नालंदा विश्वविद्यालय में 'विश्व रंग 2026' का 8वां संस्करण, श्रीलंका-सिंगापुर समेत 60 देशों के डेलीगेट हुए शामिल
नालंदा विश्वविद्यालय परिसर स्थित विश्वामित्र सभागार में रविंद्रनाथ टैगोर अंतरराष्ट्रीय साहित्य एवं कला महोत्सव ‘विश्व रंग 2026’ के आठवें संस्करण का आगाज हुआ। दो दिवसीय यह आयोजन 7 और 8 अक्टूबर तक चलेगा।

नालंदा विश्वविद्यालय परिसर स्थित विश्वामित्र सभागार में रविंद्रनाथ टैगोर अंतरराष्ट्रीय साहित्य एवं कला महोत्सव ‘विश्व रंग 2026’ के आठवें संस्करण का आगाज हुआ। दो दिवसीय यह आयोजन 7 और 8 अक्टूबर तक चलेगा। कार्यक्रम में साहित्य, भाषा, संस्कृति और कला के जरिए भारत और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के बीच सांस्कृतिक संवाद और समन्वय पर चर्चा की गई।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के. श्रीनिवास आईएएस, मुख्य वक्ता मुकुल कानिटकर, विशिष्ट अतिथि डॉ. राजेश रंजन, विश्व रंग के निदेशक डॉ. संतोष चौबे और नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी समेत कई गणमान्य लोग शामिल हुए।विश्व रंग 2026 में देश के केरल, त्रिपुरा, जम्मू-कश्मीर, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और झारखंड समेत विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों के अलावा श्रीलंका, सिंगापुर, यूनान, मलेशिया, म्यांमार और वियतनाम समेत करीब 60 देशों के डेलीगेट शामिल हुए।
कार्यक्रम में भारतीय भाषाओं, नॉर्थ ईस्ट की भाषाओं और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ भाषाई एवं सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय में विश्व रंग का आयोजन होना महत्वपूर्ण अवसर है। नालंदा आज भारतीय ज्ञान परंपरा के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर भाषाओं और संस्कृति के संवाद का केंद्र बन रहा है।
विश्व रंग के निदेशक डॉ. संतोष चौबे ने कहा कि विश्व रंग का उद्देश्य भारतीयता, भारतीय सभ्यता, संस्कृति और भाषाओं के वैश्विक प्रभाव को बढ़ाना है। उन्होंने बताया कि विश्व रंग अब तक करीब 70 देशों में अपने चैप्टर खोल चुका है। मॉरीशस और कोलंबो, श्रीलंका के बाद इस बार इसका आयोजन नालंदा विश्वविद्यालय में किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय का दक्षिण-पूर्व एशिया पर ऐतिहासिक प्रभाव रहा है। भाषाओं के माध्यम से सांस्कृतिक समन्वय, आपसी संपर्क और व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में भी इस आयोजन में मंथन किया जा रहा है।दो दिवसीय इस समागम से निकलने वाले विचारों और निष्कर्षों को आगे बढ़ाने की बात भी आयोजकों और वक्ताओं ने कही।
नालंदा से मिथुन कुमार की रिपोर्ट













