अब स्कूलों में मासिक धर्म से जुड़ी सुविधाएं अनिवार्य, मुफ्त सैनिटरी पैड न देने पर रद्द होगी मान्यता

अब स्कूलों में मासिक धर्म से जुड़ी सुविधाएं अनिवार्य, मुफ्त सैनिटरी पैड न देने पर रद्द होगी मान्यता

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Urvashi
Updated at : Jan 30, 2026, 3:43:00 PM

सुप्रीम कोर्ट ने आज सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आदेश दिया कि वे सुनिश्चित करें कि सरकारी और निजी स्कूलों में लड़कियों को बायो-डिग्रेडेबल सैनिटरी पैड मुफ्त में उपलब्ध कराए जाएं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मासिक धर्म से जुड़ी सेहत का अधिकार संविधान के तहत जीवन के मूल अधिकार का हिस्सा है।

न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और आर. महादेवन की बेंच ने निर्देश दिया कि सभी स्कूलों में लड़कियों और लड़कों के लिए अलग-अलग शौचालय की सुविधा होना अनिवार्य है। इसके अलावा, स्कूलों में दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए भी उपयुक्त टॉयलेट का प्रबंध करना होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर निजी स्कूल इन आवश्यक सुविधाओं को उपलब्ध कराने में विफल रहते हैं, तो उनकी मान्यता रद्द की जा सकती है। साथ ही, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारें भी लड़कियों को सुरक्षित टॉयलेट और मुफ्त सैनिटरी पैड मुहैया कराने में असफल रहने की स्थिति में जिम्मेदार ठहराई जाएंगी।

यह आदेश जया ठाकुर द्वारा 10 दिसंबर 2024 को दायर जनहित याचिका (PIL) पर आधारित है, जिसमें क्लास 6 से 12 तक की किशोरी लड़कियों के लिए सरकार और सरकारी सहायता वाले स्कूलों में 'स्कूल जाने वाली लड़कियों के लिए मासिक धर्म स्वच्छता नीति' को पूरे देश में लागू करने की मांग की गई थी।

कोर्ट ने कहा कि यह पहल न केवल लड़कियों के स्वास्थ्य की सुरक्षा करेगी, बल्कि उनकी शिक्षा में निरंतरता और सामाजिक समानता को भी सुनिश्चित करेगी।