शादीशुदा प्रेमिका से मिलने पहुंचे प्रेमी की ग्रामीणों ने कराई शादी, आपत्तिजनक स्थिति में...

बिहार के समस्तीपुर में कर्पूरीग्राम थाना क्षेत्र के सिंघिया खुर्द गांव में एक शादीशुदा युवक अपनी शादीशुदा प्रेमिका से मिलने पहुंचा। दोनों को गांव वालों ने आपत्तिजनक स्थिति में पकड़ लिया। महिला के पति की मौजूदगी में प्रेमी-प्रेमिका की शादी करा दी गई।

बिहार के समस्तीपुर जिले में रिश्तों से जुड़ा एक अनोखा मामला सामने आया है। कर्पूरीग्राम थाना क्षेत्र के सिंघिया खुर्द गांव में शनिवार देर रात एक शादीशुदा युवक अपनी शादीशुदा प्रेमिका से मिलने पहुंचा। दोनों को गांव वालों ने आपत्तिजनक स्थिति में पकड़ लिया। इसके बाद पंचायत बुलाई गई और महिला के पति की मौजूदगी में प्रेमी-प्रेमिका की शादी करा दी गई।

जानकारी के अनुसार, खगड़िया निवासी अनुराधा कुमारी ने करीब डेढ़ वर्ष पहले सिंघिया खुर्द स्थित एक एएनएम कॉलेज में दाखिला लिया था। पढ़ाई के दौरान कॉलेज के स्टाफ मनोहर कुमार से उसका प्रेम संबंध हुआ और लगभग छह महीने पहले दोनों ने प्रेम विवाह कर लिया। मनोहर पहले से शादीशुदा है और उसके दो बच्चे हैं।

बताया जाता है कि अनुराधा का मनोहर से विवाह से पहले ताजपुर थाना क्षेत्र के चक पहाड़ निवासी पन्नालाल यादव से प्रेम संबंध था। पन्नालाल भी शादीशुदा है और दो बच्चों का पिता है। विवाह के बाद भी दोनों के बीच बातचीत और मुलाकात का सिलसिला जारी रहा।

शनिवार रात पन्नालाल अनुराधा से मिलने सिंघिया खुर्द पहुंचा था। इसी दौरान ग्रामीणों ने दोनों को पकड़ लिया। घटना के बाद गांव में पंचायत हुई, जिसमें दोनों की शादी कराने का निर्णय लिया गया। पंचायत के फैसले के बाद अनुराधा के पति मनोहर कुमार की मौजूदगी में अनुराधा और पन्नालाल की शादी करा दी गई।

पन्नालाल ने बताया कि करीब दस वर्ष पहले वह खगड़िया में एक स्कूल में शिक्षक था, जहां अनुराधा पढ़ती थी। वहीं दोनों के बीच जान-पहचान और प्रेम संबंध शुरू हुआ था। बाद में दोनों अलग हो गए और अपनी-अपनी शादी हो गई। जब अनुराधा ने समस्तीपुर के एएनएम कॉलेज में दाखिला लिया तो दोनों की फिर से बातचीत शुरू हुई और संपर्क लगातार बना रहा।

हालांकि, इस पूरे मामले में यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों की पहले से मौजूद शादियों का कानूनी रूप से क्या हुआ। भारतीय कानून के अनुसार, पहली शादी वैध रहते हुए दूसरी शादी करना कानूनी जटिलताओं का विषय हो सकता है। ऐसे मामलों में पंचायत का फैसला कानूनी प्रक्रिया का विकल्प नहीं होता। मामले में पुलिस या प्रशासन की ओर से किसी कानूनी कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है।

अनूप नारायण सिंह