सपनों की पटरी पर अटका हथुआ-भटनी रेलखंड, भोरे की जनता कब तक सहेगी अनदेखी

गोपालगंज जिले का भोरे विधानसभा क्षेत्र आज भी एक बड़ी बुनियादी सुविधा के लिए तरस रहा है। जिस रेल परियोजना से इलाके के विकास और रोजगार की नई उम्मीदें बंधी थीं, वह सालों बीत जाने के बाद भी अधूरी लटकी हुई है।

विशेष रिपोर्ट: गोपालगंज जिले का भोरे विधानसभा क्षेत्र आज भी एक बड़ी बुनियादी सुविधा के लिए तरस रहा है। जिस रेल परियोजना से इलाके के विकास और रोजगार की नई उम्मीदें बंधी थीं, वह सालों बीत जाने के बाद भी अधूरी लटकी हुई है। स्थानीय निवासियों का दर्द यह है कि हर चुनाव में वादे तो बड़े-बड़े किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर सिर्फ अधूरा ढांचा नजर आता है।

रेल मंत्री रहते हुए लालू प्रसाद ने रखी थी आधारशिला

वर्ष 2007 में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव के कार्यकाल के दौरान हथुआ-भटनी रेलखंड की आधारशिला रखी गई थी। मकसद स्पष्ट था कि गोपालगंज के सुदूर इलाकों को सीधे रेल नेटवर्क से जोड़ जाए। ताकि इस इलाके क़े लोगो को रोजगार और आवागमन का सुगम रास्ता बन सके।

सत्ता बदली टूटी उम्मीद..

सत्ता बदलने और सालों बीतने के बाद यह परियोजना सिर्फ हथुआ से पंचदेवरी तक ही आज सिमट कर रह गई हैं। आगे का काम आज भी ठप पड़ा है। इलाके में रेलवे के अधूरे पुल और कंक्रीट के ढांचे तो भोरे क़े इलाकों में दिखते हैं। लेकिन वह भी अब अपनी पहचान से ओझल हो रहे हैं। वजह आज तक उन पर ट्रेन की पटरियां नहीं बिछाई जा सकीं।

मुआवजा मिला, पर काम रुका

भू-अर्जन विभाग, गोपालगंज के अनुसार इस रेलखंड के लिए किसानों को जमीन का मुआवजा बहुत पहले ही दिया जा चुका है।इसके बावजूद जमीन अधिग्रहण के बाद आगे का निर्माण कार्य आज भो अधर में लटका हुआ है।

संसद से सड़क तक उठती मांग

स्थानीय सांसद डॉ आलोक कुमार सुमन ने कई बार लोकसभा में इस अधूरे रेलखंड का मुद्दा उठाया है और कार्य को जल्द पूरा करने की मांग की है। एनडीए सरकार के दौर में स्थानीय लोगों को उम्मीद जगी थी कि इस प्रोजेक्ट को गति मिलेगी, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी जस की तस बनी हुई है।

यूपी के स्टेशनों का सहारा:

 भोरे में रेलवे स्टेशन और ट्रेन की सुविधा न होने के कारण स्थानीय यात्रियों और राहगीरों को ट्रेन पकड़ने के लिए पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के रेलवे स्टेशनों का रुख करना पड़ता है। इतना ही नहीं बेहतर कनेक्टिविटी न होने से इलाके में व्यापार और रोजगार के अवसर बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।

आज हथुआ-भटनी रेलखंड भोरे की जनता के लिए सिर्फ एक चुनावी वादा बनकर रह गया है। लोगों की टूटती उम्मीदें अब यही सवाल पूछ रही हैं कि आखिर उन्हें इस जरूरी सुविधा के लिए और कितना इंतजार करना पड़ेगा। 

गोपालगंज से कुमार प्रदीप की रिपोर्ट