ग्रेच्युटी पर बदले नियम! टाटा स्टील कर्मचारियों को अब 20 लाख से ऊपर की राशि पर ही देना होगा टैक्स

ग्रेच्युटी पर बदले नियम! टाटा स्टील कर्मचारियों को अब 20 लाख से ऊपर की राशि पर ही देना होगा टैक्स

टाटा स्टील के कर्मचारियों के लिए सेवानिवृत्ति लाभ से जुड़ी एक अहम नीति में बदलाव सामने आया है, जिसका सीधा असर ग्रेच्युटी पर पड़ेगा। नए श्रम प्रावधानों के तहत अब पूरी ग्रेच्युटी राशि कर-मुक्त नहीं रहेगी। सरकार द्वारा निर्धारित सीमा से अधिक मिलने वाली रकम पर आयकर लागू किया जाएगा।

ताजा नियमों के अनुसार, कर्मचारियों को अधिकतम 20 लाख रुपये तक की ग्रेच्युटी पर ही कर छूट का लाभ मिलेगा। यदि किसी कर्मचारी को इससे अधिक राशि मिलती है, तो अतिरिक्त हिस्से को टैक्स के दायरे में लाया जाएगा। इस बदलाव ने कर्मचारियों और यूनियन के बीच नई चर्चा को जन्म दिया है।

यह परिवर्तन केंद्र सरकार द्वारा लागू किए जा रहे चार नए श्रम कानूनों का हिस्सा है, जिन्हें 1 अप्रैल से प्रभावी किया जाना है। इन कानूनों में वेतन संहिता (Wage Code), औद्योगिक संबंध संहिता (Industrial Relations Code) और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यस्थल स्थिति संहिता (Occupational Health and Safety Code) जैसे प्रावधान शामिल हैं। इन सुधारों के चलते ग्रेच्युटी से जुड़े नियमों में भी बदलाव दिखाई दे रहा है।

इस मुद्दे पर टाटा वर्कर्स यूनियन ने असहमति जताई है। यूनियन का कहना है कि कर्मचारी दशकों तक सेवा देते हैं और ग्रेच्युटी में उनका योगदान भी शामिल होता है, इसलिए पूरी राशि को कर-मुक्त रखा जाना चाहिए, भले ही वह 20 लाख से अधिक हो।

हालांकि, केंद्रीय श्रम मंत्रालय ने इस मांग पर स्पष्ट रुख अपनाया है। मंत्रालय के अनुसार, संबंधित प्रावधान संसद द्वारा पारित किए जा चुके हैं, इसलिए फिलहाल इनमें बदलाव संभव नहीं है। हालांकि, भविष्य में नियमों की समीक्षा की संभावना से इनकार नहीं किया गया है।

इसी विषय को लेकर हाल ही में एक महत्वपूर्ण बैठक भी आयोजित हुई, जिसमें टाटा स्टील प्रबंधन और टाटा वर्कर्स यूनियन के प्रतिनिधियों ने श्रम मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की। बैठक के दौरान श्रम कानूनों और वेज कोड से जुड़े सुझाव मंत्रालय को सौंपे गए। इसमें यूनियन के प्रमुख पदाधिकारी और कंपनी के मानव संसाधन व वित्त विभाग के अधिकारी शामिल हुए।

नए नियम लागू होने के बाद अब कर्मचारियों की नजर सरकार और प्रबंधन के अगले कदम पर टिकी है, खासकर इस बात को लेकर कि भविष्य में ग्रेच्युटी और कर व्यवस्था में किसी तरह की राहत दी जाएगी या नहीं।