पलामू की धरती से निकला 'काला सोना', 12 मिलियन टन ग्रेफाइट भंडार की पुष्टि
पलामू की धरती से निकला 'काला सोना', 12 मिलियन टन ग्रेफाइट भंडार की पुष्टि
झारखंड के पलामू जिले में खनिज संसाधनों के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। सतबरवा प्रखंड के खामडीह और पूर्णाडीह के बीच लगभग 12 मिलियन टन ग्रेफाइट का विशाल भंडार मिलने की आधिकारिक पुष्टि हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह पलामू प्रमंडल में अब तक चिह्नित सबसे बड़ा ग्रेफाइट भंडार है, जिससे क्षेत्र की आर्थिक और औद्योगिक संभावनाओं को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
खनन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, इस ग्रेफाइट का ग्रेड 7.7 है, जो इसे उच्च गुणवत्ता वाले खनिजों की श्रेणी में रखता है। आधुनिक तकनीक आधारित उद्योगों, विशेष रूप से लिथियम-आयन बैटरी निर्माण और परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में इसकी मांग काफी अधिक है। विभाग ने बताया कि इस परियोजना से संबंधित विस्तृत सर्वेक्षण, डीजीपीएस मैपिंग और भूमि सीमांकन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। अब केंद्र सरकार के निर्धारित नियमों के अनुरूप इस खदान की नीलामी की तैयारी की जा रही है।
ग्रेफाइट भंडार की पुष्टि के बाद स्थानीय लोगों में उत्साह का माहौल है। ग्रामीणों का मानना है कि खनन कार्य शुरू होने से क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और लंबे समय से जारी पलायन की समस्या में कमी आ सकती है। अनुमान है कि परियोजना के शुरू होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार उपलब्ध होगा।
यह खोज इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि पलामू क्षेत्र का ग्रेफाइट खनन से पुराना संबंध रहा है। कभी चैनपुर के चांदो-सोकरा इलाके की ग्रेफाइट खदानें देशभर में अपनी पहचान रखती थीं, लेकिन समय के साथ उनका संचालन बंद हो गया। अब सतबरवा में मिले इस नए और बड़े भंडार से न केवल पलामू, बल्कि गढ़वा और लातेहार की बंद पड़ी ग्रेफाइट खदानों के पुनर्जीवित होने की संभावनाएं भी मजबूत होती दिखाई दे रही हैं।
खनिज विशेषज्ञों का मानना है कि यदि परियोजना तय समय पर आगे बढ़ती है, तो यह खोज झारखंड के खनन उद्योग के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है।
पलामू से विकाश कश्यप की रिपोर्ट
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