आरके सिन्हा: पत्रकारिता से उद्योग जगत और संसद तक का सफर, युद्ध में रिपोर्टिंग, करोड़ों की संपत्ति
बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद आरके सिन्हा (रवींद्र किशोर सिन्हा) का शुक्रवार (30 अक्टूबर, 2026) को नोएडा स्थित आवास पर निधन हो गया। जनसंघ से लेकर बीजेपी के संस्थापक सदस्य थे। आरके सिन्हा राजनेता, पत्रकार, लेखक और उद्यमी थे।

बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद आरके सिन्हा (रवींद्र किशोर सिन्हा) का शुक्रवार (30 अक्टूबर, 2026) को नोएडा स्थित आवास पर निधन हो गया। उनके निधन से राजनीतिक, सामाजिक और कारोबारी जगत में शोक की लहर है, वे लंबे वक्त से बीमार थे। ब्रेन स्ट्रोक के बाद आरके सिन्हा लंबे वक्त कोमा में रहे। आरके सिन्हा भाजपा के शुरुआती दौर से ही संगठन से जुड़े रहे थे। जनसंघ से लेकर बीजेपी के संस्थापक सदस्य थे। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई और बीजेपी के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी के बेहद करीबी माने जाते थे। आर. के. सिन्हा राजनेता, पत्रकार, लेखक और उद्यमी थे। वे भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर अप्रैल 2014 से अप्रैल 2020 तक बिहार से राज्यसभा सदस्य रहे। देश की निजी सुरक्षा सेवा कंपनी SIS Group की स्थापना भी उन्होंने की थी।
व्यक्तिगत परिचय
विवरण जानकारी
पूरा नाम रवींद्र किशोर सिन्हा
प्रचलित नाम आर. के. सिन्हा (R. K. Sinha)
जन्मतिथि 27 सितंबर 1951
जन्मस्थान बक्सर, बिहार
पिता स्व. सूरज प्रसाद सिन्हा
माता स्व. अन्नपूर्णा सिन्हा
पत्नी रीता किशोर सिन्हा
संतान एक पुत्र और एक पुत्री
शिक्षा ए. एन. कॉलेज, पटना; स्नातक
राजनीतिक दल भारतीय जनता पार्टी
राज्यसभा कार्यकाल
10 अप्रैल 2014 –9 अप्रैल 2020
व्यवसाय-पत्रकारिता, उद्यमिता, लेखन और राजनीति
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
आर. के. सिन्हा का जन्म बिहार के बक्सर में हुआ। उनके पिता की नौकरी पटना में होने के कारण उनका पालन-पोषण और शिक्षा पटना में हुई। उन्होंने ए. एन. कॉलेज, पटना से उच्च शिक्षा प्राप्त की। छात्र जीवन से ही उनकी रुचि सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में रही। उनकी आधिकारिक जीवनी के अनुसार, वे 1966 से भारतीय जनसंघ से जुड़े और बाद में भारतीय जनता पार्टी की संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय रहे।
पत्रकारिता से करियर की शुरुआत
आर. के. सिन्हा ने अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत पत्रकारिता से की। उन्होंने अपराध, राजनीति और समसामयिक विषयों पर रिपोर्टिंग की। 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान उन्होंने युद्ध संवाददाता के रूप में भी कार्य किया। इसके बाद वे बिहार के छात्र आंदोलन और जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चले जनांदोलन से संबंधित लेखन में सक्रिय रहे। उनकी पुस्तक जन आंदोलन में बिहार के छात्र आंदोलन और उससे जुड़े राजनीतिक घटनाक्रमों का विवरण मिलता है।
SIS Group की स्थापना और कारोबारी सफर
1974 में आर. के. सिन्हा ने Security and Intelligence Services (India) Limited (SIS) की स्थापना की। कंपनी की शुरुआत पटना में बहुत सीमित संसाधनों के साथ हुई थी। शुरुआती दौर में पूर्व सैनिकों को निजी सुरक्षा सेवाओं में रोजगार देने पर विशेष ध्यान दिया गया।
बाद में SIS ने भारत के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपने कारोबार का विस्तार किया। यह समूह सुरक्षा, सुविधा प्रबंधन और व्यावसायिक सहायता सेवाओं से जुड़ा है। दिसंबर 2013 में प्रकाशित इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, सिन्हा ने मामूली शुरुआती संसाधनों से कारोबार शुरू किया था, जो आगे चलकर हजारों करोड़ रुपये के व्यवसाय में विकसित हुआ।
राजनीतिक जीवन और भाजपा से जुड़ाव
आर. के. सिन्हा लंबे समय से भारतीय जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी की राजनीति से जुड़े रहे हैं। उनकी आधिकारिक जीवनी के अनुसार, उन्होंने पार्टी के राज्य एवं केंद्रीय संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं।
2014 में वे बिहार से राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित हुए। उनका छह वर्षीय कार्यकाल 9 अप्रैल 2020 को समाप्त हुआ। इस दौरान वे गृह मामलों और विदेश मामलों सहित विभिन्न संसदीय समितियों से जुड़े रहे।
परिवार और पुत्र ऋतुराज सिन्हा
आर. के. सिन्हा की पत्नी रीता किशोर सिन्हा हैं। उनके पुत्र ऋतुराज सिन्हा भी भारतीय जनता पार्टी की राजनीति में सक्रिय हैं और पार्टी के राष्ट्रीय सचिव के रूप में कार्यरत हैं। ऋतुराज सिन्हा का जन्म 29 नवंबर 1980 को रांची में हुआ था।
सामाजिक कार्य और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान
SIS Group की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, आर. के. सिन्हा कौशल विकास, युवाओं को रोजगार, पूर्व सैनिकों के पुनर्वास, महिला उद्यमिता और ग्रामीण विकास से संबंधित गतिविधियों से जुड़े रहे हैं।
उनसे जुड़े सामाजिक कार्यों में सामूहिक विवाह, सार्वजनिक पुस्तकालय, निःशुल्क एंबुलेंस सेवाएं और बाढ़ राहत जैसी पहलें शामिल बताई गई हैं। वे आदि चित्रगुप्त फाइनेंस लिमिटेड (ACFL) के संस्थापक भी हैं, जिसका उद्देश्य वंचित महिला उद्यमियों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है।
लेखक के रूप में योगदान
आर. के. सिन्हा ने राजनीति, सामाजिक आंदोलन, सुरक्षा प्रबंधन और समसामयिक विषयों पर पुस्तकें लिखी हैं। उनकी प्रमुख पुस्तकों में जन आंदोलन, Me and My Guru, महामानव मृत्युंजय, By The Way, बेलाग-लपेट और समय का सच शामिल हैं।
संपत्ति और चुनावी हलफनामा
2014 के राज्यसभा चुनाव के दौरान दाखिल उनके हलफनामे के ADR/MyNeta रिकॉर्ड के अनुसार, उन्होंने लगभग ₹857.11 करोड़ की संपत्ति और लगभग ₹5.92 करोड़ की देनदारियां घोषित की थीं। उस हलफनामे में उनके विरुद्ध कोई आपराधिक मामला घोषित नहीं था। ये 2014 के ऐतिहासिक आंकड़े हैं, वर्तमान संपत्ति या कानूनी स्थिति का विवरण नहीं।
पत्रकारिता से व्यवसाय और राजनीति तक
आर. के. सिन्हा का सार्वजनिक जीवन तीन प्रमुख क्षेत्रों—पत्रकारिता, उद्यमिता और राजनीति—से जुड़ा रहा है। पत्रकार के रूप में शुरुआत करने के बाद उन्होंने 1974 में SIS की स्थापना की और 2014 में राज्यसभा पहुंचे। इसके समानांतर उनका लेखन और सामाजिक संगठनों से जुड़ाव भी जारी रहा।













