बिहार बोर्ड में बदलेगा 10वीं-12वीं की परीक्षा का पैटर्न
बिहार बोर्ड की परीक्षाओं में अब रटकर जवाब देने की परंपरा बदलने वाली है। नई शिक्षा नीति के तहत बाल वाटिका से लेकर 12वीं तक के पाठ्यक्रम और प्रश्नपत्रों का स्वरूप बदला जाएगा।

पटना : बिहार बोर्ड की परीक्षाओं में अब रटकर जवाब देने की परंपरा बदलने वाली है। नई शिक्षा नीति के तहत बाल वाटिका से लेकर 12वीं तक के पाठ्यक्रम और प्रश्नपत्रों का स्वरूप बदला जाएगा। अब परीक्षा में ऐसे सवाल पूछे जाएंगे, जिनसे विद्यार्थियों की विषयों पर पकड़, आलोचनात्मक चिंतन और वास्तविक जीवन में अर्जित ज्ञान के उपयोग की क्षमता का आकलन किया जा सकेगा।
NCERT के परख की ओर से पांच दिवसीय कार्यशाला शुरू की गई
इसी दिशा में एनसीईआरटी के परख की ओर से पांच दिवसीय कार्यशाला शुरू की गई। इसमें बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB), एससीईआरटी और चयनित 110 मास्टर ट्रेनर भाग ले रहे हैं। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत अबतक देश के 27 शिक्षा बोर्डों में काम पूरा हो चुका है। बिहार बोर्ड देश का 28वां बोर्ड है, जहां मंगलवार से कार्यशाला शुरू हुई है।
देशभर के बोर्ड के लिए बनेगा समतुल्य क्वेश्चन बैंक
फिलहाल 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में लगभग तय पैटर्न पर प्रश्न पूछे जाते हैं। प्रश्नपत्र तैयार करने में भी पिछले तीन से पांच वर्षों के सवालों को आधार बनाया जाता है। नई शिक्षा नीति के तहत इस व्यवस्था में बदलाव किया जा रहा है। अब प्रश्नपत्र पूरी तरह दक्षता आधारित बनाने पर जोर होगा। इसके लिए देशभर के शिक्षा बोर्डों के लिए एक समतुल्य क्वेश्चन बैंक तैयार किया जा रहा है। इसमें प्रश्नों के अलग-अलग पैटर्न और उनकी प्रकृति की जानकारी उपलब्ध होगी। राज्य के बोर्ड इस क्वेश्चन बैंक के माध्यम से प्रश्न तैयार करने के नए तरीकों को समझ सकेंगे। आने वाले वर्षों में इस व्यवस्था को सभी बोर्डों की परीक्षाओं में लागू किया जाएगा।
रटने के बजाय समझ और विश्लेषण पर होगा जोर
कार्यशाला में शिक्षकों को रटकर पढ़ने और पढ़ाने की प्रणाली से दूर करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्हें ऐसे प्रश्न तैयार करने की जानकारी दी जाएगी, जिनसे विद्यार्थियों की विषयों की समझ, विश्लेषणात्मक एवं आलोचनात्मक सोच और वास्तविक जीवन में सीखे गए ज्ञान के इस्तेमाल की क्षमता का आकलन किया जा सके। इस पहल का उद्देश्य सरकारी स्कूलों में पूछे जाने वाले प्रश्नों को विश्लेषणात्मक और दक्षता आधारित बनाना है। इससे बिहार बोर्ड के विद्यार्थियों को भी दूसरे राज्यों के शिक्षा बोर्डों के विद्यार्थियों के समकक्ष शैक्षणिक दक्षता हासिल करने में मदद मिलेगी।
सत्र 2027-28 से कक्षाओं में दिखेगा बदलाव
राज्य के सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक सत्र 2027-28 से विद्यार्थियों को दक्षता आधारित प्रश्नों से रूबरू कराया जाएगा। कक्षाओं में भी शिक्षकों का जोर बच्चों की समझ और योग्यता के अनुरूप सवाल पूछने पर होगा। कार्यशाला में मास्टर ट्रेनरों को मूल्यांकन के नियमों और मानकों की विस्तृत जानकारी दी जाएगी, ताकि देश के सभी शिक्षा बोर्डों में मूल्यांकन प्रक्रिया में एकरूपता और समानता सुनिश्चित की जा सके।
OMR और डिजिटल टूल्स का भी मिलेगा प्रशिक्षण
मास्टर ट्रेनरों को डिजिटल टूल्स और ओएमआर तकनीक का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इसमें ओएमआर शीट भरने, डेटा मैपिंग और डिजिटल माध्यमों के इस्तेमाल की जानकारी दी जाएगी। इससे विद्यार्थियों से संबंधित आंकड़ों का संग्रह पारदर्शी और सटीक तरीके से किया जा सकेगा। पांच दिवसीय प्रशिक्षण पूरा होने के बाद मास्टर ट्रेनर अपने-अपने जिलों में जाकर अन्य शिक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे।











