400 योजनाओं पर ब्रेक, कार्यपालक पदाधिकारी ने फंड की कमी का दिया हवाला, सभापति-विधायक की खींचतान में क्यों पिसेगी आम जनता ?

बिहार के हाजीपुर से विकास को लेकर एक बड़ा सवाल सामने आया है। करीब 400 स्वीकृत योजनाएं लंबित हैं और इन योजनाओं के अटकने से शहर के विकास पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

हाजीपुर : बिहार के हाजीपुर से विकास को लेकर एक बड़ा सवाल सामने आया है। करीब 400 स्वीकृत योजनाएं लंबित हैं और इन योजनाओं के अटकने से शहर के विकास पर सवाल खड़े हो रहे हैं। आखिर जिन योजनाओं से वार्डों की तस्वीर बदलने की उम्मीद थी वे फाइलों और पोर्टल के बीच क्यों अटक गईं। क्या नगर परिषद के पास फंड की कमी है, या फिर इन योजनाओं के पीछे कोई दूसरी प्रशासनिक अड़चन है।

हाजीपुर नगर परिषद की साधारण बोर्ड बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हुई

हाजीपुर नगर परिषद की साधारण बोर्ड बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हुई। अब सवाल सिर्फ योजनाओं के लंबित होने का नहीं, बल्कि उन लोगों की उम्मीदों का भी है, जिन्हें इन विकास कार्यों का इंतजार है। हाजीपुर नगर परिषद की साधारण बोर्ड और चर्चा के केंद्र में रहीं करीब 400 स्वीकृत योजनाएं को लेकर बैठक हुई। जानकारी के मुताबिक, इन योजनाओं में कई ऐसी योजनाएं भी शामिल हैं, जिनका उद्देश्य अलग-अलग वार्डों के बीच संपर्क बेहतर करना और स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को आगे बढ़ाना था।

कई योजनाएं सहयोग पोर्टल के माध्यम से लंबित हैं

बताया जा रहा है कि इनमें से कई योजनाएं सहयोग पोर्टल के माध्यम से लंबित हैं। इन योजनाओं को स्थानीय विधायक और नगर परिषद की सभापति की ओर से दिए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, योजनावार आधिकारिक विवरण और उन्हें लंबित किए जाने के कारणों की पुष्टि जरूरी है। नगर परिषद की बैठक में इन योजनाओं के बाधित होने के कारणों पर विचार-विमर्श किया गया। सामने आई जानकारी के अनुसार, नगर परिषद में फंड की कमी को योजनाओं के लंबित रहने की एक प्रमुख वजह बताया जा रहा है। फिलहाल अगले आदेश तक इन योजनाओं को लंबित रखे जाने की बात कही जा रही है।

इन विकास कार्यों के शुरू होने का इंतजार कर रहे आम लोगों को राहत कब मिलेगी

लेकिन यहीं से सबसे बड़ा सवाल शुरू होता है। अगर फंड की कमी ही वजह है तो क्या नगर परिषद के पास इन योजनाओं को पूरा करने के लिए कोई ठोस वित्तीय योजना है। क्या इन योजनाओं के लिए आवंटन की व्यवस्था की जा रही है। सबसे अहम सवाल यह है कि इन विकास कार्यों के शुरू होने का इंतजार कर रहे आम लोगों को राहत कब मिलेगी। क्योंकि नगर परिषद की योजनाएं सिर्फ कागजों पर दर्ज आंकड़े नहीं होतीं। इनका सीधा संबंध शहर की सड़कों, गलियों, संपर्क मार्गों और नागरिक सुविधाओं से हो सकता है। जब विकास कार्य लंबित होते हैं, तो उसका असर उन लोगों की उम्मीदों पर पड़ता है, जो बेहतर बुनियादी सुविधाओं की आस लगाए बैठे हैं।

क्या प्रशासनिक प्रक्रिया में कोई समस्या है?

इस पूरे मामले में एक और अहम पहलू है। जनप्रतिनिधियों और नगर परिषद की जवाबदेही। यदि योजनाएं स्वीकृत थीं, तो उनके क्रियान्वयन की राह में बाधा कहां आई? क्या बजट का आकलन पहले नहीं किया गया था? क्या प्रशासनिक प्रक्रिया में कोई समस्या है? या फिर पोर्टल पर लंबित होने के पीछे कोई तकनीकी अथवा अन्य कारण है? इन सवालों का जवाब आधिकारिक दस्तावेजों और संबंधित अधिकारियों के बयान से ही स्पष्ट हो सकेगा।

केवल योजनाओं के लंबित होने के आधार पर राजनीतिक खींचतान या कमीशनखोरी का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा

फिलहाल, केवल योजनाओं के लंबित होने के आधार पर राजनीतिक खींचतान या कमीशनखोरी का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। लेकिन जनता को यह जानने का पूरा हक है कि स्वीकृत योजनाओं की मौजूदा स्थिति क्या है, उन्हें रोकने की वजह क्या है और उन्हें पूरा करने की समय-सीमा क्या होगी। हाजीपुर की जनता के लिए अब सबसे बड़ा सवाल यही है—विकास की इन योजनाओं पर लगी रोक कब हटेगी?

फंड की कमी है, तो उसका समाधान क्या है?

फंड की कमी है, तो उसका समाधान क्या है? योजनाएं लंबित हैं, तो उन्हें पूरा करने की समय-सीमा क्या है? और इन योजनाओं से जुड़ी उम्मीदों का जवाब कौन देगा? जनता को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप नहीं, विकास कार्यों की स्पष्ट स्थिति और समय पर काम पूरा होने की गारंटी चाहिए। अब देखना होगा कि हाजीपुर नगर परिषद इन सवालों पर क्या जवाब देती है और करीब चार सौ लंबित योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए क्या कदम उठाती है।

वैशाली से संतोष कुमार सिंह की रिपोर्ट