चीनी ही नहीं गुड़, चावल और दूध-अंडे समेत ये सब भी महंगा, आम लोगों पर क्या होगा असर? एथेनॉल का झमेला...

देश में चीनी समेत कई जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में पिछले तीन महीनों के दौरान तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है। तीन महीने में चीनी करीब 19 रुपये प्रति किलो यानी लगभग 40% महंगी हो गई है। इसके अलावा गुड़, चावल, मक्के का आटा, पशु आहार के दाम भी बढ़े हैं

चीनी ही नहीं गुड़, चावल और दूध-अंडे समेत ये सब भी महंगा, आम लोगों पर क्या होगा असर? एथेनॉल का झमेला...

देश में चीनी समेत कई जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में पिछले तीन महीनों के दौरान तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है। सबसे ज्यादा असर चीनी के दाम पर पड़ा है। तीन महीने में चीनी करीब 19 रुपये प्रति किलो यानी लगभग 40% महंगी हो गई है। इसके अलावा गुड़, चावल, मक्के का आटा, पशु आहार और पोल्ट्री फीड के दाम भी बढ़े हैं। बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने 10 लाख टन रॉ शुगर के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति देने का फैसला किया है। इसके साथ ही ज्यादा चीनी इस्तेमाल करने वाले थोक उपभोक्ताओं पर स्टॉक लिमिट भी लागू की जा रही है।

तीन महीने में कितने बढ़े दाम?

उत्पाद    अभी का भाव    3 महीने पहले                        बढ़ोतरी

चीनी       ₹67/kg                 ₹48/kg                    ₹19 यानी 39.58%

गुड़             ₹65/kg              ₹50/kg                ₹15 यानी 24%

चावल कनकी    ₹29/kg       ₹25/kg             ₹4 यानी 16%

मक्के का आटा    ₹40/kg     ₹36/kg             ₹4 यानी 11.11%

इडली रवा/राइस फ्लोर   ₹42/kg    ₹38/kg    ₹4 यानी 10.53%

पशु आहार    ₹32/kg    ₹29/kg               ₹3 यानी 10.34%

पोल्ट्री फीड    ₹25/kg    ₹23/kg                    ₹2 यानी 8.70%

सबसे ज्यादा बढ़ोतरी चीनी में हुई है। तीन महीने पहले जो चीनी करीब 48 रुपये प्रति किलो थी, उसका भाव बढ़कर लगभग 67-75 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है।

सरकार ने क्या फैसला लिया?

चीनी की कीमतों पर नियंत्रण के लिए सरकार ने कई अहम कदम उठाए हैं।

31 अक्टूबर तक 10 लाख टन रॉ शुगर के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति।

आयात की व्यवस्था टैरिफ रेट कोटा के तहत की जाएगी।

हर महीने 10 टन से अधिक चीनी की खपत करने वाले थोक उपभोक्ताओं पर स्टॉक लिमिट लागू होगी।

ऐसे उपभोक्ता अब अधिकतम 15 दिन की जरूरत के बराबर चीनी ही स्टॉक में रख सकेंगे।

सरकार का उद्देश्य बाजार में उपलब्धता बढ़ाना और जमाखोरी तथा पैनिक बाइंग को रोकना है।

चीनी महंगी होने की बड़ी वजह क्या?

चीनी की कीमतों में तेजी की सबसे बड़ी वजह अगले शुगर सीजन की शुरुआत में कम स्टॉक रहने की आशंका बताई जा रही है।

1 अक्टूबर से शुरू होने वाले 2026-27 चीनी सीजन में देश का ओपनिंग स्टॉक घरेलू जरूरत के लिहाज से आवश्यक करीब 50 लाख टन से कम रहने का अनुमान है।

पिछले सीजन की तुलना में मिलों के पास मौजूद चीनी के शुरुआती स्टॉक में बड़ी कमी आई है।

एथेनॉल में गया चीनी बनाने लायक गन्ना-शीरा

चीनी की उपलब्धता पर एथेनॉल उत्पादन का भी असर बताया जा रहा है। ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन के अनुसार, देश में पिछले साल करीब 720 करोड़ लीटर एथेनॉल का उत्पादन हुआ। इसके लिए करीब 1.33 करोड़ टन अनाज के साथ इतनी मात्रा में गन्ना और शीरा इस्तेमाल किया गया, जिससे करीब 25 लाख टन चीनी तैयार की जा सकती थी।

एथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल का बड़ा हिस्सा अनाज से आता है। करीब 67% हिस्सा मक्का, चावल की टुकड़ी और खराब अनाज से आता है। करीब 33% हिस्सा गन्ने और उससे बनने वाले उत्पादों से आता है। इससे चीनी उद्योग के लिए उपलब्ध गन्ने का एक हिस्सा एथेनॉल उत्पादन में चला जाता है।

गन्ने का उत्पादन बढ़ने का अनुमान, फिर भी स्टॉक पर दबाव

इंडियन शुगर एंड बायो एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के मुताबिक 2026-27 में देश में गन्ने का कुल उत्पादन लगभग 46.3 करोड़ टन रहने का अनुमान है।

वहीं चीनी उत्पादन करीब 3.36 करोड़ टन रहने का अनुमान लगाया गया है। यह पिछले वर्ष के मुकाबले लगभग 12% अधिक बताया जा रहा है। इसके बावजूद बाजार में चिंता का कारण उत्पादन से ज्यादा शुरुआती स्टॉक और एथेनॉल की ओर गन्ने के डायवर्जन को माना जा रहा है।

पशु आहार और दूध-अंडे भी हुए महंगे

खराब अनाज की उपलब्धता में कमी का असर पशु और पोल्ट्री फीड पर भी पड़ रहा है। पशु आहार की कीमतों में करीब 8-10% तक बढ़ोतरी हुई है। इसका असर दूध और अंडे की लागत पर भी पड़ा है। दूध और अंडे की कीमतों में करीब 5-10% तक वृद्धि देखी गई है। इस तरह चीनी और अनाज की कीमतों में तेजी केवल घरेलू रसोई तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी खाद्य श्रृंखला पर इसका असर पड़ रहा है।

रॉ शुगर आयात पर सरकार की नजर

उद्योग संगठनों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार से तत्काल बड़ी मात्रा में चीनी हासिल करना आसान नहीं होगा। कारोबारियों के मुताबिक नवंबर से पहले वैश्विक बाजार में जरूरत के मुताबिक रॉ शुगर की उपलब्धता सीमित रह सकती है। सरकार फिलहाल रॉ शुगर के आयात के जरिए घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

चीनी निर्यात में लगातार गिरावट

भारत के चीनी और शीरा आधारित उत्पादों के निर्यात में भी पिछले कुछ वर्षों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।

2022-23: करीब 1.33 करोड़ टन

2023-24: करीब 51.35 लाख टन

2024-25: करीब 38.43 लाख टन

मौजूदा परिस्थितियों में घरेलू बाजार की जरूरत पूरी करने के लिए आयात की नौबत आने के कारण आगामी सीजन में निर्यात बेहद सीमित रहने की संभावना जताई जा रही है।

आम लोगों पर क्या होगा असर?

चीनी के दाम बढ़ने का सीधा असर केवल घर में इस्तेमाल होने वाली चीनी तक सीमित नहीं रहेगा। इसका असर मिठाई, बिस्किट, बेकरी प्रोडक्ट, कोल्ड ड्रिंक, आइसक्रीम, डेयरी प्रोडक्ट और अन्य खाद्य उत्पादों की कीमतों पर भी पड़ सकता है। अगर आयात के बाद बाजार में पर्याप्त सप्लाई आती है और स्टॉक लिमिट प्रभावी रहती है तो आने वाले दिनों में चीनी की कीमतों पर कुछ दबाव कम हो सकता है। हालांकि कीमतें कितनी नीचे आएंगी, यह घरेलू उत्पादन, आयात की वास्तविक मात्रा और अगले शुगर सीजन के शुरुआती स्टॉक पर निर्भर करेगा।

एक नजर में पूरी खबर

चीनी तीन महीने में करीब 40% महंगी।

भाव लगभग ₹48 से बढ़कर ₹67 प्रति किलो।

गुड़ में 24% और चावल कनकी में 16% की तेजी।

मक्के का आटा करीब 11% महंगा।

सरकार 10 लाख टन रॉ शुगर शुल्क-मुक्त आयात करेगी।

ज्यादा खपत वाले थोक उपभोक्ताओं पर स्टॉक लिमिट।

अधिकतम 15 दिन की जरूरत जितनी चीनी रखने की अनुमति।

नए सीजन में ओपनिंग स्टॉक करीब 32 लाख टन रहने का अनुमान।

पिछले साल ओपनिंग स्टॉक करीब 47 लाख टन था।

एथेनॉल में इतनी मात्रा में गन्ना-शीरा गया जिससे करीब 25 लाख टन चीनी बन सकती थी।

2026-27 में चीनी उत्पादन करीब 3.36 करोड़ टन रहने का अनुमान।

गन्ना उत्पादन करीब 46.3 करोड़ टन रह सकता है।

सरकार आयात और स्टॉक लिमिट के जरिए कीमतों पर नियंत्रण की कोशिश में है।

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