बांकीपुर उपचुनाव: पीके पर दर्ज हैं 8 आपराधिक मामले, चुनाव लड़ने में आएगी कानूनी बाधा? जानिए पूरा सच
बिहार की राजनीति में इन दिनों जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर सबसे अधिक चर्चा में हैं। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में उनके चुनावी मैदान में उतरने के साथ ही उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर उनके खिलाफ कितने मामले दर्ज हैं और क्या इनका उनके चुनाव लड़ने पर कोई कानूनी प्रभाव पड़ेगा? जन सुराज पार्टी द्वारा जारी C-7 फॉर्म के अनुसार, प्रशांत किशोर के खिलाफ कुल 8 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इन मामलों में उनके ऊपर 31 अलग-अलग धाराएं लगाई गई हैं। हालांकि, महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि अब तक किसी भी मामले में अदालत ने उन्हें दोषी नहीं ठहराया है और न ही किसी मामले में उन्हें सजा सुनाई गई है।
किन-किन जगहों पर दर्ज हैं मामले?
C-7 फॉर्म के अनुसार, प्रशांत किशोर के खिलाफ दर्ज मामले बेतिया, गांधी मैदान, पीरबहोर, सचिवालय (पटना), मुजफ्फरपुर और सहरसा थाना क्षेत्रों से जुड़े हैं। इनमें एक मामला वर्ष 2024 का है, जबकि अन्य सभी मामले वर्ष 2025 में दर्ज किए गए हैं। जानकारी के अनुसार, ये सभी मुकदमे विभिन्न जनहित के मुद्दों को लेकर किए गए आंदोलनों और प्रदर्शनों से संबंधित हैं।
प्रशांत किशोर ने क्या कहा?
प्रशांत किशोर पहले भी स्पष्ट कर चुके हैं कि उनके खिलाफ दर्ज मामले भ्रष्टाचार, आर्थिक अनियमितता या किसी नैतिक अपराध से जुड़े नहीं हैं। उनका कहना है कि ये मुकदमे जनता के मुद्दों को लेकर किए गए आंदोलनों के दौरान दर्ज हुए हैं।
क्या इन मामलों की वजह से चुनाव नहीं लड़ सकते?
कानूनी दृष्टि से इसका जवाब नहीं है। भारत के चुनावी कानून के अनुसार, केवल किसी व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने या आरोप तय होने मात्र से वह चुनाव लड़ने से अयोग्य नहीं होता। जब तक किसी मामले में अदालत उम्मीदवार को दोषी ठहराकर कानून के तहत निर्धारित अवधि की सजा नहीं सुनाती, तब तक वह चुनाव लड़ सकता है। इसी आधार पर प्रशांत किशोर का बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव लड़ना पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप माना जा रहा है।
बांकीपुर से चुनाव लड़ने की वजह क्या बताई?
प्रशांत किशोर का कहना है कि वर्षों के संगठनात्मक अनुभव, बिहार पदयात्रा के दौरान मिले जनसमर्थन और जनता के विश्वास के आधार पर जन सुराज पार्टी ने उन्हें बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव का उम्मीदवार बनाया है। चुनावी अभियान के दौरान प्रशांत किशोर ने बीजेपी पर भी हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि संसद पहुंचने के बाद नितिन नवीन ने बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र छोड़ दिया, जिसके कारण यहां उपचुनाव की स्थिति बनी।
प्रतिष्ठा की लड़ाई बना बांकीपुर चुनाव
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव अब केवल एक सीट का चुनाव नहीं रह गया है, बल्कि इसे बिहार की राजनीति में प्रतिष्ठा की लड़ाई के रूप में देखा जा रहा है। एक ओर लंबे समय से स्थापित राजनीतिक दल मैदान में हैं, वहीं दूसरी ओर पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे प्रशांत किशोर अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश में हैं। फिलहाल, उनके खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर राजनीतिक चर्चा जरूर तेज है, लेकिन अब तक किसी भी मामले में अदालत द्वारा दोषसिद्धि या सजा नहीं होने के कारण वे कानूनी रूप से चुनाव लड़ने के पात्र हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि बांकीपुर की जनता इस मुकाबले में किसे अपना समर्थन देती है।
पटना से विष्णु की रिपोर्ट
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