तेज बुखार, शरीर में दर्द, खांसी हो तो क्या करें..कब टेस्ट करवाना चाहिए ? AIIMS के डॉक्टर से जानिए

बदलते मौसम में डेंगू, मलेरिया, स्वाइन फ्लू और टाइफाइड के केस बढ़ रहे हैं। इन सभी बीमारियों में बुखार होता है। इन बीमारियों में तेज बुखार से लेकर शरीर में दर्द और कुछ मरीजों को खांसी के साथ कमजोरी भी हो सकती है।

बदलते मौसम में डेंगू, मलेरिया, स्वाइन फ्लू और टाइफाइड  के केस बढ़ रहे हैं। इन सभी बीमारियों में बुखार होता है। इन बीमारियों में तेज बुखार से लेकर शरीर में दर्द और कुछ मरीजों को खांसी के साथ कमजोरी भी हो सकती है। ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए क्या खुद से दवा लेना चाहिए या डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए। इस बारे में दिल्ली एम्स में मेडिसिन विभाग में प्रोफेसर डॉ. नीरज निश्चल दे रहे हैं सारी जानकारी।  

दिल्ली एम्स में मेडिसिन विभाग में प्रोफेसर डॉ नीरज निश्चल के मुताबिक़ अगर तेज बुखार, शरीर में दर्द, खांसी या कमजोरी हो तो जरूरी है कि सबसे पहले आराम करें, पर्याप्त लिक्विड लें और डॉक्टर से सलाह लें। घर पर ही बुखार की पहले जांच कर लें। बुखार और दर्द के लिए आप पैरासिटामोल ले सकते हैं। लेकिन अगर डेंगू की संभावना लग रही है तो एस्पिरिन, आइबुप्रोफेन और डिक्लोफेनाक लेने से बचें। डॉक्टर की सलाह लेने के बाद ही कोई कदम उठाना चाहिए।

डॉ. नीरज बताते हैं कि बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक शुरू नहीं करने चाहिए। इनको लेने से नुकसान हो सकते हैं। डेंगू में पेट में तेज दर्द, लगातार उल्टी, खून आना, अत्यधिक कमजोरी या बेचैनी, सांस लेने में परेशानी, बेहोशी या बहुत कम पेशाब जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत अस्पताल जाना चाहिए।

दिल्ली एम्स में मेडिसिन विभाग में प्रोफेसर डॉ नीरज निश्चल के मुतबिक हर बुखार में टेस्ट करवाना जरूरी नहीं है। मरीज के लक्षण, बीमारी कब से है, आसपास संक्रमण की स्थिति और रिस्क फैक्टर देखकर डॉक्टर तय करते हैं कि कौन-सी जांच कब जरूरी है। डॉक्टर के अनुसार खुद से अपना इलाज तय न करें और खुद से दवाएं न लें। खासकर दर्द कम करने की दवाएं और एंटीबायोटिक अपनी तरफ से शुरू करना नुकसानदायक हो सकता है। डॉक्टर की सलाह के बिना ऐसा बिलकुल न करें। 

दिल्ली एम्स के डॉक्टर बताते हैं-अगर बुखार तेज है, लगातार बना हुआ है, मरीज हाई रिस्क वाला है या गंभीर लक्षण जैसे उल्टी, चक्कर आना, लगातार तेज बुखार जैसे लक्षण दिख रहे हैं तो इस मामले  में तुरंत डॉक्टरों से सलाह लेनी चाहिए। वह लक्षणों के हिसाब से टेस्ट करेंगे।  समय पर जांच से बीमारी को काबू में किया जा सकता है।