मोतिहारी बंद चीनी मिल की जमीन बिक्री पर फैली अफवाह, एडीएम ने सब साफ कर दिया

मोतिहारी में बंद पड़ी हनुमान शुगर मिल की जमीन को लेकर इन दिनों तरह-तरह की चर्चाएं जोरों पर हैं। खासकर खाता संख्या 109 की जमीन के कथित तौर पर बेचे जाने की खबरों ने बाजार और आम लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है।

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Amit Kumar
Updated at : Jul 07, 2026, 2:16:00 PM

मोतिहारी में बंद पड़ी हनुमान शुगर मिल की जमीन को लेकर इन दिनों तरह-तरह की चर्चाएं जोरों पर हैं। खासकर खाता संख्या 109 की जमीन के कथित तौर पर बेचे जाने की खबरों ने बाजार और आम लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है। हालांकि, जिला प्रशासन ने इन खबरों को पूरी तरह से निराधार और भ्रामक बताया है। 

अपर समाहर्ता (एडीएम) मुकेश कुमार सिन्हा ने आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया है कि वर्ष 2023 के बाद से खाता संख्या 109 की एक इंच जमीन की भी खरीद-बिक्री नहीं हुई है। एडीएम मुकेश सिन्हा ने कहा कि कुछ तथाकथित मीडिया हाउस और पत्रकारों द्वारा बिना तथ्यों की पुष्टि किए खबरें प्रसारित की जा रही हैं, जिससे जनता में भ्रम फैल रहा है। 

उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग प्रशासनिक पदाधिकारियों पर अनावश्यक दबाव बनाने और गलत मंशा से इस तरह की बातें उठा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिला अवर निबंधक द्वारा दिए गए प्रतिवेदन में यह साफ किया जा चुका है कि 2023 के बाद से उक्त खाता संख्या की किसी भी जमीन की खरीद-बिक्री नहीं हुई है। 

उन्होंने आगे बताया कि हनुमान शुगर मिल से संबंधित खाता संख्या 109 की जमीन को माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के आलोक में रोक सूची (प्रोहिबिशन लिस्ट) से हटाया गया है। लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि जमीन की बिक्री शुरू हो गई है। रोक सूची से हटाना और जमीन की खरीद-बिक्री होना दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। इसके बावजूद कुछ लोग इन दोनों प्रक्रियाओं को मिलाकर भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। 

एडीएम ने परिमार्जन (म्यूटेशन) और दाखिल-खारिज की प्रक्रिया को भी स्पष्ट करते हुए कहा कि इसका आधार केवल रोक सूची से हटाया जाना नहीं हो सकता। परिमार्जन या दाखिल-खारिज के लिए राजस्व संबंधी वैध दस्तावेज जैसे जमाबंदी पंजी, खतियान आदि आवश्यक होते हैं। उन्होंने बताया कि एक राजस्व कर्मचारी द्वारा केवल रोक सूची के आधार पर परिमार्जन कर दिया गया था, जो नियमों के विरुद्ध था। इस गलती को गंभीरता से लेते हुए संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की गई है। 

जमाबंदी रद्दीकरण से जुड़े सवालों पर एडीएम ने कहा कि यह मामला वर्तमान में माननीय उच्च न्यायालय में लंबित (सब-ज्यूडिस) है, जहां एलपीए (लेटर्स पेटेंट अपील) के तहत सुनवाई चल रही है। ऐसे में बिना न्यायालय के अंतिम निर्णय और संबंधित दस्तावेजों की समीक्षा के कोई भी प्रशासनिक कार्रवाई करना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर पहले ही संबंधित लोगों को स्थिति स्पष्ट कर दी गई थी, इसके बावजूद गलत तथ्यों को प्रचारित किया जा रहा है।

एडीएम मुकेश सिन्हा ने जनता से अपील करते हुए कहा कि वे अफवाहों और अपुष्ट खबरों पर ध्यान न दें। उन्होंने आगाह किया कि गलत या अधूरे दस्तावेजों के आधार पर जमीन की खरीद-बिक्री करने से भविष्य में कानूनी और आर्थिक परेशानियां खड़ी हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की भ्रामक खबरें समाज में असमंजस और अविश्वास का माहौल बनाती हैं, जो किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं है। 

प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि जमीन से जुड़े किसी भी लेन-देन से पहले संबंधित विभाग से आधिकारिक जानकारी प्राप्त करना जरूरी है। साथ ही, लोगों को सलाह दी गई है कि वे केवल प्रमाणित और वैध स्रोतों पर ही भरोसा करें। प्रशासन का कहना है कि अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ भी आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। हालाकि अभी भी यह बात साफ़ नहीं हो पाया है की आख़िरकार खाता संख्या 109 के जमीं को कैसे रोक सूची से मुक्त किया गया है, आख़िर किसके गलती से सरकारी जमीन रोक सूची से मुक्त हुआ है ?

मोतिहारी से सोहराब आलम की रिपोर्ट