खेतों के बीच स्कूल, कच्चे रास्ते से गुजरते नन्हे बच्चे, बिजली भी सुविधा नहीं

स्कूली शिक्षा को लेकर राज्य सरकार और जिला प्रशासन की ओर से हमेशा बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। स्कूलों में बच्चों को बेहतर शिक्षा और तमाम मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात कही जाती है।

बोकारो: स्कूली शिक्षा को लेकर राज्य सरकार और जिला प्रशासन की ओर से हमेशा बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। स्कूलों में बच्चों को बेहतर शिक्षा और तमाम मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात कही जाती है। लेकिन बोकारो के पिंडराजोड़ा क्षेत्र में स्थित नव प्राथमिक विद्यालय वीरटांड, चास -02की तस्वीर इन दावों की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है।

इस स्कूल तक पहुंचना ही बच्चों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। विद्यालय तक जाने वाला रास्ता खेतों के बीच से होकर गुजरता है और छोटे-छोटे बच्चे खेतों के किनारे बने संकरे रास्ते से स्कूल पहुंचते हैं। रास्ते में एक बड़ा कुआं भी है, जिसके किनारे से होकर बच्चों को गुजरना पड़ता है। ऐसे में हर दिन किसी अनहोनी का खतरा बना रहता है।

विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक के अनुसार, स्कूल में आज तक बिजली की सुविधा उपलब्ध नहीं है। वहीं बच्चों के स्कूल आने-जाने के लिए भी कोई पक्की सड़क नहीं है। बरसात के दिनों में कच्चा रास्ता कीचड़ से भर जाता है, जिससे नन्हे बच्चों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। प्रभारी प्रधानाध्यापक ने बताया कि स्कूल तक बिजली पहुंचाने के लिए कई बार संबंधित विभाग को आवेदन दिया गया, लेकिन अब तक आश्वासन के अलावा कोई ठोस पहल नहीं हुई।

वहीं स्कूल के बच्चे भी चाहते हैं कि उन्हें अन्य स्कूलों की तरह मूलभूत सुविधाएं मिलें। बच्चों की मांग है कि विद्यालय में बिजली की व्यवस्था की जाए और स्कूल तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क बनाई जाए, ताकि वे सुरक्षित तरीके से स्कूल आ-जा सकें। अब सवाल यह है कि जब शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, तो आखिर बीरटांड के इन नन्हे बच्चों को मूलभूत सुविधाओं के लिए कब तक इंतजार करना पड़ेगा?


बोकारो से चंदन सिंह की रिपोर्ट