मादा कुत्ते के साथ यौन हिंसा का आरोप, वीडियो के आधार पर केस दर्ज

भोजपुर जिले के संदेश थाना क्षेत्र के बिछियांव गांव में मादा कुत्ते के साथ कथित यौन हिंसा का मामला सामने आया है. घटना को लेकर पुलिस ने एक 45 वर्षीय व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

आरा: भोजपुर जिले के संदेश थाना क्षेत्र के बिछियांव गांव में मादा कुत्ते के साथ कथित यौन हिंसा का मामला सामने आया है. घटना को लेकर पुलिस ने एक 45 वर्षीय व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. मामले में वीडियो साक्ष्य और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान अहम माने जा रहे हैं. पशु अधिकार संगठन पेटा इंडिया के हस्तक्षेप के बाद भी मामला चर्चा में आया है. घटना पांच अक्टूबर की रात की बतायी जा रही है.

आरोपित की पहचान बिछियांव गांव निवासी दीपचंद राम के रूप में हुई है. शिकायत में दावा किया गया है कि वह पिछले करीब एक साल से आवारा पशुओं के साथ इस तरह की हरकत कर रहा था. हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी.

पीछा कर पहुंचे ग्रामीणों ने बनाया वीडियो

शिकायतकर्ता के अनुसार, पांच अक्टूबर की रात वह मछली पकड़कर घर लौट रहा था. इसी दौरान उसने आरोपित को एक मादा श्वान को गोद में लेकर अपने घर जाते देखा. संदेह होने पर उसने अन्य लोगों को इसकी जानकारी दी. इसके बाद कुछ ग्रामीण आरोपित के घर तक पहुंचे, जहां कथित तौर पर मादा श्वान के साथ यौन हिंसा होते देखे जाने का दावा किया गया. ग्रामीणों ने घटना का वीडियो बनाया और उसे पशु अधिकार संगठन पेटा इंडिया को भेज दिया.

वीडियो साक्ष्य के आधार पर प्राथमिकी

पुलिस के अनुसार, स्थानीय युवक मुकेश कुमार की शिकायत पर उपलब्ध वीडियो साक्ष्य के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गयी है. आरोपित के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 62 और 325 तथा पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किये जाने की जानकारी दी गयी है. घटना के बाद मादा श्वान की सरकारी पशु चिकित्सक से जांच करायी गयी. फिलहाल उसकी देखभाल स्थानीय व्यक्ति की निगरानी में की जा रही है. पुलिस मामले से जुड़े साक्ष्य जुटा रही है.

क्या कहते हैं जवाबदेह

कुमार आलोक, एसपीसीए निरीक्षक, भोजपुर (आरा)

भोजपुर जिले में मादा श्वान के साथ कथित यौन हिंसा की घटना अत्यंत गंभीर, चिंताजनक और निंदनीय है. बेजुबान पशुओं के साथ किसी भी प्रकार की क्रूरता या अमानवीय व्यवहार को हल्के में नहीं लिया जा सकता. पशु भी संवेदनशील जीव हैं और उन्हें भय, पीड़ा तथा शारीरिक कष्ट का अनुभव होता है.

इस मामले में पशु की सुरक्षा, समुचित उपचार और निष्पक्ष जांच प्राथमिकता होनी चाहिए. संबंधित पुलिस प्रशासन एवं पशुपालन विभाग को उपलब्ध वीडियो फुटेज, गवाहों के बयान और पशु चिकित्सकीय जांच रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए.

पशुओं के प्रति क्रूरता करने वाले किसी भी व्यक्ति को कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए. हालांकि, किसी व्यक्ति के दोषी होने का अंतिम निर्णय सक्षम न्यायालय साक्ष्यों के आधार पर करता है. आम नागरिकों से अपील है कि पशुओं के साथ क्रूरता की घटना सामने आने पर तत्काल पुलिस एवं संबंधित पशु कल्याण अधिकारियों को सूचना दें और कानूनी प्रक्रिया में सहयोग करें. बेजुबानों की रक्षा हमारी मानवीय संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी की कसौटी है.

भोजपुर से दीपक गुप्ता की रिपोर्ट