मधेपुरा जिले में ऐतिहासिक विद्यालयों के नाम बदले जाने तथा दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कथित पुलिस लाठीचार्ज के विरोध में बुधवार को महागठबंधन के बैनर तले जोरदार विरोध-प्रदर्शन किया गया। कार्यकर्ताओं ने शहर में आक्रोश मार्च निकालकर केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। वहीं नीट समेत प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के विरोध का असर नेपाल औऱ उतर प्रदेश की सीमा पर स्थित बगहा में भी दिखा। जहां छात्रों औऱ युवाओं नें पैदल मार्च क़र केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की मांग की।
बगहा में छात्रों औऱ युवाओं नें पैदल मार्च क़र केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की मांग की। देशभर में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं, खासकर नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक के विरोध की लहर अब बगहा तक पहुंच गई है। बुधवार की देर शाम सैकड़ों लोगों ने अंबेडकर प्रतिमा से शास्त्रीनगर स्थित गांधी चौक तक करीब चार किलोमीटर लंबा शांतिपूर्ण पैदल मार्च किया। इस दौरान गोरखपुर-बेतिया मुख्य सड़क NH 727 पर जुलूस निकालकर अपना आक्रोश जताया गया।
छात्रों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि वे वर्षों तक कठिन मेहनत कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाएं उनकी मेहनत पर पानी फेर देती हैं। छात्रों औऱ प्रदर्शनकारीयों ने कहा है कि लगातार हो रही ऐसी घटनाओं से देश की परीक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं और सरकार को इस पर जवाब देना चाहिए। यहीं वज़ह है कि जब तक दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होती और शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते तब तक आंदोलन जारी रहेगा ।
वहीं मधेपुरा जिले में ऐतिहासिक विद्यालयों के नाम बदले जाने तथा दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कथित पुलिस लाठीचार्ज के विरोध में बुधवार को महागठबंधन के बैनर तले जोरदार विरोध-प्रदर्शन किया गया। कार्यकर्ताओं ने शहर में आक्रोश मार्च निकालकर केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इसके बाद भूपेंद्र चौक पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का पुतला दहन किया। कार्यक्रम का संचालन राजद जिलाध्यक्ष सह महागठबंधन के संयोजक जयकांत यादव ने किया।
सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सुनियोजित तरीके से क्षेत्र की ऐतिहासिक धरोहरों और पहचान को समाप्त करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि रासबिहारी उच्च विद्यालय (मधेपुरा), भुवनेश्वरी उच्च विद्यालय (मुरलीगंज), रामहंस उच्च विद्यालय (चतरा) तथा महर्षि मेंही उच्च विद्यालय (कुमारखंड) जैसे ऐतिहासिक शिक्षण संस्थानों के नाम के साथ सरस्वती विद्या निकेतन जोड़ दिया गया है, जो स्थानीय इतिहास, शिक्षा व्यवस्था और क्षेत्रीय अस्मिता पर सीधा प्रहार है।
प्रदर्शन के दौरान महागठबंधन नेताओं ने सरकार से ऐतिहासिक विद्यालयों के पुराने नाम तत्काल बहाल करने और छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को दंडित करने की मांग की। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने शीघ्र निर्णय नहीं लिया, तो महागठबंधन चरणबद्ध और व्यापक आंदोलन शुरू करेगा।
मधेपुरा से रविकांत की रिपोर्ट, बगहा से परवेज आलम की रिपोर्ट