फूस के छप्पर से 20 लाख के टर्नओवर तक का सफर: आमना खातून ने रची स्वावलंबन की नयी इबारत
राज्य के शिवहर जिले की निवासी आमना खातून ने पुरानी कहावत जहां चाह, वहां राह को सच साबित कर के दिखाया है।

राज्य के शिवहर जिले की निवासी आमना खातून ने पुरानी कहावत जहां चाह, वहां राह को सच साबित कर के दिखाया है। कभी आर्थिक तंगी और सामाजिक पाबंदियों के बीच अपने हुनर को दबाने पर मजबूर आमना दीदी आज स्वावलंबन और महिला उद्यमिता की बेमिसाल मिसाल बन चुकी हैं। लहठी के कारोबार से सालाना वह खुद न सिर्फ लाखों की आमदनी कर रही हैं बल्कि दो दर्जन से अधिक महिलाओं के लिए स्थाई रोजगार भी सृजित कर चुकी हैं।
विवाह से पूर्व लहठी (पारंपरिक चूड़ी) बनाने का हुनर रखने वाली आमना बताती हैं कि उनका जीवन विवाह के बाद चार बच्चों की परवरिश और सीमित आय के बीच संघर्षों में बीत रहा था। उनके पति लुधियाना में सिलाई का काम करते थे, जिससे घर का खर्च चलाना बेहद कठिन था। लेकिन वर्ष 2017 में आला हजरत जीविका स्वयं सहायता समूह और बागमती ग्राम संगठन से जुड़ने के बाद उनके सपनों को नए पंख मिले। समूह से मिली प्रेरणा और पति के सहयोग से आमना ने वर्ष 2020 में समूह से 40,000 रुपये का पहला ऋण लिया। आठ साल के लंबे अंतराल के बाद उन्होंने सीतामढ़ी से कच्चा माल खरीदकर दोबारा लहठी निर्माण शुरू किया। उनकी बेहतरीन कारीगरी को स्थानीय दुकानदारों ने हाथों-हाथ लिया और पहली ही बार में उन्हें 7,000 का शुद्ध मुनाफा हुआ। इस सफलता ने उनके हौसले को और बुलंद किया। इसके बाद समय पर ऋण चुकाते हुए उन्होंने व्यवसाय का विस्तार किया। सरस मेलों में आमना के हाथों निर्मित लहठियों की खूब मांग रही, जहां से उन्हें 70,000 रुपये की सीधी बचत हुई।
इस मामले में आमना का कहना है कि आज उनका यह घरेलू उद्यम 15-20 लाख रुपये के सालाना टर्नओवर वाले एक सफल उद्योग में बदल चुका है, जिससे उन्हें सालाना 5 लाख से 6 लाख रुपये का शुद्ध लाभ हो रहा है। उनकी बनाई खूबसूरत लहठियां न केवल शिवहर और सीतामढ़ी की 25-30 से अधिक दुकानों में बिकती हैं, बल्कि पटना, दिल्ली, गुरुग्राम, वाराणसी, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और देवघर के मेलों तक अपनी खास पहचान बना चुकी हैं।
जीविका अधिकारियों का कहना है कि अपनी मेहनत के दम पर आमना ने न केवल अपने परिवार की तकदीर बदली, बल्कि गांव के 13 लोगों को रोजगार भी दिया है। इनमें जीविका से जुड़ी 10 महिलाएं शामिल हैं। अब तक समूह से लिए गए 9.75 लाख के ऋण का शत-प्रतिशत भुगतान कर चुकीं आमना दीदी अब 20-25 लाख के नए निवेश के साथ अपने कारोबार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाने का संकल्प लिए हुए हैं। फूस के छप्पर से शुरू हुआ उनका यह सफर आज बिहार की लाखों महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुका है।
ग्रामीण विकास विभाग और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग में मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि जीविका से जुड़कर लाखों ग्रामीण महिलाएं अपनी तकदीर की नई इबारत लिख रही हैं और आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से आगे बढ़ रही हैं। जीविका के माध्यम से सरकार अलग-अलग समूहों को पूरी मदद दे रही है। लहठी कारोबार से जुड़ीं आमना खातून को उनकी सफलता के लिए ढेर सारी शुभकामानाएं देता हूं और उम्मीद करता हूं कि उनसे प्रेरित होकर दूसरी महिलाएं भी खुद के हुनर और परिश्रम से अपनी नई पहचान स्थापित करेंगी।











