CWC की बैठक में खड़गे ने कहा- 'जिनके नाम कटे, उनके बारे में हमें बताओ'

कांग्रेस की सबसे बड़ी नीति निर्धारक इकाई कांग्रेस वर्किंग कमेटी की आज यानी 29 सितंबर को बैठक हुई। बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल रहे।

नई दिल्ली : कांग्रेस की सबसे बड़ी नीति निर्धारक इकाई कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की आज यानी 29 सितंबर को बैठक हुई। बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल रहे। बैठक में भूपेश बघेल, केसी वेणुगोपाल, मुकुल वासनिक, अंबिका सोनी और कुमारी शैलजा समेत कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य मौजूद रहे। कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भी बैठक में बुलाया गया है। 

CWC की बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने SIR व मतदाता सूचियों को लेकर चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए

कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मतदाता सूचियों को लेकर चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। खड़गे ने कहा कि मोदी सरकार देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूत नींव को कमजोर कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि साजिश के तहत मतदाता सूचियों से नाम हटाए जा रहे हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार मोदी सरकार की 'कठपुतली' बन गए हैं।

खड़गे ने कहा- लोकतंत्र की मजबूत नींव को 12 साल में खोखला किया

मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि उनके पूर्वजों ने त्याग और बलिदान से देश में मजबूत लोकतांत्रिक व्यवस्था की नींव रखी थी। उनके मुताबिक, मोदी सरकार ने पिछले 12 वर्षों में इस नींव को 'षड्यंत्रकारी तरीके से खोखला' किया है। उन्होंने संविधान सभा में डॉ. भीमराव आंबेडकर के मताधिकार संबंधी विचारों का हवाला देते हुए कहा कि किसी योग्य नागरिक को किसी अधिकारी की मनमर्जी या स्थानीय प्रशासन के पूर्वाग्रह के आधार पर मतदाता सूची से बाहर नहीं किया जाना चाहिए।

CEC पर देश कैसे भरोसा करे? - कांग्रेस अध्यक्ष

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि संविधान ने चुनाव आयोग को जनता के वोट का 'चौकीदार' बनाया, लेकिन आज वही संस्था सवालों के घेरे में है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के दो आयुक्तों ने मुख्य चुनाव आयुक्त की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। खड़गे ने कहा कि ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जिस मुख्य चुनाव आयुक्त पर उनके सहयोगी भरोसा नहीं कर रहे, उस पर देश कैसे भरोसा करे। हालांकि, चुनाव आयोग ने कहा है कि एसआईआर से जुड़े आदेश तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से जारी किए गए थे। आयोग ने फॉर्म-6 को लेकर भी कहा है कि मूल फॉर्म में बदलाव नहीं किया गया, बल्कि एसआईआर के तहत अतिरिक्त घोषणा संबंधी प्रावधान जोड़ा गया था।