जांच के लिए वाहन रोकने का अधिकार दारोगा से नीचे के पदाधिकारी को नहीं : एडीजी
राज्य में किसी स्थान पर वाहन जांच करने में सिपाही की भूमिका नहीं होगी। किसी वाहन को रोकने या इनका चालान काटने या अन्य किसी तरह की कार्रवाई करने का अधिकार दारोगा या इससे ऊपर के पदाधिकारी को ही होगा।

राज्य में किसी स्थान पर वाहन जांच करने में सिपाही की भूमिका नहीं होगी। किसी वाहन को रोकने या इनका चालान काटने या अन्य किसी तरह की कार्रवाई करने का अधिकार दारोगा या इससे ऊपर के पदाधिकारी को ही होगा। जमादार या सिपाही रैंक के पदाधिकारी किसी वाहन को रोकने या इनके खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई नहीं करेंगे। यह जानकारी एडीजी (यातायात) सुधांशु कुमार ने पुलिस मुख्यालय सरदार पटेल भवन के सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में दी।
एडीजी ने कहा कि अगर वाहन जांच के दौरान अगर कोई डिजी लॉकर या ऑनलाइन माध्यम से कोई दस्तावेज दिखाता है, तो वह भी पूरी तरह मान्य होगा। बस ये दस्तावेज समुचित और असली होने चाहिए। ट्रैफिक में तैनात सभी कर्मियों को हर हाल में बॉडीवार्न कैमरा पहनना अनिवार्य होगा। इसे ऑन किए बिना किसी तरह की जांच या चालान से संबंधित कार्रवाई करना गलत माना जाएगा। उन्होंने कहा कि पटना के गांधी मैदान के पास स्थित आईसीसीसी (इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर) से सभी स्थानों खासकर प्रमुख स्थानों पर ट्रैफिक की मॉनीटरिंग की जाएगी। अगर कहीं जाम या किसी तरह की समस्या उत्पन्न होती है, तो तुरंत इस स्थान पर तैनात ट्रैफिक पुलिस कर्मियों या क्यूआरटी (क्वीक रिस्पांस टीम) को सूचना दी जाएगी। ताकि स्थिति पर तुरंत नियंत्रण पाया जा सके।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री राहत योजना को लेकर लोगों के बीच जागरूकता और जानकारी की कमी के कारण इसका समुचित तरीके से लाभ नहीं ले पाते हैं। इस योजना के तहत दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को चिन्हित अस्पतालों में 1.50 लाख रुपये तक का इलाज मुफ्त करवा सकते हैं। दुर्घटना होने के 24 घंटे के अंदर कॉल सेंटर पर फोन या स्थानीय थानों को सूचना देकर पूरी जानकारी देनी होगी, तभी इसका लाभ मिल सकेगा। जानकारी के अभाव में अब तक बिहार में सिर्फ 82 लोग ही इस कैशलेस योजना का लाभ ले पाएं हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सभी जिलों में मोटरवाहन क्लेम ट्रिब्यूनल (एमवीएसटी) का गठन हो चुका है। इसमें दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को मुआवजा का भुगतान किया जा सकेगा। अब तक 3 हजार 339 मामलों में 1 हजार 972 लोगों को मुआवजा दिलाया जा चुका है।
एडीजी ने कहा कि पटना समेत सभी प्रमुख शहरों में ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू करने के लिए नो वेंडर जोन समेत सभी प्रमुख स्थानों या सड़कों पर अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए नगर निगम समेत अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर काम किया जा रहा है। इसके अलावा शहर में प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक को नियंत्रित करने के लिए पुलिस कर्मियों की तैनाती चौक के अलावा प्वाइंट टू प्वाइंट की जा रही है। ताकि जाम लगने नहीं दिया जा सके। कुछ स्थानों पर मेट्रो के निर्माण, अतिक्रमण और अन्य कारणों से जाम की समस्या उत्पन्न हो रही है। इसे दूर करने के लिए स्थानों का चयन कर निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसके अलावा पटना में ऑटो वालों को अनुशासित करने के लिए भी पुलिस वालों को खासतौर से निर्देश दिए गए हैं। ताकि यातायात संचालन प्रभावी तरके से हो सके। इसके लिए पुलिस पदाधिकारियों को भी प्रशिक्षित किया गया है।













