बिहार पंचायत चुनाव पर बड़ी अपडेट, फंस गया पेंच!, आरक्षण, वोटर लिस्ट पर बढ़ा सस्पेंस, जानिए अब कब होगा?
बिहार पंचायत चुनाव पर बड़ी अपडेट सामने आई है। अब तक आरक्षण (रोस्टर) की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है, जबकि अंतिम मतदाता सूची भी जारी नहीं हुई है। दोनों प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही चुनाव कार्यक्रम घोषित किए जाएंगे।
बिहार पंचायत चुनाव पर बड़ी अपडेट सामने आई है। चुनाव की तैयारियों की रफ्तार बेहद धीमी होने के कारण पंचायत चुनाव तय समय पर होंगे या नहीं? इस पर संशय गहराता दिखाई दे रहा है। दिसंबर 2026 तक पूरी चुनाव प्रक्रिया पूरी होने पर देरी की संभावना बढ़ गई है। अब तक ना तो वोटर लिस्ट प्रकाशित हुई है और ना ही मतदान केंद्र तय हो सके हैं। अब तक आरक्षण (रोस्टर) की प्रक्रिया भी शुरू नहीं हुई है। इस बीच मौजूदा आयुक्त का कार्यकाल भी तीन सप्ताह में समाप्त हो जाएगा।
बताया जा रहा है कि राज्यभर में करीब ढाई लाख पंचायत पदों के लिए आरक्षण तय किया जाना है। हालांकि अभी तक इस दिशा में कोई औपचारिक पहल सामने नहीं आई है। वर्तमान राज्य निर्वाचन आयुक्त डॉ. दीपक प्रसाद का कार्यकाल 27 जुलाई 2026 को समाप्त होने वाला है। यदि समय पर नए आयुक्त की नियुक्ति नहीं होती है, तो चुनाव संबंधी लंबित कार्यों में और देरी हो सकती है। अब तक आरक्षण (रोस्टर) की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है, जबकि अंतिम मतदाता सूची भी जारी नहीं हुई है। दोनों प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही चुनाव कार्यक्रम घोषित किए जाएंगे। ऐसे में तय समय पर चुनाव कराने को लेकर संशय बना हुआ है। राज्य निर्वाचन आयोग तैयारियों में जुटा है। प्रशासनिक स्तर पर आवश्यक प्रक्रियाएं जारी है।
इस साल अबतक छह महीने से अधिक का समय बीत जाने के बावजूद पंचायत चुनाव को लेकर मतदाता सूची का प्रकाशन, मतदान केंद्रों का निर्धारण और आरक्षण निर्धारण जैसे महत्वपूर्ण कार्य को लेकर कोई पहल नहीं हुई है। बिहार की पंचायती राज व्यवस्था देश की सबसे बड़ी स्थानीय स्वशासन व्यवस्थाओं में से एक मानी जाती है। राज्य में कुल 8,053 मुखिया, 8,053 सरपंच, 1,09,635 वार्ड सदस्य, 1,09,635 पंच, 11,085 पंचायत समिति सदस्य तथा 1,160 जिला परिषद सदस्य के पद हैं। फिलहाल चुनाव की तैयारियों की मौजूदा स्थिति को देखते हुए तो ऐसा लग रहा है कि दिसंबर 2026 तक पंचायत चुनाव कराने की समय-सीमा प्रभावित हो सकती है।
अब तक आरक्षण (रोस्टर) की प्रक्रिया भी शुरू नहीं हुई है। पंचायत चुनाव में यह काफी अहम है। पंचायत चुनाव में किस पंचायत की सीट सामान्य होगी और कौन-सी सीट अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अत्यंत पिछड़ा वर्ग या महिला के लिए आरक्षित होगी, इसका फैसला आरक्षण रोस्टर से होता है। माना जा रहा है कि करीब 10 साल बाद कई पंचायतों में आरक्षण की श्रेणियां बदल सकती हैं। ऐसे में मौजूदा जनप्रतिनिधियों से लेकर नए दावेदारों तक सभी की नजर अंतिम आरक्षण सूची पर टिकी है, क्योंकि इसी से चुनावी समीकरण तय होंगे।
बता दें कि पंचायत चुनाव में मुखिया, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य, वार्ड सदस्य और पंच इन प्रमुख पदों के लिए मतदान कराया जाएगा। इन सभी पदों के लिए आरक्षण रोस्टर अलग-अलग पंचायतों के हिसाब से तय किया जाएगा। इस बार भी पंचायतों का आरक्षण वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर तैयार किया जा रहा है। नई जनगणना के आंकड़े उपलब्ध नहीं होने के कारण फिलहाल पुराने आंकड़ों का ही इस्तेमाल किया जाएगा।
पंचायती राज व्यवस्था के तहत पदवार सीटों की संख्या
पंचायत चुनाव में पद पदों की संख्या
मुखिया 8053
वार्ड सदस्य 1,09635
सरपंच 8053
पंच 1,09635
पंचायत समिति 11,085
जिला परिषद 1160
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