1855 से 2026 तक… दुमका पुलिस लाइन मैदान ने देखे इतिहास के कई रंग

झारखंड की उपराजधानी दुमका का पुलिस लाइन मैदान सिर्फ सरकारी आयोजनों का स्थल नहीं, बल्कि करीब डेढ़ सदी से अधिक के इतिहास को अपने भीतर समेटे हुए है। अंग्रेजी शासन के दौर में स्थापित यह परिसर आज राज्य के प्रमुख राजकीय समारोहों का साक्षी बन चुका है। झारखंड बनने के बाद यहां गणतंत्र दिवस पर मुख्यमंत्री और स्वतंत्रता दिवस पर राज्यपाल के हाथों राष्ट्रीय ध्वज फहराने की परंपरा लगातार जारी है।
हर वर्ष 15 अगस्त और 26 जनवरी को पुलिस लाइन मैदान में आयोजित होने वाले समारोह में प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और आम लोगों की मौजूदगी रहती है। इस दौरान परेड, झांकियां और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।
1855 में संथाल परगना के गठन के बाद पड़ी नींव
दुमका के वरिष्ठ पत्रकार और व्यवहार न्यायालय के अधिवक्ता के अनुसार, पुलिस लाइन का इतिहास ब्रिटिश शासन से जुड़ा हुआ है। वर्ष 1855 में भागलपुर और बीरभूम के कुछ हिस्सों को अलग कर संथाल परगना का गठन किया गया और दुमका को इसका मुख्यालय बनाया गया।
नई प्रशासनिक व्यवस्था को संचालित करने के लिए अधिकारियों की नियुक्ति हुई। इसके साथ ही क्षेत्र में कानून-व्यवस्था और सुरक्षा बनाए रखने के लिए पुलिस बल की आवश्यकता महसूस हुई। इसी जरूरत के मद्देनजर दुमका में पुलिस लाइन विकसित की गई।
दुमका शहर से लगभग दो किलोमीटर दूर कुसुमडीह जोरिया के किनारे अपेक्षाकृत निर्जन स्थान पर पुलिस लाइन स्थापित की गई थी। दूर-दराज से तैनाती पर आने वाले पुलिस और सुरक्षा बलों के रहने के लिए यहां बैरक बनाए गए।
ब्रिटिश काल में निर्मित कुछ बैरक आज भी इस परिसर में मौजूद हैं। उस दौर में जवानों के प्रशिक्षण के लिए फायरिंग और अन्य सैन्य अभ्यास की व्यवस्था भी की गई थी। रणनीतिक दृष्टि से यह स्थान अंग्रेजी प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण था और यहीं से संथाल परगना क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को नियंत्रित किया जाता था।
आजादी के बाद समारोहों का प्रमुख केंद्र बना
देश की आजादी के बाद पुलिस लाइन मैदान का स्वरूप धीरे-धीरे बदलता गया। 26 जनवरी और 15 अगस्त जैसे राष्ट्रीय पर्वों पर यहां सरकारी स्तर पर कार्यक्रम आयोजित होने लगे।
झंडोत्तोलन के अलावा परेड, खेलकूद, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और आकर्षक झांकियां समारोह का हिस्सा बनने लगीं। इन आयोजनों के जरिए बच्चों और आम लोगों में राष्ट्रप्रेम की भावना को बढ़ावा देने के साथ सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और संदेशों को भी लोगों तक पहुंचाया जाता रहा।
15 नवंबर 2000 को झारखंड अलग राज्य के रूप में अस्तित्व में आया। राज्य के पहले मुख्यमंत्री बने बाबूलाल मरांडी ने दुमका को उपराजधानी का दर्जा दिए जाने के बाद यहां राष्ट्रीय पर्वों के राजकीय समारोह आयोजित करने की व्यवस्था शुरू की। वर्ष 2001 में इस परंपरा की औपचारिक शुरुआत हुई। गणतंत्र दिवस पर मुख्यमंत्री और स्वतंत्रता दिवस पर राज्यपाल द्वारा पुलिस लाइन मैदान में ध्वजारोहण किए जाने की व्यवस्था बनी।
बाबूलाल मरांडी ने पहली बार फहराया था तिरंगा
26 जनवरी 2001 को तत्कालीन मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने दुमका के इसी पुलिस लाइन मैदान में पहली बार मुख्यमंत्री के रूप में राष्ट्रीय ध्वज फहराया था। इसके बाद से हर वर्ष गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस पर यहां मुख्यमंत्री और राज्यपाल के हाथों तिरंगा फहराने की परंपरा चली आ रही है।
स्वतंत्रता दिवस 2026 के अवसर पर झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार दुमका के ऐतिहासिक पुलिस लाइन मैदान में राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे। समारोह को लेकर प्रशासन की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
मैदान को सजाया गया है और समारोह में आने वाले विशिष्ट अतिथियों के साथ आम नागरिकों के लिए भी बैठने की व्यवस्था की गई है। स्थायी शेड का निर्माण भी कराया गया है। इस तरह अंग्रेजों के सैन्य केंद्र के रूप में शुरू हुआ दुमका का पुलिस लाइन मैदान आज झारखंड की राजकीय परंपरा और राष्ट्रीय पर्वों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।












