कोल्हान में नक्सलियों पर बड़ा प्रहार, 10 लाख के इनामी समेत 4 ने डाले हथियार

कोल्हान में नक्सलियों पर बड़ा प्रहार, 10 लाख के इनामी समेत 4 ने डाले हथियार

पश्चिमी सिंहभूम में चल रहे नक्सल विरोधी अभियानों के बीच सुरक्षा बलों को एक और बड़ी कामयाबी मिली है। पुलिस के अनुसार, कोल्हान, पोराहाट और सारंडा के जंगलों में सक्रिय प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) संगठन से जुड़े चार सदस्यों ने मंगलवार को पुलिस और सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण किया। इनमें 10 लाख रुपये का इनामी जोनल कमेटी सदस्य सालुका कायम भी शामिल है।

पुलिस के मुताबिक, यह कार्रवाई ऑपरेशन नवजीवन-III के तहत हुई। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों ने सुरक्षा बलों को हथियारों के साथ बड़ी संख्या में कारतूस भी सौंपे हैं। अधिकारियों का दावा है कि लगातार चल रहे अभियानों और आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के कारण संगठन पर दबाव बढ़ा है।

96 मामलों वाला इनामी नक्सली भी मुख्यधारा में लौटा

आत्मसमर्पण करने वालों में सबसे प्रमुख नाम सालुका कायम उर्फ भुवनेश्वर का है। पुलिस के अनुसार वह माओवादी संगठन की जोनल कमेटी में सक्रिय था और उसके सिर पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित था। उसके खिलाफ पश्चिमी सिंहभूम के अलग-अलग थानों में 90 और सरायकेला जिले में छह मामले दर्ज हैं। यानी पुलिस रिकॉर्ड में उसके खिलाफ कुल 96 मामलों का उल्लेख है।

सालुका ने आत्मसमर्पण के दौरान एक AK-47 राइफल, दो मैगजीन और 843 राउंड गोलियां समेत अन्य सामान सुरक्षा बलों को सौंपा।

तीन अन्य सदस्यों ने भी छोड़ा संगठन

सालुका के अलावा कोदोमुनी कोड़ा उर्फ कोदम मुन्नी कोड़ा उर्फ कितामाई, पिंकी पूर्ति उर्फ सुकांती पूर्ति उर्फ मेचो पूर्ति और अनिता तामसोय उर्फ अनिता कायम उर्फ मुक्ता उर्फ नूनी ने भी हथियार छोड़ने का फैसला किया।

पुलिस के मुताबिक, टोंटो थाना क्षेत्र के रेंगड़ाहातु निवासी कोदोमुनी कोड़ा संगठन में दस्ता सदस्य के रूप में काम करता था। उसके खिलाफ चाईबासा में सात मामले दर्ज हैं और उस पर एक लाख रुपये का इनाम था। उसने एक वायरलेस सेट और 697 राउंड कारतूस जमा किए।

पिंकी पूर्ति भी माओवादी दस्ते का हिस्सा थी। पुलिस के अनुसार, उसके खिलाफ चाईबासा में 13 मामले दर्ज हैं। आत्मसमर्पण के दौरान उसके पास से एक वायरलेस सेट और 639 राउंड गोलियां मिलीं। वहीं अनिता तामसोय के खिलाफ चाईबासा में 12 और सरायकेला में एक मामला दर्ज होने की जानकारी पुलिस ने दी है। उसके पास से एक इंसास राइफल, पांच मैगजीन और 97 राउंड कारतूस सहित अन्य सामग्री बरामद हुई।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इन आत्मसमर्पणों के पीछे केवल सुरक्षा अभियानों का दबाव ही नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में चलाए जा रहे सामुदायिक पुलिसिंग कार्यक्रमों की भी भूमिका रही है। एसडीपीओ चक्रधरपुर डॉ. सयैद मुस्तफा हाशमी की पहल पर सालुका के प्रभाव वाले इलाकों में स्वास्थ्य शिविर लगाए गए थे। पुलिस का दावा है कि इससे ग्रामीणों का सुरक्षा बलों पर भरोसा बढ़ा। अनिता तामसोय के आत्मसमर्पण के संबंध में पुलिस ने क्षेत्र में लगातार चलाए गए अभियानों और राज्य सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति को भी महत्वपूर्ण कारक बताया है।

नवजीवन अभियान के तीन चरणों में बढ़े आत्मसमर्पण

पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, पश्चिमी सिंहभूम में आत्मसमर्पण का सिलसिला पिछले कुछ समय से लगातार जारी है। वर्ष 2025 में 10 नक्सलियों ने हथियार छोड़े थे।

इसके बाद ऑपरेशन नवजीवन-I के तहत 21 मई 2026 को 25 नक्सली कमांडर और दस्ता सदस्यों ने आत्मसमर्पण किया था। पुलिस के अनुसार, इस दौरान 16 हथियार और 3,082 राउंड गोलियां जमा कराई गई थीं।

वहीं, 28 जुलाई को ऑपरेशन नवजीवन-II के दौरान 14 नक्सली कमांडर और दस्ता सदस्यों ने आत्मसमर्पण किया था। उनके कब्जे से 10 हथियार और 1,412 गोलियां मिलने का दावा पुलिस ने किया था।

पुलिस के मुताबिक, वर्ष 2025 से जुलाई 2026 तक पश्चिमी सिंहभूम में कुल 49 नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं। इसी अवधि में 22 नक्सलियों के मुठभेड़ में मारे जाने और 60 के गिरफ्तार किए जाने का भी पुलिस ने दावा किया है।

सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, जंगलों में लगातार अभियान, नक्सलियों की गिरफ्तारी, आत्मसमर्पण और सुरक्षा बलों की बढ़ती मौजूदगी का असर अब क्षेत्र में दिखाई देने लगा है। पुलिस का कहना है कि राज्य की पुनर्वास नीति हिंसा छोड़कर सामान्य जीवन में लौटने वाले नक्सलियों के लिए नया अवसर उपलब्ध करा रही है।

अधिकारियों के मुताबिक कोल्हान क्षेत्र में माओवादी संगठन पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है। सुरक्षा बलों का लक्ष्य इलाके में नक्सली गतिविधियों को पूरी तरह समाप्त कर प्रभावित क्षेत्रों को हिंसा से मुक्त करना है।