राहुल गांधी और अखिलेश यादव को बुलाया बिहार, तेजस्वी यादव कुछ बड़ा करने जा रहे?
बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव को बिहार आने का न्योता दिया। सवाल है कि तेजस्वी दोनों नेताओं को बिहार क्यों बुलाना चाहते हैं।

बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने छात्रों पर हुई फायरिंग समेत अन्य मामले को लेकर एक बार फिर सम्राट सरकार पर जमकर हमला। उन्होंने कहा-सीवान में परीक्षा धांधली और पेपर लीक के विरोध में आंदोलन कर रहे छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई और AK-47 से गोलियां चलाए जाने की घटना पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। डीजीपी के बाद तेजस्वी यादव ने आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राज्यपाल से भी मुलाकात कर अपनी बात रखने की बात कही। इसके साथ ही उन्होंने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव को बिहार आने का न्योता दिया। सवाल है कि तेजस्वी दोनों नेताओं को बिहार क्यों बुलाना चाहते हैं।
तेजस्वी यादव ने कहा कि विपक्ष के शीर्ष नेताओं, जिनमें राहुल गांधी और अखिलेश यादव शामिल हैं, से अनुरोध किया गया है कि वे बिहार की धरती पर आएं और पुलिस कार्रवाई में घायल हुए छात्रों से मुलाकात करें। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल इस मामले को लेकर पूरी एकजुटता के साथ लड़ाई लड़ रहे हैं।
माना जा रहा है कि अगर राहुल गांधी और अखिलेश यादव बिहार पहुंचते हैं तो छात्र आंदोलन का मुद्दा विपक्षी दलों के साझा अभियान का हिस्सा बन सकता है। इससे राज्य सरकार पर राजनीतिक और नैतिक दबाव बढ़ाने की कोशिश होगी। अब तेजस्वी यादव की कोशिश है कि राहुल गांधी और अखिलेश यादव की मौजूदगी से यह मामला और बड़ा राजनीतिक मुद्दा बने। दोनों का बिहार पहुंचना इस मुद्दे को राष्ट्रीय विपक्ष के साझा अभियान का रूप दे सकता है।
तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि छात्रों पर कोई हवाई फायरिंग नहीं हुई, बल्कि निर्दोष छात्रों की छाती को निशाना बनाकर गोलियां चलाने का प्रयास किया गया। उन्होंने बताया कि इस विषय को लेकर उन्होंने डीजीपी से स्पष्ट तौर पर मुलाकात की है और आने वाले दिनों में वे इस मुद्दे पर राज्यपाल से भी मुलाकात कर अपनी बात रखेंगे।
साथ ही तेजस्वी यादव ने सवाल उठाया कि छात्रों पर AK-47 चलाने का आदेश किसके निर्देश पर दिया गया था, यह अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि महज एक सिपाही को निलंबित करके मामले की इतिश्री नहीं की जा सकती और न ही किसी छोटे कर्मचारी को बलि का बकरा बनाया जाना चाहिए।











