जो पार्टी से निष्काषित, वे वापस नहीं लिए जाएंगे, पार्टी युवाओं को देगी तरजीह : मायावती
उत्तर प्रदेश की पूर्व सीएम और बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने स्पष्ट किया है कि वैसे नेता जिनको पार्टी से निष्काषित किया जा चुका है, उनको पार्टी में वापस नहीं लिया जाएगा।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की पूर्व सीएम और बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने स्पष्ट किया है कि वैसे नेता जिनको पार्टी से निष्काषित किया जा चुका है, उनको पार्टी में वापस नहीं लिया जाएगा। मायावती ने यह जानकारी अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर पोस्ट कर के दी है। उन्होंने यह भी लिखा है कि उनकी पार्टी युवाओं को तरजीह देगी।
मायावती ने लिखा है कि पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया आदि में यह भी प्रचारित किया जा रहा है कि अनुशासनहीनता अपनाने व पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने आदि के कारण बी.एस.पी से निष्कासित लोगों को वापस लिया जायेगा, यह पूरी तरह से ग़लत एवं मिथ्या प्रचार है यानी कि यह फेक न्यूज़ है अर्थात ऐसे लोगों को बी.एस.पी में कतई भी वापस नहीं लियाा जायेगा।
उन्होंने जानकारी दी है कि वैसे तो बहुजन समाज पार्टी द्वारा पूरे देश भर में व ख़ासकर उत्तर प्रदेश में युवाओं को तरजीह देने की नीति के तहत जेन-जी को लगभग पचास प्रतिशत तक पार्टी संगठन में भागीदारी सुनिश्चित करने की प्रक्रिया काफी लम्बे समय से जारी है, किन्तु अब यूपी, उत्तराखण्ड एवं पंजाब विधानसभा आमचुनाव आदि में भी सर्वसमाज के कर्मठ व युवा प्रतिभाओं को पार्टी उम्मीदवार बनाने में प्राथमिकता देने के निर्देश पर भी अमल जारी है, ताकि नई पीड़ी के ज़रिये देश में आपेक्षित अम्बेडकरवादी राजनीति एवं संवैधानिक मूल्यों का तेज़ी से विकास हो सके और भारतीय संविधान का मानवतावादी, समतामूलक व सेक्युलर उद्देश्य ज़मीन पर लागू हो सके और सभी लोग सही से फल-फूल सकें, जैसाकि यूपी में बीएसपी. की चार बार रही सरकारों में क़ानून द्वारा क़ानून के आयरन लेडी राज के साथ ही जनहित, जनकल्याण एवं विकास आदि के मामलों में बेहतरीन सरकार होना साबित रहा है।
इस क्रम में, सड़क, बिजली पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य सम्बंधी लोगों की अहम ज़रूरतों के साथ ही सरकारी नौकरी, रोज़गार, स्कूल, अस्पताल, शहरी व ग्रामीण विकास आदि के साथ ही ’जेन-जी’ व ’जेन-अल्फा’ की भी बुनियादी ज़रूरतों पर मज़बूत इच्छाशक्ति के साथ कार्य किया गया और जिस क्रम में अनेकों स्कूल, कालेज, यूनिवर्सिटी, छात्रावास, ट्रेनिंग सेन्टर व पार्क आदि की स्थापना की गयी और इन प्रयासों के कारण लोगों का मजबूरी का पलायन होना भी काफी रूका है, जिससे कोई इंकार नहीं कर सकता है, किन्तु विरोधी पार्टियों के घोर जातिवादी रवैयों के कारण बीएसपी की सरकार सन 2012 में पाँचवी बार यहाँ सत्ता में नहीं आ सकी, जिसका पछतावा सर्वसमाज के लोगों को अभी तक भी है, क्योंकि बीएसपी सरकार के जाने के बाद से यहाँ पूरे प्रदेश में क़ानून द्वारा क़ानून का राज कायम नहीं होने से लोगों का जीवन दुखी ही नहीं बल्कि काफी त्रस्त भी बना हुआ है तथा विकास का सरकारी ढिंढोरा लोगों का पेट भी सही से नहीं भर पा रहा है।
उन्होंने कहा है कि पार्टी के लोगों को फिर से यह कहना है कि वे बीएसपी का उम्मीदवार चुनते समय सर्वसमाज के अच्छे लोगों को ही चुनें तथा युवा वर्ग को भी प्राथमिकता दें जिसमें महिला व पुरुष दोनों होने चाहिये, तो यह उचित होगा। बीएसपी द्वारा बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के आत्म-सम्मान व स्वाभिमान के जिस कारवाँ को लगातार मज़बूत करने व आगे बढ़ाकर सत्ता की मास्टर चाबी प्राप्त करके ’अपना उद्धार स्वंय करने योग्य’ बनाने के मिशन की बात है तो इसकी सफलता हेतु किसी का भी रोड़ा बनना मुझे कतई भी स्वीकार नहीं है अर्थात मुझे केवल अपने ’बहुजन समाज परिवार’ के हित, कल्याण व उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करने की ही रात-दिन चिन्ता रहती है, अपने किसी भी सगे भाई-बहन व उनके परिवार के युवा सदस्यों, तथा नज़दीकी रिश्ते-नातों आदि को भी मान्यवर कांशीराम की तरह मैंने भी, उन्हें पार्टी के कार्यों तक सीमित करके उन्हें सांसदी, विधायकी, मंत्री पद व अन्य किसी भी राजनैतिक लाभ आदि के पदों से हमेशा दूर रखा है। मेरे अविवाहित होने के नाते मुझे मजबूरी में, अपने सभी सगे भाई-बहनों में से किसी एक को और अन्ततः सबसे छोटे भाई आनन्द कुमार को अपने साथ रखने की भी ज़रूरत पड़ी है जो यह मेरी देखभाल करने के साथ-साथ मेरी पूरी निगरानी में पार्टी की अहम ज़िम्मेदारियों को भी काफी लम्बे समय से निभा रहे हैं, लेकिन इसका लाभ अब उनके परिवार के लोग भी उठायें तो यह पार्टी व मूवमेन्ट के हित में सही नहीं होगा।
इसीलिए आज मेरा अन्तिम यही फैसला व प्रतिज्ञा भी है कि इसके एवज में, अब इनके ख़ासकर किसी भी बेटे को बीएसपी में किसी भी छोटे-बड़े पद पर बने रहकर राजनीति करने का मौका नहीं दिया जायेगा। यदि आगे चलकर मेरे साथ रहते हुये आनन्द कुमार को मेरी मदद के लिए किसी और सदस्य की भी ज़रूरत पड़ती है तो फिर वह वर्तमान राजनैतिक हालात में केवल अपनी इकलौती बेटी कुमारी दीपिका आनन्द को, जो इस समय वकालत की पढ़ाई कर रही है, उसे आगे चलकर उसकी मदद ले सकते हैं और फिर उसकी ईमानदारी, वफादारी व कार्य क्षमता आदि को देखकर पार्टी में उसे ज़रूरतानुसार अपनी ख़ुद की ज़िम्मेवारी भी सौंप सकते हैं।
अपने लंबे पोस्ट में मायावती ने इन सबके अलावा कई अन्य मुद्दों पर विस्तार से लिखा है। ज्ञात हो कि पिछले कुछ दिनों से बीएसपी में हलचल मची हुई है। मायावती ने एक के बाद एक कई फैसले लिए। अब ऐसे में मायावती द्वारा किए गए इस पोस्ट के बाद सबकी निगाहें फिर एक बार बसपा की तरफ टिक गयी है।










