तिरहुत MLC चुनाव : क्या बिहार NDA में सबकुछ ठीक नहीं? चुनावी हार के बाद अपनों पर उठे सवाल, भीतरघात के आरोपों से गठबंधन की एकजुटता पर खड़े हुए सवाल
तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी चुनाव में एनडीए प्रत्याशी अभिषेक झा की हार के बाद बिहार की सियासत में नया विवाद खड़ा हो गया है। चुनाव परिणाम आने के बाद अब एनडीए के भीतर ही आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।

पटना : तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी चुनाव में एनडीए प्रत्याशी अभिषेक झा की हार के बाद बिहार की सियासत में नया विवाद खड़ा हो गया है। चुनाव परिणाम आने के बाद अब एनडीए के भीतर ही आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। जदयू सांसद देवेश चंद्र ठाकुर के बयान, बीजेपी विधायक बैद्यनाथ प्रसाद के पलटवार और अभिषेक झा के अभिमन्यु वाले बयान ने इस चुनावी हार को गठबंधन की अंदरूनी राजनीति का बड़ा मुद्दा बना दिया है। अब सवाल उठ रहा है कि क्या एनडीए के भीतर सबकुछ ठीक है या फिर चुनावी नतीजे ने गठबंधन के अंदर चल रही नाराजगी को बाहर ला दिया है?
तिरहुत स्नातक सीट पर NDA की ओर से अभिषेक झा चुनाव मैदान में थे, लेकिन उन्हें बंशीधर ब्रजवासी के हाथों हार का सामना करना पड़ा
दरअसल, तिरहुत स्नातक सीट पर एनडीए की ओर से अभिषेक झा चुनाव मैदान में थे, लेकिन उन्हें बंशीधर ब्रजवासी के हाथों हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद जेडीयू सांसद देवेश चंद्र ठाकुर ने गठबंधन के कुछ नेताओं की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों का हृदय साफ नहीं था और व्यक्तिगत नाराजगी का निशाना अभिषेक झा को बनाया गया। देवेश ठाकुर के मुताबिक, कुछ ऐसे लोग भी चुनाव के दौरान विरोधी भूमिका में रहे, जिन्होंने पहले उनसे काफी मदद ली थी। देवेश ठाकुर के इस बयान को एनडीए के भीतर कथित भीतरघात के आरोप के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, उन्होंने किसी नेता का नाम लेकर सीधा आरोप नहीं लगाया, लेकिन उनके बयान ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को तेज कर दिया।
रीगा से BJP MLA बैद्यनाथ प्रसाद ने देवेश ठाकुर के आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया दी
दूसरी तरफ, रीगा से बीजेपी विधायक बैद्यनाथ प्रसाद ने देवेश ठाकुर के आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इतने वरिष्ठ नेता को इस तरह की बयानबाजी नहीं करनी चाहिए। बीजेपी विधायक ने दावा किया कि एनडीए के सभी घटक दलों ने एकजुट होकर चुनाव में काम किया। उन्होंने अभिषेक झा के वोटों का आंकड़ा सामने रखते हुए कहा कि पिछले चुनाव में उन्हें करीब 10 हजार वोट मिले थे, जबकि इस बार लगभग 20 हजार वोट प्राप्त हुए। ऐसे में गठबंधन के भीतर भीतरघात का आरोप लगाना उचित नहीं है।
इस पूरे विवाद को अभिषेक झा की सोशल मीडिया पोस्ट ने और दिलचस्प बना दिया
इस पूरे विवाद को अभिषेक झा की सोशल मीडिया पोस्ट ने और दिलचस्प बना दिया। अपनी हार के बाद उन्होंने मतदाताओं और समर्थकों का आभार जताते हुए महाभारत के अभिमन्यु का जिक्र किया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या वह अपने ही राजनीतिक परिवार यानी एनडीए के भीतर रचे गए चक्रव्यूह में अभिमन्यु की तरह अकेले पड़ गए थे? उन्होंने यह भी दावा किया कि करीब 4700 मतपत्र उनके नाम के सामने टिक का निशान होने के कारण अमान्य कर दिए गए। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
क्या हैं इस बयानबाजी के सियासी मायने?
इस पूरे घटनाक्रम का पहला मायना यह है कि एनडीए के भीतर चुनावी हार की जिम्मेदारी को लेकर एकमत नहीं है। दूसरा, देवेश ठाकुर का बयान बताता है कि गठबंधन के कुछ नेताओं के बीच व्यक्तिगत और राजनीतिक नाराजगी हो सकती है। तीसरा, अभिषेक झा का अभिमन्यु वाला बयान भविष्य की राजनीति के लिए एक संकेत माना जा रहा है। उन्होंने भले ही किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन अपने राजनीतिक परिवार के भीतर असहयोग का सवाल उठाकर गठबंधन के सामने असहज स्थिति पैदा कर दी है। चौथा और सबसे महत्वपूर्ण मायना यह है कि बिहार एनडीए में सहयोगी दलों के बीच आपसी तालमेल की असली परीक्षा अब ऐसे ही चुनावों में होगी। अगर चुनावी हार के बाद सार्वजनिक मंचों पर इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप जारी रहते हैं, तो इसका असर गठबंधन की राजनीतिक छवि पर पड़ सकता है।
BJP MLA ने भीतरघात के आरोपों को खारिज किया है और किसी भी नेता के बयान से चुनाव में साजिश साबित नहीं होती
फिलहाल, बीजेपी विधायक ने भीतरघात के आरोपों को खारिज किया है और किसी भी नेता के बयान से चुनाव में साजिश साबित नहीं होती। लेकिन इतना तय है कि तिरहुत की हार ने एनडीए के भीतर की राजनीतिक असहजता को सार्वजनिक कर दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल है कि क्या मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाला बिहार एनडीए इस विवाद को शांत करा पाएगा या तिरहुत चुनाव की यह हार आने वाले दिनों में गठबंधन के भीतर नए सियासी समीकरणों को जन्म देगी?
पटना से अनूप नारायण सिंह की रिपोर्ट











