेशन रिलीफ डिवाइस, एयर कूलर कंपोनेंट, स्मार्ट वर्क स्टेशन, शिक्षा कैटेगरी में एरोगोनॉमिक बेंच डेस्क विद एंड विदाउट सेल्फ, FUMEHOOD, फ्रेम फॉर लेबोरेट्री वर्क स्टेशन, बॉडी ऑटोमेटेड डिसइंफेक्ट सिस्टम और सेनेटाइजेशन सिस्टम जैसे सब्जेक्ट शामिल हैं। वह बताते हैं, इन सबका प्रमाण पत्र उनको प्राप्त हो चुका है। जबकि इसके अलावा चार अलग अलग विषयों पर बौद्धिक संपदा (Patent/design patent) का प्रमाण पत्र जारी होने की प्रक्रिया अंतिम चरण में हैं। जिसकी सूचना उनको दी जा चुकी है। बहुत जल्द वह भी उनको प्राप्त हो जाएंगे।
अभी और तय करना है सफर
वरुण कहते हैं, इतने सारे बौद्धिक संपदा (Patent/design patent) मिलने के बाद उनका मनोबल बहुत ऊंचा है। वह लगातार बेहतर रिसर्च करने में लगे हुए हैं। इसमें उनकी पत्नी का भी पूरा सहयोग मिलता है। वह कहते हैं, मुझे ऐसे ऐसे सब्जेक्ट पर रिसर्च करना है, जो आम जनजीवन को और बेहतर बनाये। जिससे लोगों के जीवन शैली में सुधार हो, जिससे आम लोगों का सीधा सरोकार हो। कई ऐसे क्षेत्र हैं, जिनमें अभी कार्य हुआ ही नहीं है। उनकी और उनकी पत्नी की यही सोच है कि जो सब्जेक्ट अब तक अछूते हैं, उन क्षेत्र में ही रिसर्च कर के आगे बढना है।
सुजीत कुमार, पटना