एसआईआर कार्य: बैठक के दौरान बीएलओ बेहोश, कर्मियों ने लगाया मानसिक दबाव, कार्यभार का आरोप
झारखंड के जामताड़ा जिले में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्य का बढ़ता दबाव अब बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) के स्वास्थ्य पर भी असर डालने लगा है।

झारखंड के जामताड़ा जिले में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्य का बढ़ता दबाव अब बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) के स्वास्थ्य पर भी असर डालने लगा है। सोमवार को जामताड़ा प्रखंड कार्यालय में आयोजित एसआईआर समीक्षा बैठक के दौरान चलना पंचायत के रंगराडीह गांव की बीएलओ ब्यूटी कुमारी अचानक बेहोश होकर गिर पड़ीं। घटना के बाद प्रखंड सभागार में अफरा-तफरी मच गई। उपस्थित अन्य बीएलओ एवं कर्मियों ने तत्काल उन्हें उठाकर एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उनका इलाज जारी है। घटना के बाद बीएलओ एवं सेविकाओं ने एसआईआर कार्य के दौरान अत्यधिक कार्यभार, समय पर भोजन नहीं मिल पाने और लगातार मानसिक दबाव का आरोप लगाया।
इस बारे में बीएलओ सुनीता हांसदा ने बताया कि सुबह से दोपहर एक बजे तक वे अपने-अपने केंद्रों पर नियमित कार्यों में व्यस्त रहती हैं। इसके तुरंत बाद दोपहर दो बजे एसआईआर को लेकर प्रखंड सभागार में बैठक के लिए बुला लिया जाता है। ऐसे में कई कर्मियों को बिना भोजन किए ही बैठक में शामिल होना पड़ता है, जिसका सीधा असर उनके स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों से लगातार किसी न किसी बीएलओ की तबीयत खराब हो रही है। सोमवार को इसका गंभीर उदाहरण सामने आया, जब बैठक के दौरान ही एक महिला बीएलओ बेहोश होकर गिर पड़ी। यदि समय रहते उन्हें अस्पताल नहीं पहुंचाया जाता तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती थी।
वहीं बीएलओ शांति हांसदा ने आरोप लगाया कि कई महीनों से सेविकाओं का मानदेय भी लंबित है। मानदेय नहीं मिलने से आर्थिक परेशानी लगातार बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर एसआईआर जैसे महत्वपूर्ण कार्य का अतिरिक्त बोझ भी उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि लगातार दबाव में काम करने के बावजूद कर्मियों की समस्याओं को सुनने या उनकी स्थिति जानने की किसी अधिकारी ने अब तक गंभीर पहल नहीं की है।
बीएलओ एवं सेविकाओं ने प्रशासन से मांग की है कि एसआईआर कार्य के दौरान कार्य का संतुलित विभाजन किया जाए, बैठकों का समय इस प्रकार निर्धारित हो कि कर्मियों को भोजन एवं विश्राम का पर्याप्त अवसर मिल सके तथा लंबित मानदेय का शीघ्र भुगतान किया जाए। उनका कहना है कि यदि कार्य की यही स्थिति बनी रही तो इससे कर्मियों के स्वास्थ्य के साथ-साथ सरकारी कार्य भी प्रभावित हो सकते हैं।
जामताडा से संतोष की रिपोर्ट













