नदियां उफान पर, डूबने लगे खेत-खलियान, सांसद खुद DM-SP के साथ उतरे पानी में..

झारखंड में लगातार हो रही बारिश से नालंदा की कई नदियां उफान पर हैं। खुद नालंदा सांसद कौशलेंद्र एडीएम एवं जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर मोटरबोट के सहारे जलमग्न इलाके का निरीक्षण किया।

झारखंड में लगातार हो रही बारिश से नालंदा की कई नदियां उफान पर हैं। खुद नालंदा सांसद कौशलेंद्र एडीएम एवं जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर मोटरबोट के सहारे जलमग्न इलाके का निरीक्षण किया। अस्थावां के ओंदा पंचायत के नेरूत और बिंद के उतरथू पंचायत में करीब 1200 एकड़ धान की फसल पूरी तरह से जलमग्न हो गई है। 

नेरूत में जीराइन नदी का तटबंध टूटने से सैकड़ों एकड़ खेत पानी में डूब गए हैं और इलाके में बाढ़ जैसे हालात की आशंका बनी हैं। जबकि उतरथू गांव के पास तटबंध में आई दरार को बांध दिया गया है। वहीं नेरूत में टूटे हुए तटबंध की मरम्मति का काम युद्धस्तर पर चल रहा है। जीराइन नदी का जलस्तर बढ़ने से तटबंध टूटने के कारण गोंगचक,नेरूत खंधा जबकि गोविंदपुर खाजे अहमदपुर के खेत प्रभावित हो रहे है। हालांकि राहत की बात है यह कि जिले की कई नदियां खतरे के निशान से नीचे है।

नालंदा सांसद कौशलेंद्र कुमार ने डीएम, एसपी और एडीएम के साथ मोटर बोट से प्रभावित इलाकों का निरीक्षण किया। टूटे तटबंध की मरम्मत युद्धस्तर पर कराई जा रही है। प्रशासन के मुताबिक गोइठवा, पैमार, पंचाने, जीराइन, सोइयवा और कुम्हरी नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से फिलहाल नीचे है।

सांसद ने कहा कि अगले दो दिनों में पानी घटा तो धान की फसल बचाई जा सकती है। वहीं, किसान आशंकित हैं कि अगर जलस्तर नहीं घटा तो महीनों की मेहनत और पूरी फसल बर्बाद हो जाएगी। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है।

वहीं जिलाधिकारी ने संबंधित अंचल एवं प्रखंड प्रशासन को निर्देश दिया कि बाढ़ प्रभावित आबादी तक सूखा राशन, सुरक्षित पेयजल, आवश्यक दवाइयां एवं अन्य जरूरी राहत सामग्री की उपलब्धता तत्काल सुनिश्चित की जाए।जरूरतमंद परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाने में किसी भी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए।

नालंदा से मिथुन कुमार की रिपोर्ट