पटना: विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के संस्थापक और बिहार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने विवादास्पद बयान दिया है। सहनी ने कहा कि अगर उनका एक खून माफ होता तो वह सबसे पहले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को गोली मार देते। सहनी ने यह बातें गुरूवार को राजधानी में एयरपोर्ट पर कही।
दरअसल गुरूवार को मुकेश सहनी एयरपोर्ट पर मीडिया कर्मियों से बातें कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के संबंध में पूछे गए एक सवाल के जवाब में यह बात कही। उनका कहना था कि चुनाव आयोग, बीजेपी का चुनाव आयोग बन चुका है। सीइसी को शर्म करना चाहिए। सब दिन एक समान नहीं होते हैं। हम संविधान को मानने वाले लोग हैं। लोकतंत्र और संविधान से खिलवाड़ करने वालों को आने वाले समय में जनता जवाब देगी। सहनी ने चुनाव आयोग पर पक्षपात के आरोप लगाते हुए चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग भाजपा का आयोग बन चुका है।
सहनी ने जमुई और समस्तीपुर में नाबालिग लड़कियों के साथ कथित दुर्व्यवहार की घटनाओं को बेहद निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं से बिहार ही नहीं, पूरा देश शर्मसार हुआ है। सरकार को अब दूसरों पर सवाल उठाने के बजाय अपने गिरेबान में झांकने की जरूरत है। पटना में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि इन घटनाओं में शामिल लोगों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
सहनी ने कहा कि बिहार में बेरोजगारी और शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य तक कई गंभीर समस्याएं हैं। कहीं सरकारी स्कूल बंद किए जा रहे हैं तो कहीं अस्पतालों की स्थिति खराब है, लेकिन सरकार इन मूल सवालों पर ध्यान देने के बजाय अपनी वाहवाही में लगी है। उन्होंने कहा कि जब सरकार जनता की वास्तविक समस्याओं से मुंह मोड़ेगी तो समाज में अराजकता बढ़ेगी। बिहार में बाढ़ की स्थिति का जिक्र करते हुए सहनी ने कहा कि लोग डूब रहे हैं, मर रहे हैं और भूख की समस्या से जूझ रहे हैं, जबकि सरकार और उसके नेता जश्न में व्यस्त हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर हुए आयोजनों को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि जनता की परेशानियों के बीच सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल राजनीतिक प्रचार के लिए किया गया।
उन्होंने बिहार सरकार की चुनावी घोषणाओं पर भी सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के अंतिम समय में महिलाओं के खातों में पैसे डालने और मुफ्त बिजली जैसी घोषणाओं के जरिए जनता को प्रभावित करने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता को इन मुद्दों को समझना होगा और आने वाले समय में अपने अधिकारों के लिए जागरूक होना होगा। उन्होंने कानून-व्यवस्था को लेकर कहा कि बिहार में अपराधियों के भीतर पुलिस-प्रशासन का भय नहीं रह गया है। सहनी ने उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां पुलिस कार्रवाई करती दिखाई देती है, जबकि बिहार में पुलिस के सोने जैसी स्थिति है। उन्होंने आरोप लगाया कि जाति देखकर कार्रवाई या न्याय करने की प्रवृत्ति लोकतंत्र और कानून के लिए ठीक नहीं है।
शराबबंदी पर चर्चा करते हुए सहनी ने कहा कि यदि सरकार शराब की बिक्री शुरू करने का फैसला करती है तो इसके दूरगामी परिणामों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी और अपराध की समस्या को केवल कानून बनाकर नहीं, बल्कि रोजगार, शिक्षा और बेहतर प्रशासन के जरिए दूर किया जा सकता है। सहनी ने कहा कि लोकतंत्र में अंतिम शक्ति जनता के पास होती है। जनता काम नहीं करने वाली सरकार को सत्ता से बाहर कर सकती है। उन्होंने कहा कि बिहार और देश की जनता को अब जागरूक होकर अपने अधिकारों और संविधान की रक्षा के लिए आगे आना होगा।