परिवहन विभाग का अनोखा कारनामा, दुपहिया वाहन मालिक को भेज दिया कार का चालान
रोहतास जिले से परिवहन विभाग की लापरवाही का एक अनोखा मामला सामने आया है। परिवहन विभाग द्वारा जारी मैसेज में पवन कुमार के मोटरसाइकिल के रजिस्ट्रेशन नंबर पर दो हजार रुपए का चालान भेजा गया था, जिसके बाद वे सकते में आ गए। उनके पास सिर्फ एक पल्सर बाइक है

सासाराम। रोहतास जिले से परिवहन विभाग की लापरवाही का एक अनोखा मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार सदर प्रखंड के मोकर गांव निवासी पवन कुमार को लगभग तीन वर्ष पूर्व मोबाइल पर एक मैसेज प्राप्त हुआ था। परिवहन विभाग द्वारा जारी मैसेज में पवन कुमार के मोटरसाइकिल के रजिस्ट्रेशन नंबर पर दो हजार रुपए का चालान भेजा गया था, जिसके बाद वे सकते में आ गए।
कार की तस्वीर देख उड़े होश
पीड़ित पवन कुमार के अनुसार उनके पास सिर्फ एक पल्सर बाइक है और वे एक सामान्य परिवार से ताल्लुक रखते हैं। मैसेज मिलने के बाद जब उन्होंने अगले दिन साइबर कैफे से चालान निकलवाया, तो उनके होश उड़ गये। चालान की कॉपी पर अपनी बाइक की जगह कार की तस्वीर देखकर उन्होंने अपना सर पकड़ लिया। पीड़ित ने यह भी बताया कि परिवहन विभाग द्वारा जिस दिन उनके बाइक के रजिस्ट्रेशन नंबर पर चालान काटा गया, उस दिन उनकी बाइक पूरे दिन घर पर ही खड़ी थी।
तीन वर्षों से परिवहन विभाग का लग रहा चक्कर
परिवहन विभाग की इस बड़ी चूक के कारण पीड़ित पवन कुमार बीते तीन वर्षों से मानसिक प्रताड़ना झेल रहे हैं। उनका कहना है कि चालान को निरस्त करवाने के लिए वे बीते तीन वर्षों से यातायात थाने से लेकर परिवहन विभाग का कई बार चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन मानसिक प्रताड़ना के अलावा उन्हें कुछ हासिल नहीं हुआ।
लोक अदालत से भी नहीं मिला न्याय
बता दें कि जिला विधिक सेवा प्राधिकार के तत्वावधान में वाहनों के ट्रैफिक चालान से जुड़े मामलों के निष्पादन के लिए शनिवार को जिला परिवहन कार्यालय में तीन बेंच का गठन किया गया था, लेकिन यहां भी न्याय के लिए पहुंचे पवन कुमार को सिर्फ निराशा हाथ लगी। उन्होंने कहा कि इन तीन वर्षों में वे मानसिक रूप से काफी परेशान हो चुके हैं और विभाग की लापरवाही का सजा भोग रहे हैं। गौरतलब है कि ऑनलाइन एवं सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से वाहनों के काटे जा रहे चालान में लगातार इस तरह की गड़बड़ियां सामने आ रहीं हैं, जो वाहन स्वामियों के लिए परेशानी का सबब बन रही है।
सासाराम से दिवाकर तिवारी की रिपोर्ट










