मशहूर पंडवानी गायिका तीजन बाई के निधन से संगीत जगत में शोक की लहर है। छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोककला पंडवानी को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने वाली महान लोकगायिका तीजन बाई का रविवार को 70 वर्ष की आयु में निधन हो गया। तीजन बाई के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दुख जताया है। PM मोदी ने उनके निधन को कला और संस्कृति जगत की अपूरणीय क्षति बताया। जबकि सीएम सम्राट चौधरी ने कहा-उनका अमूल्य योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।
मशहूर पंडवानी गायिका तीजन बाई के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुख जताते हुए कला और संस्कृति जगत की अपूरणीय क्षति बताया है। पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा है-सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका तीजन बाई जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की इस लोक कला को अपनी भव्य प्रस्तुति से दुनियाभर में एक विशिष्ट पहचान दिलाई। उनका जाना कला एवं संस्कृति जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिजनों और प्रशंसकों के साथ हैं। ओम शांति!
वहीं बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी मशहूर पंडवानी गायिका तीजन बाई के निधन पर दुख जताया है। सम्राट चौधरी ने एक्स पर लिखा है-प्रख्यात पंडवानी गायिका तीजन बाई जी के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है। उन्होंने अपनी अद्वितीय कला, सशक्त स्वर और समर्पण से भारतीय लोक संस्कृति को विश्व पटल पर नई पहचान दिलाई। उनका अमूल्य योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। ईश्वर दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोकाकुल परिजनों एवं उनके असंख्य प्रशंसकों को यह अपार दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें। ॐ शांति।
बता दें कि मशहूर पंडवानी गायिका तीजन बाई का रविवार को 70 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। लंबे समय से अस्वस्थ चल रही तीजन बाई ने रायपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में तड़के 3:15 बजे अंतिम सांस ली। तीजन बाई ने पंडवानी लोककला को देश-दुनिया में नई पहचान दिलाई। पद्मश्री, पद्मभूषण और पद्मविभूषण सहित कई बड़े सम्मान मिले थे।
दुर्ग जिले की रहने वाली तीजन बाई को पंडवानी शैली की सबसे बड़ी और प्रभावशाली कलाकार माना जाता था। अपनी दमदार आवाज, प्रभावशाली मंच प्रस्तुति और भावपूर्ण अभिनय के कारण तीजन बाई ने पंडवानी को गांवों और स्थानीय मंचों से निकालकर देश-दुनिया के प्रतिष्ठित सांस्कृतिक मंचों तक पहुंचाया। भारतीय लोककलाओं में उनके असाधारण योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री, पद्म भूषण और देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया था।