सरकारी तकनीकी संस्थानों पर बढ़ा भरोसा, इंजीनियरिंग में 94.39, पॉलिटेक्निक में 98.08 प्रतिशत सीटों पर नामांकन
पिछले पांच वर्ष में इंजीनियरिंग का नामांकन 65.86 प्रतिशत से बढ़कर 94.39 प्रतिशत और पॉलिटेक्निक का 84.37 प्रतिशत से 98.08 प्रतिशत हुआ

पटना: बिहार के सरकारी तकनीकी संस्थानों पर छात्रों का तेजी से भरोसा बढ़ा है। मौजूदा सम्राट चौधरी की सरकार के स्तर पर भी इन संस्थानों पर खासतौर से ध्यान दिया जा रहा है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 में राज्य के राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालयों में 94.39 प्रतिशत और राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थानों में 98.08 प्रतिशत सीटों पर नामांकन हुआ है। राज्य के 38 राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालयों की 15,183 सीटों में से 14,331 सीटों पर बीटेक में नामांकन हुआ। वहीं, 46 राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थानों की 17,227 सीटों में से 16,897 सीटों पर डिप्लोमा पाठ्यक्रम में नामांकन हुआ।
नामांकन के आंकड़ों के अनुसार पिछले पांच वर्षों में सरकारी तकनीकी शिक्षा के प्रति विद्यार्थियों का भरोसा बढ़ा है। वर्ष 2022-23 में राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालयों में नामांकन दर 65.86 प्रतिशत थी, जो 2023-24 में 72.71 प्रतिशत, 2024-25 में 81.33 प्रतिशत और 2025-26 में 81.52 प्रतिशत रही। वर्ष 2026-27 में यह बढ़कर 94.39 प्रतिशत हो गई। पॉलिटेक्निक में भी इसी अवधि में नामांकन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। वर्ष 2022-23 में नामांकन दर 84.37 प्रतिशत थी। वर्ष 2023-24 में यह 84.20 प्रतिशत और 2024-25 में 82.40 प्रतिशत रही। वर्ष 2025-26 में नामांकन दर बढ़कर 93.60 प्रतिशत हुई और 2026-27 में यह 98.08 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
सरकारी तकनीकी संस्थानों में बढ़ते नामांकन के पीछे किफायती शुल्क के साथ शिक्षा की गुणवत्ता और सुविधाओं में सुधार को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालयों में ट्यूशन शुल्क 10 रुपये प्रतिमाह और राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थानों में पांच रुपये प्रतिमाह है। बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के माध्यम से विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा तक पहुंच आसान बनाने का प्रावधान है। बीटेक में छात्राओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण भी है। विभाग की ओर से तकनीकी संस्थानों में स्मार्ट कक्षाओं, आधुनिक प्रयोगशालाओं और कार्यशालाओं, भाषा प्रयोगशालाओं, छात्रावास, रोजगारपरक प्रशिक्षण, खेल मैदान, ओपन जिम और स्वास्थ्य उपकेंद्र जैसी सुविधाओं के विकास पर जोर दिया जा रहा है।
पारंपरिक इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, बायोमेडिकल, रोबोटिक्स और डेटा साइंस जैसे उभरते क्षेत्रों को भी पाठ्यक्रमों में शामिल किया जा रहा है। पॉलिटेक्निक स्तर पर फायर टेक्नोलॉजी एंड सेफ्टी, माइनिंग, फूड प्रोसेसिंग, सीएडी/सीएएम और प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी जैसे पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं। राज्य के 11 राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थानों के 20 कार्यक्रमों को एनबीए मान्यता मिल चुकी है।
तकनीकी शिक्षा में बढ़ते नामांकन के साथ प्लेसमेंट के आंकड़ों में भी तेजी आई है। वर्ष 2020-21 में पॉलिटेक्निक के 1,002 और इंजीनियरिंग के 698 विद्यार्थियों समेत कुल 1,700 विद्यार्थियों का प्लेसमेंट हुआ था। वर्ष 2021-22 में यह संख्या बढ़कर 4,681 हुई, जिसमें पॉलिटेक्निक के 2,788 और इंजीनियरिंग के 1,893 विद्यार्थी शामिल थे। वर्ष 2022-23 में कुल 4,944 विद्यार्थियों का प्लेसमेंट हुआ। वर्ष 2023-24 में प्लेसमेंट की संख्या बढ़कर 8,197 और 2024-25 में 11,178 हो गई। वर्ष 2025-26 में पॉलिटेक्निक के 14,645 और इंजीनियरिंग के 5,832 विद्यार्थियों समेत कुल 20,477 विद्यार्थियों का प्लेसमेंट हुआ। इस तरह पांच वर्षों में कुल प्लेसमेंट 1,700 से बढ़कर 20,477 हो गया, यानी करीब 12 गुना वृद्धि हुई। वर्ष 2025-26 में 4,843 छात्राओं का भी प्लेसमेंट हुआ।
आईआईटी पटना के सहयोग से राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थानों में करीब 122 करोड़ रुपये की लागत से उत्कृष्टता केंद्र विकसित किए जा रहे हैं। हब-एंड-स्पोक मॉडल के माध्यम से इलेक्ट्रिक व्हीकल, ड्रोन टेक्नोलॉजी, 3डी प्रिंटिंग और रोबोटिक्स जैसी तकनीकों में विद्यार्थियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम, ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स, स्पोकन ट्यूटोरियल, कुशल युवा कार्यक्रम, उद्योगोन्मुख पाठ्यक्रम और व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से विद्यार्थियों की रोजगारपरक क्षमता बढ़ाने पर भी जोर है।










