पटना: बिहार सरकार खाद्य प्रसंस्करण के जरिए राज्य में उत्पादित फसलों का मूल्य बढ़ाने का प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में कृषि विभाग ने राज्य में दलहन के प्रसंस्करण, भंडारण और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए दाल प्रसंस्करण इकाई स्थापना योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं। इच्छुक व्यक्ति 15 सितंबर 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। योजना के तहत राज्य में नई दाल मिल इकाइयों की स्थापना के लिए वित्तीय सहायता दी जाएगी। इसके लिए एफपीओ, सीएलएफ, पैक्स, उद्यमी, व्यक्तिगत आवेदक तथा अन्य पंजीकृत संस्थाएं आवेदन कर सकती हैं।
कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा है कि दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन के तहत राज्य सरकार किसानों की आय दोगुनी करने और कृषि में मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। दाल प्रसंस्करण इकाई योजना से न केवल हमारे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलेगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। खाद्य प्रसंस्करण ही कृषि को लाभकारी बनाने का सबसे सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि मैं सभी पात्र एफपीओ, पैक्स और युवा उद्यमियों से अपील करता हूं कि इस योजना का लाभ उठाकर बिहार को दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में सहयोग करें।
कृषि मंत्री ने बताया कि इस योजना के तहत परियोजना लागत का 33 प्रतिशत अथवा अधिकतम 25 लाख रुपये (जो कम हो) तक अनुदान दिया जाएगा। यह सहायता प्लांट एवं मशीनरी, भवन, वेयरहाउस तथा भंडारण अवसंरचना के निर्माण के लिए उपलब्ध होगी। भवन एवं भंडारण अवसंरचना पर अनुदान की राशि कुल पात्र अनुदान का अधिकतम 30 प्रतिशत तक सीमित रहेगी। भूमि खरीद, बिजली कनेक्शन, मानव संसाधन तथा अन्य संचालन व्यय पर अनुदान का प्रावधान नहीं है।
कृषि मंत्री ने जानकारी दी कि नई दाल प्रसंस्करण इकाई की न्यूनतम क्षमता 300 किलोग्राम प्रति घंटा निर्धारित की गई है। इकाई में बीआईएस मानक की मशीनरी तथा एफएसएसएआई लाइसेंस अनिवार्य होगा। परियोजना को कम से कम तीन वर्ष तक संचालित एवं रखरखाव करना होगा। अनुदान की राशि लाभार्थी के खाते में डीबीटी के माध्यम से भेजी जाएगी। यह योजना पटना, नालंदा, औरंगाबाद, मुजफ्फरपुर, लखीसराय, सुपौल, भागलपुर, सीतामढ़ी, जहानाबाद और गया जिलों में लागू की गई है।
उर्वरक के मामले में उनका कहना था कि राज्य में उर्वरकों की पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता है। राज्य के किसी भी जिले में उर्वरक की कोई कमी नहीं है तथा सभी जिलों में किसानों की आवश्यकता के अनुरूप पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने किसानों से अपील की कि उर्वरक की उपलब्धता को लेकर किसी भी प्रकार की भ्रामक अथवा अपुष्ट खबरों पर ध्यान न दें और अफवाहों से विचलित न हों।