नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, राजद सुप्रीमो लालू यादव और राबड़ी देवी दिल्ली में हैं। 27 मई को तेजस्वी यादव के बेटे का बर्थडे है। कार्यक्रम में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत विपक्ष के कई बड़े नेताओं को आमंत्रित किया गया है। इस बीच राष्ट्रीय जनता दल के भीतर अंदरूनी घमासान की चर्चा है। आरजेडी के भीतर बढ़ती खींचतान और संगठनात्मक अनुशासन को लेकर सियासी गलियारे में बवाल मच गया है। बताया जा रहा है कि पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मंगनीलाल मंडल कथित तौर पर नेताओं की कार्यशैली से नाराज बताए जा रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष मंगनीलाल मंडल अपनी ही पार्टी के दिग्गज नेताओं की मनमानी और बात नहीं मानने के रवैये से बेहद नाराज हैं। प्रदेश अध्यक्ष आरजेडी के कुछ वरिष्ठ नेताओं की कार्यशैली से बेहद नाराज चल रहे हैं। बताया जा रह है कि पार्टी में बिना प्रदेश अध्यक्ष की लिखित अनुमति और जानकारी के बड़े राजनीतिक कार्यक्रम और प्रदर्शन तय किए जा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि हाल ही में देशभर में चर्चा में रहे NEET पेपर लीक मामले को लेकर पटना में आरजेडी की ओर से विरोध प्रदर्शन किया गया था। लेकिन पार्टी कार्यालय में मौजूद होने के बावजूद प्रदेश अध्यक्ष मंगनीलाल मंडल को इस कार्यक्रम की भनक तक नहीं लग सकी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस पूरे विवाद की शुरुआत कुछ दिनों पहले पार्टी कार्यालय में आयोजित एक अहम सांगठनिक बैठक के दौरान हुई। जो नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के कार्यक्रमों और दौरों के लिए नया प्रोटोकॉल तय करने के उद्देश्य से बुलाई गई थी।
लेकिन प्रोटोकॉल बनाने और पार्टी की कमान को लेकर बैठक में ही आरजेडी के कई शीर्ष और वरिष्ठ नेताओं के बीच आपसी मतभेद खुलकर सामने आ गए और उनके बीच जमकर तीखी नोकझोंक हुई। कहा जा रहा है कि बैठक के दौरान कुछ नेताओं ने संगठनात्मक व्यवस्था और नेतृत्व को लेकर खुलकर असहमति जताई, जिससे माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया।
बैठक में हुई इस तनातनी से प्रदेश अध्यक्ष मंगनीलाल मंडल खुद को असहज और अपमानित महसूस कर रहे थे। पार्टी के भीतर गुटबाजी की चर्चा भी तेज हो गई। इसके बाद प्रदेश अध्यक्ष ने मामले को गंभीर मानते हुए आंतरिक जांच का फैसला लिया। मामले की आंतरिक जांच कराने के लिए पार्टी के 5 सबसे कद्दावर और बड़े नेताओं को शामिल कर एक विशेष उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया था। इस कमेटी में आरजेडी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष उदय नारायण चौधरी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बीनू यादव, प्रदेश उपाध्यक्ष तनवीर हसन और रणविजय साहू जैसे बड़े नेता शामिल थे।
प्रदेश अध्यक्ष ने इस कमेटी को निर्देश दिया था कि तय समय सीमा के भीतर पूरी जांच कर रिपोर्ट सौंपी जाए, ताकि दोषी नेताओं पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सके। हालांकि , इसको लेकर जब रणविजय साहू से बात की गई तो उन्होंने कहा कि उन्हें इसको लेकर किसी तरह की कोई जानकारी नहीं है, यहाँ तक की कमिटी बनने की जानकारी नहीं हैं।
कमेटी के इस उपेक्षापूर्ण रवैये पर प्रदेश अध्यक्ष मंगनीलाल मंडल ने अपनी गहरी आपत्ति जताई है। उन्होंने एक बार फिर कड़ा रुख अपनाते हुए कमेटी के सभी सदस्यों को एक नया रिमाइंडर पत्र जारी किया है। कमेटी के इस सुस्त और उपेक्षापूर्ण रवैये पर प्रदेश अध्यक्ष मंगनीलाल मंडल ने अपनी गहरी आपत्ति जताई है। उन्होंने कमेटी के सदस्यों को दोबारा पत्र लिखकर जल्द से जल्द रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। नए निर्देश में साफ कहा गया है कि हर हाल में 7 जून 2026 तक जांच रिपोर्ट जमा करनी होगी। ताकि अनुशासन तोड़ने वाले नेताओं पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सके।
मिली जानकारी के अनुसार प्रदेश अध्यक्ष ने अब दोबारा पत्र जारी कर कमिटी से जांच रिपोर्ट सौंपने को कहा है। ऐसे में पार्टी के भीतर इस घटनाक्रम को संगठनात्मक अनुशासन और नेतृत्व के बीच तालमेल की कमी के रूप में देखा जा रहा है। यही वजह है कि पार्टी के भीतर नेतृत्व और संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर सवाल उठने लगे हैं। अब देखना होगा कि आरजेडी के भीतर की यह लड़ाई कहां जाकर ख़त्म होती है।