भोरे में नगर पंचायत के चयन के बाद खत्म हो जाएगी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना, मजदूरों पर पड़ेगा असर: माले
भोरे प्रखंड अंतर्गत नगर पंचायत को लेकर 20 सूत्री की बैठक में सहमति मिलने के बाद चर्चाओं का बाजार पूरी तरह से गर्म हो चुका है. हालांकि कई जगह इसको लेकर खुशी देखी जा रही है. तो कई जगह लोगों के अंदर मायूसी भी देखी जा रही है.

भोरे प्रखंड अंतर्गत नगर पंचायत को लेकर 20 सूत्री की बैठक में सहमति मिलने के बाद चर्चाओं का बाजार पूरी तरह से गर्म हो चुका है. हालांकि कई जगह इसको लेकर खुशी देखी जा रही है. तो कई जगह लोगों के अंदर मायूसी भी देखी जा रही है. इसी बीच सीपीआईएमएल के नेता सुभाष पटेल ने नगर निकाय के चैन को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है.
उन्होंने साफ कहा है कि ग्रामीण इलाकों में आज भी 60% की आबादी को यह नहीं मालूम है कि आखिर नगर निकाय से फायदा क्या है और नुकसान क्या है. सबसे पहले भोरे प्रखंड अंतर्गत जिन गांवो का चयन किया गया है नगर पंचायत में जोड़ने के लिए उनमे भोरे प्रखंड का भोरे.बेलवा मिश्र , लच्छीचक ,बसदेवा ,संसारपुर ,नारूचकरवा ,सिधवा ,ईमिलिया ,मिश्रौली ,खजुरहा ,खजुरहा पाण्डेय , चकिया ,खदही ,पाण्डेय टोला , टोला बालशुक्ल, बनिया छापर को शामिल किया गया है.
हालांकि इन चार पंचायत के अंदर जो गांव चयनित किए गए हैं, उनमें ऐसे कई गांव है जहां आज भी खेतीहर मजदूर. और मनरेगा में जॉब कर अपनी जीविका पार्जन चलाते हैं. नगर निकाय का चयन होने के बाद सबसे बड़ा धक्का उन गरीब मजदूरों पर पड़ेगा. जिसे सरकार की महत्वाकांक्षी योजना मनरेगा क़े बदौलत उनका जीविका पार्जन चलता है.
नगर पंचायत में रहने के क्या है फायदे
बेहतर बुनियादी ढांचा:
पक्की सड़कें, नालियां, रोड लाइट (स्ट्रीट लाइट) और कचरा प्रबंधन की व्यवस्था तेजी से सुधरती है।सफाई व्यवस्था: घर-घर से कचरा उठाने की सुविधा मिलती है.
सरकारी योजनाएं:
शहरी विकास योजनाओं (जैसे प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी, राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन) का सीधा लाभ मिलता है।विकास फंड: नगर पंचायत को केंद्र और राज्य सरकार से शहरी निकाय के रूप में अलग से विकास बजट आवंटित होता है।
व्यापारिक संभावनाएं:
क्षेत्र का तेजी से शहरीकरण होने से जमीन के दाम बढ़ते हैं और व्यापार/दुकानदारी के नए अवसर पैदा होते हैं।
नगर पंचायत में रहने के क्या है नुकसान
टैक्स का बोझ: ग्राम पंचायत में जहां कर न के बराबर होते हैं, वहीं नगर पंचायत बनते ही कई तरह के स्थानीय टैक्स लागू हो जाते हैं।
मनरेगा योजना का बंद होना: ग्रामीण क्षेत्र से शहरी क्षेत्र में आने के बाद मनरेगा के तहत मिलने वाला 100 दिनों का रोजगार बंद हो जाता है।
सख्त निर्माण नियम: बिना नक्शा पास कराए या नियमों का पालन किए मकान या व्यावसायिक दुकान बनाना गैर-कानूनी हो जाता है।
कृषि पर असर: जमीन का लैंड-यूज़ बदलने से कृषि गतिविधियों पर शहरी नियम और पाबंदियां लागू होने लगती हैं।
नगर पंचायत में लगने वाले प्रमुख टैक्स
टैक्स/शुल्क का प्रकार विवरण
होल्डिंग/प्रॉपर्टी टैक्स आवासीय और व्यावसायिक मकानों व भूखंडों पर वार्षिक दर से लागू।
सफाई व कचरा शुल्क घर-घर से कचरा उठाने और सार्वजनिक सफाई के बदले लिया जाने वाला मासिक शुल्क।
जल कर यदि नगर पंचायत द्वारा पाइपलाइन से जलापूर्ति की सुविधा दी जा रही है। लाइटिंग टैक्स सड़कों पर प्रकाश व्यवस्था बनाए रखने के लिए वसूला जाने वाला शुल्क (यह अक्सर प्रॉपर्टी टैक्स में ही शामिल रहता है)। ट्रेड लाइसेंस शुल्क क्षेत्र में कोई भी दुकान, कारोबार या उद्योग चलाने के लिए अनिवार्य लाइसेंस फीस।
नक्शा पास कराने का शुल्क नया मकान या बिल्डिंग बनाने से पहले बोर्ड से नक्शा स्वीकृत कराने का शुल्क।
विज्ञापन/होर्डिंग शुल्क व्यावसायिक बोर्ड, बैनर या होर्डिंग लगाने पर कारोबारियों से लिया जायेगा टैक्स।
गोपालगंज से कुमार प्रदीप की रिपोर्ट










