किसने तय किया सम्राट चौधरी CM होंगे, नीतीश कैसे हटे, निशांत की एंट्री पर भी विजय चौधरी का बड़ा खुलासा

नीतीश कुमार और सम्राट चौधरी को बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने बड़ा खुलासा किया है साथ ही निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री पर भी जवाब दिया है।

किसने तय किया सम्राट चौधरी CM होंगे, नीतीश कैसे हटे, निशांत की एंट्री पर भी विजय चौधरी का बड़ा खुलासा
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By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Amit Kumar
: May 10, 2026, 2:36:00 PM

बिहार में 20 साल सीएम की कुर्सी संभालने के बाद नीतीश कुमार इस्तीफा दे चुके हैं और सम्राट चौधरी नए मुख्यमंत्री बने हैं। लेकिन आम जनता से लेकर सियासी गलियारे तक सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर नीतीश कुमार कैसे इस फैसले के लिए तैयार हुए ? इसको लेकर बिहार के उपमुख्यमंत्री और जदयू के वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी ने बड़ा खुलासा किया है साथ ही निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री पर भी जवाब दिया है।  

दरअसल मुंबई के साईं मंदिर में परिवार के साथ पूजा-अर्चना करने पहुंचे डिप्टी सीएम विजय चौधरी ने मीडिया से बातचीत में बड़ा खुलासा किया है। विजय कुमार चौधरी ने कहा कि बिहार में बीजेपी का मुख्यमंत्री बनाने को लेकर लंबे समय से अंदरखाने चर्चा चल रही थी। यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था। इसके पीछे महीनों की रणनीति और राजनीतिक मंथन था। विजय चौधरी का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया को पूरा करने में करीब छह महीने का समय लगा। 

विजय चौधरी ने कहा कि बीजेपी हमेशा से नीतीश कुमार के नेतृत्व का समर्थन करती रही। ऐसे में नीतीश कुमार ने यह महसूस किया कि अब अगली पीढ़ी को मौका दिया जाना चाहिए। लेकिन वह मौका उसी सहयोगी दल को मिले, जो दो दशकों से उनके साथ खड़ा रहा। इसी सोच के तहत उन्होंने मुख्यमंत्री पद छोड़ने का फैसला किया और बीजेपी नेता सम्राट चौधरी को बिहार की कमान सौंप दी गई। इसको लेकर उन्होंने खुद नाम भी तय किया था। BJP पार्टी के किसी ऐसे युवा को मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए जो बीस सालों से उनके साथ है। इसलिए, उन्होंने अपने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और BJP के सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बने हैं।

वहीं विजय कुमार चौधरी ने पहली बार खुलकर बताया कि नीतीश कुमार अपने बेटे निशांत कुमार को राजनीति में लाने के पक्ष में नहीं थे। उन्होंने कहा कि जब पार्टी नेताओं ने निशांत को राजनीति में लाने की बात की, तब नीतीश कुमार लगातार इसका विरोध करते रहे। उनका मानना था कि उन्होंने हमेशा परिवारवाद की राजनीति का विरोध किया है, ऐसे में अपने बेटे को राजनीति में लाना उनके सिद्धांतों के खिलाफ होगा। लेकिन पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने लगातार नीतीश कुमार को समझाया। 

विजय चौधरी के मुताबिक, उन्हें तर्क दिया गया कि राजनीति में आने का फैसला अगर कार्यकर्ताओं और जनता की मांग पर हो तो उसे परिवारवाद नहीं कहा जा सकता। इसी को लेकर कई दौर की बातचीत हुई और आखिरकार छह महीने बाद नीतीश कुमार तैयार हुए। विजय चौधरी ने खुलासा किया कि सिर्फ नीतीश कुमार ही नहीं, बल्कि निशांत कुमार को मनाने में भी काफी मशक्कत करनी पड़ी। उन्होंने कहा कि जदयू के अधिकांश नेता चाहते थे कि निशांत राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाएं और पार्टी का काम संभालें। पार्टी कार्यकर्ताओं के भारी दबाव और समर्थन के बाद ही निशांत सक्रिय राजनीति में आए और मंत्री बने।